पटना-गया मुख्य सड़क पर वन विभाग की जमीन पर जहानाबाद जिला प्रशासन की ओर से करीब 100 करोड़ सड़क बना दी गई। वन विभाग की भूमि पर बने इस सड़क पर खड़े दर्जनों पेड़ मौत की तरह जगह-जगह खड़े हैं। ये पेड़ अब सड़क पर चलने वाले हर वाहन चालक के एक स्थायी खतरा बन चुका है। ये अजीबो गरीब नजारा पटना गया रोड स्थित एरकी पवार ग्रिड के पास का है।
वन विभाग की जमीन पर 100 करोड़ सड़क बनकर तैयार हो गई। वन विभाग के बिना अनुमति के जहानाबाद जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति दे दी। वन विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जहानाबाद जिला प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ काननू कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वन विभाग के पदाधिकारी ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है। जांच के निर्माण कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।
पटना-गया मुख्य सड़क के चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी कड़ी में पटना गया रोड स्थित जहानाबद के एरकी पवार ग्रिड के पास करीब 100 करोड़ की लागत से सड़क चौड़ीकरण का काम किया जाना था। सड़क चौड़ीकरण के लिए जो जमीन चाहिए थी वह वन विभाग की थी। जहानाबाद जिला प्रशासन की ओर से सड़क चौड़ीकरण के लिए वन विभाग से उसकी जमीन और जो पेड़ लगे हैं उसकी कटाई की अनुमति मांगा। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई के बदले 14 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की।
जिला प्रशासन ने इसके बाद वन विभाग के नियमों को बिना पूरा किए उसपर सड़क बनाने की अनुमति दे दी। जिला प्रशासन की अनुमति पर निर्माण कंपनी ने सड़क का चौड़ीकरण कर दिया और पेड़ को छोड़ दिया। अब सड़क में जगह-जगह पेड़ ही पेड़ नजर आ रहे हैं। इसे देखकर लग रहा है कि सड़क पर हरी मौत के खंभे खड़े हों। दर्जनों पेड़ के सीधे सड़क के बीचो-बीच खड़े होने के कारण प्रतिदिन हजारों वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर यहां से गुजरने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की चौड़ीकरण हो गया लेकिन बीच सड़क से पेड़ नही हटाये गए, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
जहानाबाद के एसडीओ का कहना है कि यह प्रशासन की जानकारी में है। निर्माण कंपनी को निर्देश दिया गया था कि वो सड़क के बीच में आने वाले पेड़ों में रेडियम लगाने का निर्देश दिया गया था। लेकिन निर्माण कंपनी की ओर से नहीं लगाया गया है। हम इसकी जांच कर रहे हैं। वन विभाग से भूमि का स्थानांतरण का मामला अभी लंबित है। यह पूछने पर कि आपने बिना अनुमति के कैसे निर्माण कर दिया इसपर उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
वन विभाग के पदाधिकारी का कहना है कि पूरे मामले की जांच के बाद इस मामले में कार्रवाई की जायेगी। इसके लिए हमने सीनियर पदाधिकारी से निर्देश भी मांगा है।