Kaimur Murder Mystery: बिहार के कैमूर जिले की पुलिस ने एक नदी और नहर में टुकरों में मिलीं लाशों के मामले को सुलझा लिया है। इस अपराध को किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि मृतकों के अपने ही दो सगे भाइयों ने मिलकर अंजाम दिया था।
Kaimur Murder Mystery:बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में पिछले छह दिनों से जारी सस्पें का अंत हो गया है। महज 60 घंटे के भीतर नदी और नहर से टुकड़ों में बरामद की गई चार बिना सिर की लाशों की मर्डर मिस्ट्री को पुलिस ने पूरी तरह सुलझा लिया है। इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे डहरक गांव के ही दो सगे भाई विकास गुप्ता और गौतम गुप्ता निकले, जिन्होंने अपने महाराष्ट्र के एक दोस्त के साथ मिलकर इस खूनी खेल को रचा था। पुलिस ने मुख्य आरोपी विकास समेत तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर नदी किनारे झाड़ियों से दंपती के कटे सिर बरामद कर लिए गए। वहीं, गोताखोर अभी भी नदी में उन मासूम बच्चों के सिर की तलाश कर रहे हैं।
पुलिस गिरफ्त में आए मुख्य आरोपी विकास गुप्ता ने पूछताछ में बताया कि हत्या कि वजह घर में हुआ मामूली विवाद था। जांच में पता चला कि डहरक गांव निवासी मृतक कृष्ण मुरारी गुप्ता फास्ट फूड का ठेला लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। तीन साल पहले उसे सरकार की ओर से भूमिहीनों के लिए मिलने वाली 5 डिसमिल जमीन मिली थी। इसी जमीन और महज सात फुट के छोटे से साझा आंगन को लेकर भाइयों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। इसी घरेलू कलह की वजह से महाराष्ट्र में नौकरी करने वाला छोटा भाई चार दिन पहले गांव आया और बड़े भाई को रास्ते से हटाने की साजिश रची।
आरोपियों ने सबसे पहले कृष्ण मुरारी और उसकी पत्नी दुर्गेश कुमारी की बेरहमी से हत्या की। लेकिन जब इस खौफनाक मंजर को मुरारी के 8 साल के बेटे अंश और 4 साल की बेटी प्राची ने देख लिया, तो पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने उन मासूमों का भी गला रेत दिया। साक्ष्य मिटाने के लिए सभी शवों को धारदार छुरी से टुकड़ों में काटा गया और सूटकेस व बोरियों में बंद कर दुर्गावती नदी और कर्मनाशा नहर में फेंक दिया गया।
जब लाशें मिलीं तो इस मर्डर केस को सुलझाना पुलिस के लिए नामुमकिन सा लग रहा था क्योंकि लाशों के टुकरे कर दिए गए थे और उनके सिर गायब थे। सबसे पहले 10 मई को नदी में दो सूटकेस तैरते मिले थे, जिसमें पुरुष और बच्चे के पैर मिले। दो दिन बाद 12 मई को कुछ दूरी पर नहर से बोरियों में बंद महिला और बच्ची का धड़ मिला। शिनाख्त की तमाम कोशिशें नाकाम हो रही थीं, लेकिन तभी एसआईटी और जिला पुलिस को बच्ची के शव के पास से पीले रंग की एक आंगनबाड़ी ड्रेस मिली। इस ड्रेस की कॉलर पर रामगढ़ की एक स्थानीय सिलाई दुकान का छोटा सा टैग लगा था। बस, इसी छोटे से टैग से पूरे केस की गुत्थी सुलझ गई।
दर्जी के टैग को लीड बनाकर कैमूर एसपी हरि मोहन शुक्ला के निर्देश पर पुलिस टीम ने रामगढ़ इलाके के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की लिस्ट खंगालनी शुरू की। जल्द ही पुलिस को पता चला कि डहरक गांव का एक बच्चा पिछले 5-6 दिनों से केंद्र पर नहीं आ रहा है। जब पुलिस की टीम डहरक गांव में कृष्ण मुरारी के घर पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा था और मुख्य दरवाजे पर बाहर से ताला लटका था। पड़ोसियों ने बताया कि कुछ दिनों से पूरा परिवार घर पर नहीं है और उनका मोबाइल भी कई दिनों से स्विच ऑफ है।
शक गहराने पर एसपी ने तुरंत मकान को सील करवाया और फॉरेंसिक टीम बुलाई। घर के अंदर जांच के दौरान दीवारों और फर्श पर खून साफ करने के संदिग्ध निशान मिले। इसके बाद पुलिस ने बिना वक्त गंवाए बगल में ही रह रहे छोटे भाई विकास गुप्ता को हिरासत में लिया। पुलिस की पूछताछ के आगे विकास ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी कहानी उगल दी।
इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी भाई विकास और गौतम की शादियां महज छह महीने पहले ही हुई थीं। जिस घर में कुछ महीने पहले नई दुल्हनों के आने की खुशियां मनाई जा रही थीं, आज वहां सगे भाइयों के हाथों पूरे खानदान के खात्मे का मातम पसरा है। पुलिस के अनुसार, हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद कर लिया गया है और मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को जल्द से जल्द फांसी के फंदे तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।