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घर में नहीं थी गैस, लकड़ी लाने गए नदी पार; डूबने से 3 बच्चों की मौत, भाई को बचाने में 2 बहनों ने गंवाई जान

सारण में 7 बच्चे घर में चूल्हा जलाने के लिए नदी पार करके लकड़ी लाने गए थे। लेकिन इस दौरान एक ही परिवार के तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद पूरा गांव सदमे में है।

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 27, 2026

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हादसे के बाद घटनास्थल पर मौजूद लोग

Bihar News:बिहार के सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र स्थित मटियार गांव में शुक्रवार को हुए एक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। यहां एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चे सरयू (घाघरा) नदी में डूब गए, जब वे अपनी रसोई का चूल्हा जलाने के लिए सूखी लकड़ी इकट्ठा करने निकले थे। मरने वालों में सगे भाई-बहन और उनकी मौसेरी बहन शामिल है।

इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान 10 वर्षीय गुंजन कुमार, 12 वर्षीय रागिनी कुमारी और 13 वर्षीय प्रियांशु कुमारी के रूप में हुई है। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और पीड़ित परिवार का घर मातम और दुख में डूबा हुआ है।

लकड़ी चुनने गए थे बच्चे

इस दुखद घटना के पीछे की कहानी बेहद मार्मिक है। मृतकों के परिजनों के अनुसार, उनके घर में कई दिनों से खाना पकाने वाला गैस सिलेंडर नहीं था। जिसके कारण घर में खाना बनाने की समस्या खड़ी हो गई थी। इसी मजबूरी के चलते सुबह करीब 8 बजे गांव के 7 बच्चे कुल्हाड़ी लेकर नदी के उस पार दियारा इलाके में सूखी लकड़ियां बीनने गए थे।

पानी पीने गए मासूम का फिसला पैर

लकड़ी काटते समय, 10 वर्षीय गुंजन कुमार को प्यास लगी। वह अपनी प्यास बुझाने के लिए सरयू नदी के किनारे स्थित एक गहरे गड्ढे के पास गया। उसी पल, उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में डूबने लगा। अपने छोटे भाई को डूबते देख, उसकी 12 वर्षीय बड़ी बहन रागिनी कुमारी ने उसे बचाने की कोशिश में बिना कुछ सोचे-समझे नदी में छलांग लगा दी। हालांकि, पानी की तेज धार और गहराई के कारण वह भी डूबने लगी।

भाई-बहन को बचाने की जिद में मौसेरी बहन ने भी गंवाई जान

दोनों भाई-बहन को तड़पता देख उनकी मौसेरी बहन प्रियांशु कुमारी (बनियापुर के पैगंबरपुर निवासी कृष्णा महतो की 13 वर्षीय बेटी) भी उन्हें बचाने के लिए पानी में कूद गई। दुख की बात है कि बचाने की यह कोशिश नाकाम रही और एक-एक करके तीनों बच्चे पानी की गहराई में समा गए। मौके पर मौजूद दो अन्य किशोरों ने भी हिम्मत दिखाई और उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वे भी नाकाम रहे और बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर पानी से बाहर निकल पाए।

45 मिनट की मशक्कत के बाद मिले शव

बच्चों की चीख-पुकार और मदद के लिए लगाई गई गुहार सुनकर, पास के खेतों में काम कर रहे गांव वाले फौरन मौके पर पहुंचे। लगभग 45 मिनट की कड़ी मेहनत और गोताखोरी के बाद, तीनों बच्चों के शव घटना स्थल से करीब 100 मीटर दूर एक जगह से बरामद किए गए। शवों को देखकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर हाल बेहाल है।

प्रशासन से मुआवजे की मांग

घटना की खबर मिलते ही, मांझी पुलिस मौके पर पहुंची, शवों को अपने कब्जे में लिया और उन्हें पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया। स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार के लिए तत्काल सरकारी मुआवजे की मांग की है।