
Bharat Tiwari Encounter: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी एक बार फिर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस के समर्थन में नजर आए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो कार्रवाई की, वह सही थी। यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिसकर्मी ही मारे जाते।
दरअसल, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान शुक्रवार को भरत तिवारी के परिजनों से मिलने भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने परिवार को गले लगाकर सांत्वना दी और कहा कि जो हुआ वह गलत हुआ। उन्होंने इसे एनकाउंटर नहीं, बल्कि हत्या बताते हुए कहा कि मामले में जो भी दोषी हैं, उनकी गिरफ्तारी होगी और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। चिराग पासवान के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतन राम मांझी ने कहा, " चिराग जो करते हैं, वह हम नहीं करेंगे? उन्होंने आगे कहा कि पुलिस ने जो कार्रवाई की, वह बिल्कुल सही थी। यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिसकर्मी ही मारे जाते।"
मांझी ने आगे कहा कि अगर भरत तिवारी अपराधी नहीं था, तो उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला क्यों दर्ज किया गया था? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भरत तिवारी जिस रिवॉल्वर को दिखा रहा था, क्या वह लाइसेंसी थी? पुलिस का बचाव करते हुए उन्होंने कहा, "अगर पुलिस की मंशा उसे मारने की होती, तो सिर या छाती में गोली मारती। पुलिस ने कमर के नीचे गोली चलाई। उसकी मौत हो गई, यह अलग बात है।"
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी बिहार की राजनीति के दो प्रमुख दलित चेहरे हैं। जीतन राम मांझी अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं, जबकि चिराग पासवान कई बार बिना नाम लिए उनके बयानों पर प्रतिक्रिया देते रहे हैं। कुछ दिन पहले दिल्ली में एक बिहारी युवक की हत्या के मामले में जीतन राम मांझी ने कहा था, "मार दिया तो मार दिया, इसमें कौन सी बड़ी बात है।" इस बयान पर चिराग पासवान ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। बिना मांझी का नाम लिए उन्होंने कहा था कि यदि कोई पीड़ित परिवार का दर्द नहीं समझ सकता, तो कम से कम उनके जख्मों पर नमक नहीं छिड़कना चाहिए। चिराग पासवान के इस बयान को विभिन्न सामाजिक वर्गों से व्यापक समर्थन मिला था।