पटना जू के वायरल हो रहे सफेद बाघ के वीडियो पर पर यूजर्स अपनी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक ने लिखा है कि “करप्शन 2 पैरों वाले या 4 पैरों वाले जानवरों में भेदभाव नहीं करता।”
पटना के संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क में एक सफ़ेद बाघ सोशल मीडिया पर अचानक से चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर उसके वीडियो भी बड़ी से तेजी से वायरल हो रहे हैं। दरअसल,संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क में आने वाले एक विज़िटर्स ने सफेद बाघ का एक छोटा वीडियो बनाकर उसको सोशल मीडिया एक्स पर शेयर करते हुए सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टैग करते हुए लिखा है कि अगर ज़रूरत हो तो बाघ को किसी सैंक्चुअरी में ले जाया जाए। विज़िटर्स का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पटना के संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क में एक सफ़ेद बाघ अपने बाड़े के अंदर धीरे-धीरे चलता हुआ और काफ़ी दुबला-पतला दिख रहा है। कई विज़िटर्स ने तुरंत बाघ की हालत के बारे में चिंता जताई, और सवाल किया कि क्या उसे सही न्यूट्रिशन, मेडिकल केयर और एनरिचमेंट मिल रहा है। कई यूज़र्स उसके एनर्जी लेवल और पूरी तरह से ठीक होने के बारे में अंदाज़ा लगाने लगे। इन विज़ुअल्स की आलोचना हुई, और कई लोगों ने अथॉरिटीज़ से ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी की मांग की।
हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद ज़ू प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सोशल मीडिया जो बाघिन वायरल हो रहा है वह 12 साल की और हेल्दी है। वह रेगुलर वेटेरिनरी सुपरविज़न में है। लेकिन, जू प्रशासन के इस दावे के बाद भी यूजर्स शांत नहीं हुए हैं और वे कई तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। एक यूजर्स ने सफेद बाघ का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि यह संजय गांधी बायोलॉजिकल पार्क (पटना ज़ू) है। और बाड़े में इस सफ़ेद बाघ की यह हालत है! यह पूरी तरह से करप्शन और अनदेखी है। इसके बाद उसने इसमें संबंधित विभाग को दखल करने का आग्रह किया है।
इस बहस के बीच में पीपल फ़ॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने भी दखल दिया, और अधिकारियों से स्थिति की ध्यान से जांच करने को कहा। PETA ने सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टैग करते हुए सुझाव दिया कि अगर ज़रूरत हो तो बाघ को किसी सैंक्चुअरी में ले जाया जाए। PETA ने लिखा, “हम पटना ज़ू से रिक्वेस्ट करते हैं कि इस बाघ को किसी सैंक्चुअरी में रिहैबिलिटेट करें जहाँ ज़ूकोसिस (बहुत ज़्यादा कैद से होने वाली साइकोलॉजिकल कंडीशन) कम हो सके और शरीर की कंडीशन में उम्मीद है कि सुधार हो सके।”
हालांकि, ज़ू अधिकारियों ने अनदेखी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि बाघ मेडिकली फिट है, उसे ठीक से खाना दिया जा रहा है और वह लगातार जानवरों के डॉक्टर की निगरानी में है, साथ ही कहा कि हेल्थ के सभी इंडिकेटर नॉर्मल हैं। ज़ू अधिकारियों ने इस मामले में सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो को गलत बताया है।
जू प्रशासन के इस दावे को यूजर्स फर्जी बताते हुए लिखा कि, “टाइगर सिर्फ़ बिग कैट बन गया है...कुपोषण का मामला लगता है, अगर हम उनका ध्यान नहीं रख सकते, तो हमें उन्हें छोड़ देना चाहिए।” एक और यूज़र ने कमेंट किया, “करप्शन 2 पैरों वाले या 4 पैरों वाले जानवरों में भेदभाव नहीं करता।” एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “उसे खाने की ज़रूरत है। उसे अपने रहने की जगह की ज़रूरत है। उसे सुरक्षित रहने की ज़रूरत है। सच में दुख की बात यह है कि अब हमें इस बात पर हैरानी नहीं होती।”एक चौथे व्यक्ति ने लिखा, “मुझे ज़ू का कॉन्सेप्ट सच में पसंद नहीं है। यह किसी जानवर के रहने के लिए बहुत छोटी जगह है। नेशनल पार्क जैसा कॉन्सेप्ट ज़्यादा बेहतर है, कम से कम वे आज़ादी से घूम तो सकते हैं।”