पटना

विदेशी दूल्हा और देसी शादी… चेक गणराज्य के बैलेस्टिक और मिशेल ने बिहार आकर रचाया ब्याह, पटना के गांव में लिए सात फेरे

Bihar News: पटना में हुई एक शादी चर्चा का विषय बन गई है, मिशेल ने अपने पार्टनर बैलिस्टिक के साथ अपने पुश्तैनी गांव रूपस में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। 2022 में यूरोप में शादी करने के बाद, यह जोड़ा अपनी जड़ों से जुड़ने और सनातनी रीति-रिवाजों को पूरा करने के लिए बिहार आया था।
2 min read
Feb 19, 2026
bihar news
बैलेस्टिक और मिशेल परिवार के साथ (फोटो- सोशल मीडिया)

Bihar News: कहते हैं कि इंसान दुनिया के किसी भी कोने में रहे, उसकी जड़ें हमेशा अपनी मिट्टी से जुड़ी रहती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा बिहार के पटना जिले के अथमलगोला प्रखंड स्थित रूपस गांव में देखने को मिला। यहां सात समंदर पार चेक गणराज्य (Czech Republic) से आई एक बेटी 'मिशेल' ने अपने विदेशी जीवनसाथी 'बैलेस्टिक' के साथ हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोबारा शादी रचाई। हाथों में मेहंदी, पैरों में महावर और सिर पर लाल जोड़ा सजाए मिशेल जब मंडप में बैठीं, तो पूरा गांव इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संगम का गवाह बना।

2022 में यूरोप में हुई थी शादी, पर मन में थी 'मिट्टी की चाह'

मिशेल मूल रूप से इसी रूपस गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता सालों पहले चेक गणराज्य जाकर बस गए थे, जहाँ मिशेल का जन्म और पालन-पोषण हुआ। साल 2022 में मिशेल और बैलेस्टिक की शादी यूरोपीय परंपरा के अनुसार चेक गणराज्य में ही संपन्न हो गई थी। लेकिन अपनी जड़ों और सनातनी परंपराओं के प्रति अगाध प्रेम ने उन्हें वापस बिहार खींच लाया। मिशेल की दिली इच्छा थी कि वह अपने पैतृक गांव में, अपने परिजनों और ग्रामीणों के बीच हिंदू धर्म के अनुसार वैदिक रीति से विवाह करें।

विदेशी दूल्हे पर चढ़ा 'देसी' रंग

शादी का माहौल किसी भव्य फिल्मी दृश्य जैसा था। विदेशी दूल्हा बैलेस्टिक पूरी तरह भारतीय रंग-ढंग में रंगा नजर आया। उसने न केवल हिंदू रस्मों को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया, बल्कि अग्नि के सामने सात फेरे लेकर सात जन्मों का साथ निभाने का वचन भी दिया। वैदिक मंत्रों के उच्चारण, शंख ध्वनि और शहनाई की धुन ने पूरे वातावरण को उत्सवपूर्ण बना दिया। दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

मेहंदी और महावर से सजी दुल्हन

मिशेल पारंपरिक भारतीय दुल्हन के लिबास में बेहद खूबसूरत नजर आ रही थीं। उन्होंने हाथों में गहरी मेहंदी रचाई थी और पैरों में महावर (आलता) लगाया था, जो बिहार की वैवाहिक परंपरा का अनिवार्य हिस्सा है। दुल्हन के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि भले ही वे विदेश में रहते हैं, लेकिन वे चाहते थे कि उनकी बेटी अपनी मूल संस्कृति को न भूले।

पूरे गांव में उत्सव का माहौल

रूपस गांव के लोगों के लिए यह पहला मौका था जब उन्होंने किसी विदेशी दूल्हे को अपने गांव की परंपराओं को इतनी आत्मीयता से अपनाते देखा। ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को पारंपरिक तरीके से आशीर्वाद दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस विवाह ने परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम की मिसाल पेश की है।

Updated on:
19 Feb 2026 02:11 pm
Published on:
19 Feb 2026 02:11 pm