बिहार के सासाराम में एक मां ने अपने दो बच्चों के साथ जहर खा लिया। मां की तो मौत हो गई, जबकि दोनों बच्चों का फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है। महिला के पति की एक हफ्ते पहले हत्या कर दी गई थी।
Bihar News:बिहार के रोहतास जिले के अगरेर थाना क्षेत्र में स्थित बाराडीह गांव में एक हफ्ते के अंदर एक पूरा परिवार पूरी तरह से तबाह होने की कगार पर पहुंच गया है। पति की हत्या के सदमे से टूट चुकी एक महिला ने अपने दो बच्चों के साथ जहर खा लिया। महिला की मौत वाराणसी में इलाज के दौरान हो गई, जबकि दोनों बच्चे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है और गांव में गहरे शोक का माहौल है।
यह बात 24 मार्च, 2026 की है, जब मुरादाबाद गांव में अपराधियों ने बाराडीह के रहने वाले हसन रजा को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला और उसके बाद सबूत मिटाने की कोशिश में उसके शव को किसी दूसरी जगह फेंक दिया। हसन रजा अपने घर में कमाने वाला इकलौता सदस्य था। उसकी मौत के बाद से उसकी पत्नी रेशमा गहरे सदमे में थी।
ग्रामीणों और परिवार के सदस्यों के अनुसार, हसन रजा की हत्या के बाद परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था और उन्हें दो वक्त का खाना जुटाने में भी मुश्किल हो रही थी। पति की मौत की वजह से एक तो रेशमा का हाल वैसे ही बेहाल था। आर्थिक तंगी ने उसके हौसले को पूरी तरह से तोड़ दिया था। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है कि आर्थिक तंगी ने इसमें कोई भूमिका निभाई, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि इस आत्महत्या के पीछे यही मुख्य कारण है।
सोमवार शाम को घर की खामोशी के बीच रेशमा ने सबसे पहले अपने दो मासूम बच्चों तैबा खातून और हमजा खान को सल्फास की गोलियां खिलाईं और फिर खुद भी वह जहर खा लिया। जैसे ही तीनों की हालत बिगड़ने लगी, घर में अफरा-तफरी मच गई। परिवार के सदस्य तुरंत तीनों को इलाज के लिए सासाराम के एक निजी अस्पताल ले गए। जब उनकी हालत और बिगड़ी, तो उन्हें सदर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया गया। जब वहां भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने तीनों को बेहतर इलाज के लिए वाराणसी रेफर कर दिया।
वाराणसी में इलाज के दौरान रेशमा खातून की मौत हो गई। दोनों बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों की हालत नाजुक है और उन्हें लगातार डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
अगरेर थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर धर्मेंद्र प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत अस्पताल पहुंच गई थी। लेकिन रेशमा की हालत इतनी गंभीर थी कि वह अपना आधिकारिक बयान दर्ज नहीं करवा पाई। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है ताकि आत्महत्या के पीछे की असली वजह का पता चल सके कि क्या यह अपराधियों के डर, सामाजिक दबाव या आर्थिक तंगी की वजह से किया गया था। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि महिला ने आत्महत्या का इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।