पटना

नीतीश कुमार 30 मार्च को छोड़ेंगे MLC पद, लेकिन 6 महीने तक बने रह सकते हैं CM; प्रेम कुमार ने बताया फॉर्मूला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 मार्च को विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा देंगे। हालाँकि, इस बारे में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है कि क्या वे मुख्यमंत्री के पद से भी हटेंगे। इस संबंध में, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि MLC के पद से इस्तीफा देने के बावजूद, अगर नीतीश कुमार चाहें तो वे छह महीने तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करना जारी रख सकते हैं।

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Mar 27, 2026
बिहार सीएम नीतीश कुमार (फोटो- X@JDU)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सोमवार 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। राज्य सभा के लिए चुने जाने के बाद, संवैधानिक नियम के अनुसार उन्हें 14 दिनों के भीतर पिछले सदन की अपनी सदस्यता छोड़नी होगी। हालांकि, इस इस्तीफे का मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी स्थिति पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने साफ किया है कि, अगर नीतीश कुमार चाहें तो वो अगले छह महीनों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आराम से बने रह सकते हैं।

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इस्तीफे के लिए 30 मार्च की तारीख ही क्यों?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्य सभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनके साथ NDA के चार अन्य सदस्य भी चुने गए थे, जिनमें BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर दोनों सदनों में से किसी एक से इस्तीफा देना जरूरी होता है। चूंकि बिहार विधानमंडल में 29 मार्च तक अवकाश है, इसलिए नीतीश कुमार अपने MLC पद से और नितिन नवीन अपने MLA पद से इस्तीफे की आधिकारिक प्रक्रिया 30 मार्च को पूरी करेंगे।

बता दें कि बिहार से चुने गए अन्य राज्यसभा सदस्यों में, उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर पहले से ही राज्यसभा के मौजूदा सदस्य हैं, जबकि शिवेश कुमार राम किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। नतीजतन, इन तीनों व्यक्तियों को किसी भी पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है।

प्रेम कुमार ने 6 महीने के नियम को समझाया

पत्रकारों से बात करते हुए, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार के MLC पद से हटने के बाद भी मुख्यमंत्री के तौर पर बने रहने में कोई तकनीकी रुकावट नहीं है। उन्होंने समझाया कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, कोई भी व्यक्ति जो दोनों सदनों में से किसी का भी सदस्य नहीं है, वह भी छह महीने तक मंत्री या मुख्यमंत्री का पद संभाल सकता है।

इसका मतलब है कि नीतीश कुमार के पास सितंबर 2026 तक का समय है। वे उस समय तक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते रह सकते हैं। हालांकि, इस बीच में उन्हें या तो विधान परिषद या विधानसभा के लिए फिर से चुनाव जीतना होगा, या फिर मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना होगा।

चारों सदन का होगा अनुभव

नीतीश कुमार के इस्तीफे का सवाल पूछे जाने पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि प्रोटोकॉल के अनुसार, चुनाव जीतने के 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन से इस्तीफा देना जरूरी होता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। गौरतलब है कि यह नीतीश कुमार के राजनीतिक करियर में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। वह देश के उन चुनिंदा नेताओं की कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों, लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा और विधान परिषद की सदस्यता हासिल की है।

क्या अप्रैल में होगा सत्ता परिवर्तन?

वैसे तो संवैधानिक रूप से नीतीश कुमार सितंबर तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि राज्य सभा सांसद के तौर पर शपथ लेने के कुछ ही समय बाद, अप्रैल के दूसरे सप्ताह में वह सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसी भी चर्चा है कि वह सम्राट चौधरी को बिहार का नया सीएम घोषित कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।

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