
बिहार के कटिहार सदर अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। मेडिकल जांच के लिए तीन नाबालिग बच्चों को गमछे से बांधकर अस्पताल लाया गया। इन बच्चों को पूर्णिया बाल संरक्षण इकाई की गाड़ी से ऑब्जर्वेशन होम से कटिहार लाया गया था। अस्पताल पहुंचने के दौरान तीनों बच्चों के हाथ आपस में गमछे से बंधे हुए थे। इस मामले में जब ऑब्जर्वेशन होम के कर्मियों से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि सुरक्षा कर्मियों की कमी के कारण ऐसा करना पड़ा। उनका कहना था कि बच्चों के भाग जाने की आशंका को देखते हुए उन्हें बांधकर लाया गया।
ऑब्जर्वेशन होम के कर्मचारियों ने बताया कि भीड़-भाड़ और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण यह कदम उठाना पड़ा। उनका कहना था कि बच्चों को किसी तरह का नुकसान पहुंचाने की कोई मंशा नहीं थी, बल्कि सुरक्षा के मद्देनजर ऐसा किया गया।
वहीं, इस मामले पर कटिहार बाल कल्याण समिति ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि यह किशोर न्याय अधिनियम 2015 का उल्लंघन है। समिति के अनुसार, किसी भी बच्चे को इस तरह बांधकर लाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रंगनाथ ने कहा कि ऐसे कृत्य के लिए कानून में कड़े प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों में एक लाख रुपये तक जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल एक सार्वजनिक स्थान है और वहां बच्चों को इस तरह बांधकर लाना गैरकानूनी है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन है, जो प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
इस मामले पर कटिहार बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस घटना को लेकर जेजे बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, जिला अधिकारी और एनसीपीसीआर में शिकायत दर्ज कराई जाएगी तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।