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Video: नालंदा मघड़ा शीतला माता मंदिर हादसा: रोती महिला ने सुनाई दहशत, चीख, अफरा-तफरी की कहानी

नालंदा मघड़ा शीतला माता मंदिर में चैत्र माह के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (शीतला अष्टमी) के दिन मां की विशेष पूजा की जाती है।

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नालंदा मघड़ा शीतला माता मंदिर हादसा की कहानी बताती महिला। फोटो एएनआई

बिहार शरीफ के मघड़ा स्थित शीतला देवी मंदिर में मंगलवार को मची भगदड़ में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। मंदिर में भगदड़ किन कारणों से मची, इसकी जांच के लिए मुख्य सचिव ने आदेश दे दिया है।

घटना के समय वहां मौजूद एक महिला ने रोते हुए पूरी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि भगदड़ मचते ही लोग जान बचाने के लिए एक-दूसरे को पैरों तले कुचलते हुए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। महिला के अनुसार, मंदिर परिसर में अत्यधिक भीड़ थी, लेकिन उसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई थी।

क्यों जुटी थी इतनी भीड़?

चैत्र माह के आखिरी मंगलवार के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शीतला माता के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे थे। वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (शीतला अष्टमी) के दिन मां की विशेष पूजा की जाती है।

इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और श्रद्धालु एक दिन पहले बना हुआ बासी भोजन ही माता को भोग के रूप में अर्पित करते हैं। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोग सुबह से ही मंदिर पहुंचकर कतार में खड़े थे, जिससे वहां अत्यधिक भीड़ जमा हो गई।

चश्मदीद ने बताई भगदड़ की असली वजह

माता के दर्शन के लिए पहुंचे चश्मदीद संजय सिंह ने बताया कि मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ी हुई थी, जिसके कारण भक्तों की लंबी कतार लग गई थी। दर्शन के लिए आए अधिकांश लोग तेज धूप में भूखे-प्यासे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि गर्मी और भीड़ के कारण कुछ लोग कतार में खड़े-खड़े ही बेहोश होने लगे। यह देख वहां मौजूद भीड़ घबरा गई और स्थिति अचानक अनियंत्रित हो गई, जिससे भगदड़ मच गई।

संजय सिंह के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद मंदिर प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भगदड़ में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। कई लोग दर्द से तड़पते रहे और काफी देर बाद ही एंबुलेंस मौके पर पहुंच सकी।