Bihar Politics: सीएम नीतीश कुमार और विजय चौधरी अचानक पटना के जेडीयू कार्यालय पहुंचे और साथ में कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। सीएम ने जेडीयू कार्यालय का निरीक्षण किया, संगठनात्मक तैयारियों का जायजा लिया और कार्यकर्ताओं से विभिन्न विषयों पर चर्चा की
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सुगबुगाहट के बीच राजनीतिक दलों की हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में सीएम नीतीश कुमार बुधवार को जेडीयू के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में मंत्री विजय चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा समेत जेडीयू के कई बड़े मुस्लिम चेहरे मौजूद रहे। बैठक को चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समाज को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
बिहार की राजनीति में अल्पसंख्यक समाज का वोट बैंक हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। इस बार जेडीयू ने साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी इस वोट बैंक को किसी भी सूरत में अपने पाले से खिसकने नहीं देगी। विजय चौधरी ने बैठक के बाद कहा कि अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ हमारा है, हमारी पार्टी के जो नेता हैं उनकी विशेष बैठक बुलाई गई है। चुनाव सामने है और स्वाभाविक रूप से चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। उन्होंने दावा किया कि इस बार का चुनाव अल्पसंख्यक मतदाताओं का झुकाव जबरदस्त तरीके से एनडीए और नीतीश कुमार की तरफ है।
जेडीयू की बैठक में यह भी दोहराया गया कि अल्पसंख्यक समाज के लिए नीतीश कुमार और एनडीए सरकार ने जो काम किया है, वह किसी और राज्य से कहीं ज्यादा है। शिक्षा, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के जरिये अल्पसंख्यकों के लिए कई स्कीमें चलाई गईं, जिनका जिक्र बैठक में बार-बार होता रहा। पार्टी नेताओं का कहना था कि बिहार के अल्पसंख्यकों को यह समझाने की जरूरत है कि नीतीश सरकार ने जो काम किए हैं, वे बेमिसाल हैं और किसी दूसरी सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर प्रयास नहीं किए।
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बैठक के दौरान कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बैठक में शामिल हुए और हमने अल्पसंख्यक समाज के नेताओं को चुनावी दिशा-निर्देश दिए। मुस्लिम समाज एकजुट है, वह जेडीयू के साथ है और नीतीश जी की नेतृत्व क्षमता पर उसका पूरा भरोसा है।"
चुनाव की घोषणा से पहले जेडीयू द्वारा इस तरह की बैठक को राजनीतिक हलकों में बड़ी कवायद माना जा रहा है। नीतीश कुमार खुद अल्पसंख्यक नेताओं के बीच जाकर संदेश दे रहे हैं कि जेडीयू अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी है और उनके लिए सरकार लगातार काम करती रही है। नीतीश कुमार का यह कदम साफ तौर पर मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति है। विपक्ष लगातार अल्पसंख्यक वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में नीतीश का यह मास्टरस्ट्रोक एनडीए को चुनावी मैदान में मजबूती दे सकता है।