नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्य सभा की शपथ लेंगे। बिहार से जो 5 राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं सभी का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है ।
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर अगले दस दिनों में प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके इस्तीफे के बाद 14 अप्रैल को नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है। नए मुख्यमंत्री के साथ-साथ नए मंत्रिमंडल का भी गठन और शपथ ग्रहण हो सकता है, जिसमें कई नए चेहरों को मौका मिलने की उम्मीद है। बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर सियासी हलकों में कई नामों की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक नित्यानंद राय और सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं।
मनोज तिवारी ने मंगलवार रात पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बिहार को जल्द ही नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। उनके अनुसार, एनडीए 10 मार्च को नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। हालांकि, पटना के राजनीतिक गलियारों में खरमास के बाद ही नए सीएम के नाम की घोषणा होने की चर्चा चल रही है। जदयू सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 9 अप्रैल को पटना से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। 10 अप्रैल को वे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद 11 अप्रैल को दिल्ली से पटना लौटेंगे और 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद एनडीए के घटक दलों में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मंथन होगा। सूत्रों के अनुसार, 13 अप्रैल को एनडीए विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इस बैठक में बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।
एनडीए के नए विधायक दल के नेता, घटक दलों की बैठक के बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। माना जा रहा है कि 14 अप्रैल को नई सरकार शपथ ले सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को मुख्यमंत्री बनाने का अवसर मिल सकता है। बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय के अलावा दिलीप जायसवाल, संजय जायसवाल, मंगल पांडेय और संजीव चौरसिया के नामों की भी चर्चा है।
हालांकि, पार्टी के भीतर बढ़ते भरोसे के चलते सम्राट चौधरी को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है और उन्हें केंद्रीय नेतृत्व की स्वाभाविक पसंद भी बताया जा रहा है। वहीं, नित्यानंद राय 2015 के चुनाव से ही राज्य में बीजेपी के ‘सीएम-इन-वेटिंग’ माने जाते रहे हैं, इसलिए उनके नाम की भी जोरदार चर्चा है। दोनों नेताओं को केंद्रीय गृहमंत्री अमीत शाह का करीबी माना जाता है। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि अंतिम फैसला दिल्ली से ही होगा। यदि दोनों में से किसी एक नाम पर सहमति नहीं बनती है, तो किसी तीसरे चेहरे को भी आगे लाया जा सकता है।