पटना

Zomato-Swiggy वालों को 5400 से 400000 रुपये तक की मदद देगी बिहार सरकार

बिहार विधानसभा में नया कानून बना। महिला गिग वर्कर्स को मातृत्व लाभ भी इस योजना के तहत मिलेगा।

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Jul 24, 2025
फैक्ट्री वर्कर्स के लिए अधिकतम ओवरटाइम सीमा को 75 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया गया। Patrika

Bihar Gig workers 4 lakh rupee scheme : बिहार सरकार ने गिग वर्कर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले डिलीवरी ब्यॉव को सौगात दी है। मानसून सत्र के दौरान विधानसभा में पारित नए कानून के तहत ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में डिलीवरी बॉय की मौत होने पर उसके परिजनों को 4 लाख रुपये की मदद दी जाएगी। अगर किसी गिग वर्कर की प्राकृतिक मौत होती है, तो परिजनों को 2 लाख रुपये की मदद दी जाएगी।

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गिग वर्कर्स के लिए वेलफेयर बोर्ड का गठन

राज्य के श्रम संसाधन मंत्री संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए एक वेलफेयर बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड के अध्यक्ष स्वयं मंत्री होंगे, जबकि सदस्य के तौर पर संबंधित विभागों के अधिकारी और ऑनलाइन कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

गिग वर्कर्स को यूनिक आईडी दी जाएगी

कानून के अनुसार, राज्य में काम कर रही सभी ऑनलाइन डिलीवरी और सर्विस कंपनियों को 60 दिनों में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। सभी गिग वर्कर्स को एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिससे वे सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकें। स्वास्थ्य संबंधी मदद को भी कानून में शामिल किया गया है। अगर कोई गिग वर्कर किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण एक हफ्ते से ज्यादा अस्पताल में भर्ती होता है तो उसे 16,000 रुपये की मदद दी जाएगी। एक सप्ताह से कम भर्ती होने पर 5,400 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी।

74,000 से लेकर 2.5 लाख रुपये तक की मदद

वर्कर की विकलांगता की स्थिति में अगर किसी उसकी 40 से 60 प्रतिशत तक क्षमता प्रभावित होती है, तो उसे 74,000 से लेकर 2.5 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी। महिला गिग वर्कर्स को मातृत्व लाभ भी इस योजना के तहत मिलेगा। इसके अलावा विधानसभा में कुछ अन्य अहम विधेयक भी पारित किए गए। फैक्ट्री वर्कर्स के लिए अधिकतम ओवरटाइम सीमा को 75 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया गया है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों से लिखित सहमति लेनी अनिवार्य होगी।

गिग इकोनॉमी में भी आएगा सुधार

सरकार का दावा है कि ये कदम बिहार की गिग इकोनॉमी और पारंपरिक मजदूर वर्ग दोनों की सामाजिक सुरक्षा और जीवनस्तर में सुधार लाएंगे। यह बिल देशभर में एक मिसाल बन सकता है कि कैसे राज्य सरकारें अनौपचारिक क्षेत्र में काम कर रहे लाखों युवाओं को सुरक्षित और संरक्षित कर सकती हैं।

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