नालंदा के मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में आज मची भगदड़ में नौ लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए दीपनगर थानाध्यक्ष राजमणि को निलंबित कर दिया है।
बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दीपनगर थाना प्रभारी राजमणि को निलंबित कर दिया है। नालंदा के एसपी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच जारी है और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंगलवार को शीतला अष्टमी के अवसर पर मंदिर परिसर में मची भगदड़ में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, भगदड़ की सूचना मिलने के काफी देर बाद पुलिस मंदिर पहुंची, जिसके बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि जब मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे थे, तब सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर थाने की ओर से पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी।
जिला प्रशासन ने इसे भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मानते हुए थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने भी मौके पर पर्याप्त पुलिस बल और नियंत्रण व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया।
इसके बाद एसपी ने तत्काल प्रभाव से थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, श्रद्धालु शुरुआत में कतार में खड़े थे, लेकिन तेज धूप के कारण लोग आगे-पीछे होने लगे। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, कतार का अनुशासन पूरी तरह टूट गया। देर से आने वाले लोग पहले दर्शन करने की कोशिश में आगे बढ़ने लगे, जिससे धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी। नतीजतन, अफरातफरी के बीच कई लोग चक्कर खाकर गिर पड़े और उनके ऊपर अन्य लोग गिरते चले गए। इसी स्थिति ने भगदड़ का रूप ले लिया, जिसमें कई लोगों की जान चली गई।
इस घटना के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर में कुछ लोग पैसे लेकर श्रद्धालुओं को ‘सीधे प्रवेश’ दिला रहे थे। बताया गया कि 500 रुपये देने वालों के लिए अलग लाइन बनाई गई थी और उन्हें सीधे अंदर भेजा जा रहा था, जबकि अन्य लोग लंबी कतार में इंतजार कर रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब बैरिकेडिंग (बांस की बल्लियां) हटाई गई, तो अचानक भीड़ बेकाबू हो गई और स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते भगदड़ में बदल गई।
भगदड़ में घायल महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने बताया कि मंदिर परिसर में पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक व्यवस्था नहीं थी। महिला श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि भीड़ प्रबंधन की उचित और प्रभावी तैयारी की गई होती, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।