पटना

बंदूक खरीदने के लिए बेचे मां के गहने! पप्पू यादव ने खुद सुनाया बचपन का किस्सा, कहा- बदला लेने के लिए…

एक पॉडकास्ट में पप्पू यादव ने बताया कि बचपन में उन्होंने बदला लेने के लिए अपनी पहली बंदूक खरीदने के लिए अपनी मां के गहने बेच दिए थे। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहली बार कब जेल गए थे। इसके अलावा, उन्होंने अपनी पत्नी रंजीता रंजन के साथ अपनी लव स्टोरी के बारे में भी बात की।

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Mar 03, 2026
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव (वीडियो ग्रैब)

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) अक्सर अपने बयानों और सामाजिक कार्यों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान, पप्पू यादव ने अपनी जिंदगी के कुछ खास पहलुओं पर फिर से बात की। इस दौरान उन्होंने अपने बचपन के किस्से और अपनी पत्नी रंजीता रंजन के साथ अपनी लव स्टोरी के बारे में भी बताया। पप्पू यादव ने माना कि एक समय वह इतने बागी थे कि उन्होंने अपनी पहली बंदूक खरीदने के लिए अपनी मां के गहने चुराकर बेच दिए थे।

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बंदूक खरीदने के लिए मां के गहने कर लिए चोरी

पॉडकास्ट में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए, पप्पू यादव इमोशनल और मुस्कुराते हुए दिखे। उन्होंने बताया कि यह उनके स्कूल और कॉलेज के शुरुआती दिनों की बात है। पप्पू यादव के मुताबिक, उस समय उनकी किसी से जबरदस्त लड़ाई हुई थी। दूसरे पक्ष ने उनके साथ मारपीट भी की थी, जिसके बाद उन पर बदला लेने का भूत सवार हो गया था।

पप्पू यादव ने कहा, "मैं शुरू से ही बागी था। जब मुझे पीटा गया, तो मुझे लगा कि बिना हथियार के जवाब देना मुमकिन नहीं है। उस वक्त मेरे पास पैसे नहीं थे, लेकिन गुस्सा सातवें आसमान पर था। मैंने चुपके से घर में अपनी मां के गहने उठाए और उन्हें बेच दिया। उसके बाद, मैं मुंगेर गया और वहीं अपनी पहली बंदूक, एक 3-नॉट खरीदी।" उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि बेचने में उनका हाथ शुरू से ही साफ रहा है, चाहे वो बंदूक के लिए जेवर हों या आज गरीबों के लिए अपनी जमीनें।

पहली बार जेल भी स्कूल लाइफ में

इंटरव्यू में पप्पू यादव ने यह भी बताया कि उनकी पहली जेल यात्रा स्कूल के दिनों में हुई थी। एक कपड़े की दुकान में झगड़े के बाद मामला बढ़ गया और दो दिन बाद जमानत पर रिहाई हो गई। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पछतावा होता है, तो उन्होंने कहा, "काहे का पछतावा? हम बच्चे थे, दोस्त से झगड़ा हुआ था।”

घर में मिलता था खूब प्यार

इस खुलासे के साथ, उन्होंने अपने परिवार के माहौल पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे, जिसका मतलब था कि उन्हें घर पर बहुत आजादी और प्यार मिला। उन्होंने बताया कि जब उनकी मां उन्हें डांटती थीं, तो उनके दादा (जो उस वक्त इलाके के रसूखदार व्यक्ति और सरपंच थे) बीच-बचाव करते थे। उनके दादा के लाड़-प्यार ने पप्पू यादव के अंदर बगावत को और हवा दी, लेकिन समाज में दबे-कुचले लोगों के लिए खड़े होने के संस्कार भी उनमें डाले।

