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नालंदा में छोला-चावल खाते ही अस्पताल पहुंचे 50 बच्चे, थाली में मिली दवा की गोली, मौके पर पहुंचे SDO

Nalanda mid day meal incident: नालंदा जिले के नगरनौसा के मध्य विद्यालय में बुधवार को मिड-डे-मील का भोजन खाने से 50 से अधिक बच्चे अचानक बीमार हो गए। सभी का अस्पताल में इलाज चल रहा है। 5वीं कक्षा की छात्रा के अनुसार सब्जी में एक दवा की गोली मिली थी। घटना की सूचना मिलते ही हिलसा SDO अमित कुमार पटेल और शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी अस्पताल पहुंचे हैं। 

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पटना

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Anand Shekhar

May 20, 2026

Mid Day Meal Incident in government school

सरकारी स्कूल में मिड डे मील खाते बच्चे (फ़ाइल फ़ोटो )

Nalanda mid day meal incident: बिहार के नालंदा जिले के एक मिडिल स्कूल में 50 से ज्यादा बच्चे मिड डे मील का खाना (छोले-चावल) खाने के तुरंत बाद एक-एक करके बीमार पड़ गए। कई बच्चे तो मौके पर ही गिर पड़े और बेहोश होकर जमीन पर लुढ़क गए। जिसके बाद स्कूल परिसर समेत पुरे इलाके में अफरा-तफरी मच गयी। इस घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई और हिलसा SDO समेत शिक्षा विभाग के तमाम आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे।

खाना खाते ही बिगड़ने लगी तबियत

रोज की तरह बुधवार को भी स्कूल के लंच ब्रेक के दौरान बच्चों को गरमागरम छोले और चावल परोसे गए। बच्चे बड़े चाव से खाना खा रहे थे कि अचानक कुछ बच्चों को जी मिचलाने लगा और पेट में ऐंठन के कारण वे दर्द से कराहने लगे। देखते ही देखते 50 से ज्यादा बच्चों ने उल्टी, दस्त और चक्कर आने की शिकायत की। दर्द से कराहते हुए कई मासूम बच्चे स्कूल के गलियारों और क्लासरूम में ही गिर पड़े और बेहोश हो गए।

5वीं कक्षा की छात्रा ने किया खुलासा

अस्पताल में इलाज करवा रही छात्रा अमृता ने बताया कि जैसे ही उसने अपनी प्लेट में परोसे गए चावल और छोले की सब्जी को मिलाया, उसे सब्जी के एक कोने में दवा की एक गोली दिखाई दी। अमृता के अनुसार, उसने तुरंत पास खड़े बच्चों को इस बारे में आगाह किया, लेकिन तब तक लगभग सभी छात्र खाना खा चुके थे। खाना खाने के 10 से 15 मिनट के भीतर ही, बच्चों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

बच्चों से पहले नहीं चखा खाना, बाद में खाया तो शिक्षक भी हुए बेहोश

मिड-डे मील के दिशानिर्देशों के अनुसार, छात्रों को खाना परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्कूल के प्रधानाचार्य या किसी वरिष्ठ शिक्षक द्वारा उसे चखना अनिवार्य होता है। हाहालांकि इस स्कूल में इस नियम का पूरी तरह से उल्लंघन किया गया। इसके बावजूद, जब बच्चे बीमार पड़ने लगे और स्कूल में अफरा-तफरी मच गई, तो अमरेश नामक एक शिक्षक ने सच्चाई पता करने के लिए वही छोले-चावल खाने का फैसला किया। खाना खाते ही, शिक्षक की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई और वो बेहोश होकर गिर गए। आनन-फानन में, शिक्षक को भी बच्चों के साथ इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।

लापरवाही पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश

स्कूल की प्रधानाचार्य रजनी कुमारी ने बताया कि बच्चों के खाना शुरू करने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई बच्चों को लगातार उल्टियां होने लगीं, जिसके बाद उन सभी को तुरंत नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और चांदी रेफरल अस्पताल ले जाया गया। वहीं, इस घटना के बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने खाना आपूर्ति करने वाले NGO के खिलाफ जोरदार नारे लगाए और आरोप लगाया कि बच्चों को ऐसा खाना परोसा जा रहा था जो जानवरों के खाने लायक भी नहीं था।

अस्पताल पहुंचे अधिकारी

मामले की सूचना मिलते ही हिलसा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अमित कुमार पटेल, शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) आनंद विजय और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) आनंद शंकर तुरंत नगरनौसा पीएचसी पहुंचे। अधिकारियों ने एक-एक बच्चे के पास जाकर उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए। ।