पटना हॉस्टल कांड: पप्पू यादव ने कहा कि मनीष 2020 तक प्राइवेट अस्पताल का मामूली कर्मचारी था। फिर मात्र पांच सालों में उसने करोड़ों रूपया की संपत्ति कैसे अर्जित किया?
पटना हॉस्टल कांड: शंभू हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस को जांच के क्रम में कई चौकाने वाले इनपुट भी मिले हैं। लेकिन, हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन के प्रति पुलिस की चुप्पी कई सवाल भी खड़े कर रहे हैं। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पटना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मनीष रंजन को पुलिस क्यों नहीं रिमांड पर ले रही है?
मनीष के बच्चे कहां हैं। उनकी भूमिका को लेकर पुलिस क्यों नहीं अपनी जांच कर रही है। मनीष लड़कियों के हॉस्टल में ही ऊपरी तल्ले पर रहता था। इसके साथ ही उसका आपराधिक इतिहास भी है। सूत्रों का कहना है कि पांच जनवरी को जब छात्रा जहानाबाद से पटना आई थी उस दिन मनीष रंजन का मोबाइल लोकेशन भी इसी रूट पर था। पुलिस अब यह छानबीन कर रही है कि यह महज एक संयोग है या साजिश।
पप्पू यादव ने कहा कि मनीष 2020 तक प्राइवेट अस्पताल का मामूली कर्मचारी था। फिर मात्र पांच सालों में उसने करोड़ों रूपया की संपत्ति कैसे अर्जित किया? मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन के पटना में कई हॉस्टल हैं। पटना और जहानाबाद में करोड़ों की जमीन है। यह कैसे हुआ? पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए। लेकिन, पटना पुलिस छात्रा के हत्यारे के बचाने में लगी है। पुलिस सूत्रों का कहना है चित्रगुप्त नगर का गर्ल्स हॉस्टल विवादित जमीन पर बना है। इसकी सूचना चित्रगुप्त नगर थाने को भी दी गई थी। लेकिन, मनीष रंजन अपने रसूक और पैसा के बल पर पूरे मामले को रफा दफा करवा दिया। पप्पू यादव ने कहा कि मनीष रंजन सेक्स रैकेट से इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच ईमानदारी से कर दे तो इसमें कई और नाम सामने आ सकते हैं।
पटना में लड़कियों का हॉस्टल चलाने को लेकर जो सरकारी प्रोटोकॉल हैं शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नहीं पालन किए जाते थे। हॉस्टल में रहने वाली छात्रों ने कहा कि जिसको जब मर्जी हो वो यहां पर आता जाता था। लड़कियों के कमरे में कई बार उसके दोस्त भी आ जाया करते थे मिलने। लेकिन हॉस्टल की ऑथोरिटी कभी इसको चेक नहीं करता था। कई लड़कियों ने बताया कि बदमाश लड़के फब्ती कस कर भाग जाते हैं। उन्हें पकड़ने वाला भी यहां कोई नहीं था।