रंजीता के लिए करना पड़ा था 3 साल का इंतजार

अपनी पत्नी, सांसद रंजीता रंजन के साथ अपनी लव स्टोरी को याद करते हुए, पप्पू यादव ने इसे किसी बॉलीवुड फ़िल्म से कम नहीं बताया। उन्होंने बताया कि उन्हें रंजीता को देखते ही उनसे प्यार हो गया था, लेकिन उन्हें पाने के लिए उन्हें बहुत मेहनत करनी पड़ी। पप्पू यादव ने कहा, "मैडम (रंजीता) ने तीन साल तक मुझ पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने मुड़कर भी नहीं देखा।" रंजीता एक सिख परिवार से थीं और टेनिस प्लेयर थीं, जबकि पप्पू यादव की इमेज एक बाहुबली नेता की थी।

प्यार में पागल पप्पू यादव ने रंजीता को पाने के लिए जहर भी खा लिया था और हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उन्होंने कहा, "मैं उनका दीवाना था। अगर वह नहीं मानतीं, तो मैं कभी किसी और लड़की की तरफ नहीं देखता। मेरी जिंदगी उनके लिए डेडिकेटेड थी और हमेशा रहेगी।" पप्पू यादव ने बताया कि इस प्रेम कहानी में राजनीति के दिग्गज एस.एस. अहलुवालिया का बड़ा हाथ रहा। अहलुवालिया ने ही दोनों परिवारों के बीच मध्यस्थता की और रंजीता के परिवार को इस शादी के लिए राजी किया।

अभी के रिश्ते पर सफाई, कहा- सब ठीक है

कुछ समय से पॉलिटिकल गलियारों में यह बात चल रही थी कि पप्पू यादव और रंजीता रंजन के बीच सब ठीक नहीं है। इस पर पप्पू यादव ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने कहा, "हमारे बीच सब ठीक है। हम साथ में बात करते हैं और खाते हैं। रंजीता जी एक अनुभवी महिला हैं और उन्हें पैसों का कोई लालच नहीं है।" हालांकि, उन्होंने मज़ाक में यह भी माना कि उनकी पत्नी अक्सर उन्हें पैसे बांटने से रोकती हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा, "कोई भी पत्नी नहीं चाहेगी कि उसका पति सब कुछ दे दे, लेकिन मैं नहीं रुकता।" उन्होंने अपने बेटे सार्थक को अपना आइकन और बेटी को अपनी एनर्जी कहा।

फिएट कार से बाहुबली इमेज तक

पप्पू यादव ने बताया कि उनके परिवार की फाइनेंशियल हालत शुरू से ही अच्छी थी। जहां उनके साथी पैदल स्कूल जाते थे, वहीं वह फिएट कार, एक एंबेसडर और एक विजय सुपर स्कूटर से कॉलेज जाते थे। उनके पास ऐशो-आराम की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उनका मन हमेशा सिस्टम से भिड़ने पर लगा रहता था। उन्होंने माना कि उस एक बंदूक ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी और धीरे-धीरे स्टूडेंट पॉलिटिक्स से वे मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स का "बाहुबली" चेहरा बन गए।

बाहुबली मेरे लिए गाली, समाजसेवी ही मेरी पहचान

एक पुराना किस्सा सुनाते हुए पप्पू यादव ने अपनी अभी की इमेज पर भी बात की। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें बाहुबली शब्द से नफ़रत है। उन्होंने कहा, "अगर कोई मुझे बाहुबली कहता है, तो मुझे लगता है कि वे मेरी बेइज्जती कर रहे हैं। मैं बाहुबली कहलाने से मरना पसंद करूंगा। मेरी पहचान एक सेवक की है।"

उन्होंने बताया कि कैसे वे आज भी दिन-रात लोगों की मदद करते हैं। पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने बताया कि वे गरीबों के इलाज, अपनी बेटी की शादी और दूसरी जरूरतों के लिए हर दिन एवरेज 1 से 5 लाख रुपये बांटते हैं। जब उनसे पूछा गया कि उन्हें इतने पैसे कहां से मिलते हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके रिश्तेदार और दोस्त, जो विदेश में ऊंचे पदों पर हैं, उनकी मदद करते हैं और वे अपनी जमीन बेचकर भी यह फंड इकट्ठा करते हैं।

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Published on:
03 Mar 2026 01:51 pm
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