IPS Diksha Cadre Transfer: 2021 बैच की IPS अधिकारी दीक्षा अब बिहार कैडर छोड़ रही हैं। उनका तबादला AGMUT कैडर में कर दिया गया है। बिहार में अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान दीक्षा तब सुर्खियों में आई थीं जब वह भारी पुलिस बल और बुलडोजर लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के साले सुभाष यादव के बंगले पर कुर्की करने पहुंच गई थीं।
IPS Diksha Cadre Transfer: बिहार में अपराधियों के खिलाफ अपने सख्त रवैये के लिए मशहूर 2021 बैच की IPS अधिकारी दीक्षा अब बिहार राज्य छोड़ रही हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें बिहार कैडर से मुक्त कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, IPS दीक्षा का तबादला अब AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर में कर दिया गया है।
IPS दीक्षा के इस अचानक इंटर-कैडर तबादले के पीछे कोई राजनीतिक या विवादास्पद कारण नहीं हैं। बल्कि, उनका तबादला शादी के आधार पर किया गया है। दीक्षा की शादी द्वारका गांधी से हुई है, जो AGMUT कैडर के 2022 बैच के एक IPS अधिकारी हैं। द्वारका गांधी जम्मू और कश्मीर के जम्मू जिले के रहने वाले हैं और वर्तमान में मिजोरम के आइजोल दक्षिण में SDPO के पद पर तैनात हैं। अब, अखिल भारतीय सेवाओं को नियंत्रित करने वाले नियमों के अनुसार, दीक्षा का तबादला भी उनके पति के कैडर यानी AGMUT में कर दिया गया है।
बिहार में अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान भी IPS दीक्षा ने ऐसी प्रतिष्ठा बनाई कि बड़े-बड़े बाहुबलियों के भी पसीने छूट गए। उनकी बहादुरी का सबसे चर्चित कारनामा फरवरी 2024 में देखने को मिला, जब वह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के छोटे साले सुभाष यादव के खिलाफ कुर्की वारंट तामील कराने पहुंची थीं। दानापुर में पोस्टिंग के दौरान दीक्षा सुबह-सुबह बिहटा और हवाई अड्डे थाने की भारी पुलिस फोर्स और बुलडोजर लेकर सुभाष यादव के आलीशान बंगले के ठीक सामने खड़ी हो गईं थी।
जब सुभाष यादव को दरवाजे पर बुलडोजर और पुलिस होने का पता चला तो वो पूरी तरह से सन्न रह गए। कड़क मिजाज आईपीएस दीक्षा ने किसी की पैरवी नहीं सुनी और बंगले को गिराने का अल्टीमेटम दे दिया था। खौफ का आलम यह था कि सुभाष यादव पिछले दरवाजे से कुर्ता-पाजामा पहनकर भागे और सीधे कोर्ट में जाकर सरेंडर कर दिया। जब तक दीक्षा को कोर्ट से सरेंडर का कन्फर्मेशन नहीं मिला, वह बुलडोजर के साथ गेट पर मुस्तैद रहीं।
दानापुर के बाद पटना के बेहद हाई-प्रोफाइल व्यवसायी और भाजपा नेता गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच की कमान भी आईपीएस दीक्षा के हाथों में थी। जिस इलाके में इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया, वहां की जिम्मेदारी संभालते हुए दीक्षा ने अपराधियों के खिलाफ सघन अभियान चलाया और हर एक पहलू की खुद मॉनिटरिंग कर हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में दिन-रात एक कर दिया था। इससे पहले प्रोबेशन के दौरान उन्होंने सीतामढ़ी में बतौर थाना प्रभारी (SHO) भी अपराधियों की कमर तोड़ी थी।
मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनू जिले के खेतड़ी की रहने वाली दीक्षा की सफलता की कहानी देश भर के लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उनके पिता हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड में AGM के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। वर्ष 2018 में दीक्षा ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी में B.Tech की डिग्री हासिल की।
यूपीएससी के अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 342वीं रैंक हासिल की और उन्हें रेलवे सेवा (IRTS) मिली। लेकिन उनके पिता की जिद थी कि बेटी को खाकी वर्दी में देखना है। पिता के इस सपने को पूरा करने के लिए दीक्षा ने रेलवे की नौकरी ज्वाइन करने के बावजूद पढ़ाई जारी रखी और तीसरे प्रयास में 238वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बन गईं।
दीक्षा ने न केवल परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया, बल्कि उन्होंने हैदराबाद में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में अपने प्रशिक्षण के दौरान भी शानदार प्रदर्शन किया था। जहां दीक्षा को अपने प्रदर्शन के लिए 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया गया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह पदक प्रदान कर सम्मानित किया था।