पटना

IGIMS में नर्सिंग छात्राओं का भारी बवाल; पोस्टर पर लिखा- कॉलेज कोठा नहीं, प्रिंसिपल इस्तीफा दो

IGIMS Student Protest: पटना में IGIMS की नर्सिंग छात्राओं का गुस्सा चरम पर है। अस्पताल के गेट पर छात्राएं प्रबंधन के खिलाफ हंगामा कर रही हैं। छात्राओं की मांग है कि प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल इस्तीफा दें। 

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May 08, 2026
IGIMS के बाहर प्रदर्शन करतीं नर्सिंग की छात्राएं

IGIMS Student Protest: राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक IGIMS में नर्सिंग की छात्राओं का प्रदर्शन शुक्रवार को और अधिक उग्र हो गया है। सैकड़ों छात्राओं ने संस्थान के मुख्य द्वार को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे अस्पताल की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। छात्राओं के हाथों में मौजूद पोस्टरों पर लिखे शब्द प्रशासन के प्रति उनके गहरे गुस्से को बयां कर रहे हैं। पोस्टर पर 'कॉलेज कोठा नहीं है' जैसे स्लोगन लिखे हैं।

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स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

छात्राओं के प्रदर्शन की वजह से IGIMS का मुख्य गेट घंटों बंद रहा। इसका सीधा असर अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनकी सेवाओं पर पड़ा। एम्बुलेंस को अंदर ले जाने में भारी मशक्कत करनी पड़ी और कई सीनियर डॉक्टरों की गाड़ियां भी गेट के बाहर ही फंसी रहीं। सुरक्षाकर्मियों और पुलिस के काफी समझाने के बाद भी छात्राएं टस से मस नहीं हुईं। उनका साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और दोषियों पर गाज नहीं गिरती, वे पीछे नहीं हटेंगी।

प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल पर आरोप

प्रदर्शन कर रही लगभग 450 छात्राओं ने कॉलेज की प्रिंसिपल अनुजा डैनियल और वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्राओं ने उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का दावा है कि छोटी-छोटी बातों पर उनके साथ मारपीट की जाती है और भद्दी गालियां दी जाती हैं।

आरोप है कि छात्राओं को मानसिक रूप से इतना टॉर्चर किया जाता है कि कई छात्राएं डिप्रेशन का शिकार हो गई हैं। कुछ छात्राओं ने तो प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या तक की कोशिश की है। छात्राओं का कहना है कि जानबूझकर उन्हें इंटरनल असेसमेंट और परीक्षाओं में फेल करने की धमकी दी जाती है ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके।

पोस्टर लेकर बैठीं छात्राएं

छात्राओं ने अपने पोस्टरों के जरिए कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। 'कॉलेज कोठा नहीं है', 'मानसिक प्रताड़ना बंद करो', 'प्रिंसिपल इस्तीफा दो' और 'हमें न्याय चाहिए' जैसे नारों के साथ छात्राएं अस्पताल के गेट पर डटी रहीं। उनका कहना है कि वे यहां पढ़ने और अपना करियर बनाने आई हैं, लेकिन संस्थान का माहौल पूरी तरह से डर और अपमान वाला बना दिया गया है।

10 महीने से लंबित शिकायतों पर कोई एक्शन नहीं

आक्रोश का एक मुख्य कारण पुरानी शिकायतों पर कार्रवाई न होना भी है। छात्राओं का कहना है कि करीब 10 महीने पहले भी वाइस प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत की गई थी। उस समय संस्थान ने जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी भी बनाई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ और दोषियों पर क्या कार्रवाई हुई, यह आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। छात्राओं का आरोप है कि उच्च स्तर पर शिकायतों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

जांच का आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रिंसिपल अनुजा डैनियल ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि छात्राओं की लिखित शिकायत मिल गई है और मामले की जांच के लिए एक बार फिर 6 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। वहीं, दूसरी ओर वाइस प्रिंसिपल रुपाश्री दासगुप्ता मीडिया के तीखे सवालों से बचती नजर आईं और अपना पक्ष रखने से इनकार कर दिया। फिलहाल संस्थान में भारी तनाव का माहौल है और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है

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Published on:
08 May 2026 02:07 pm
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