पटना

अशोकधाम हादसे के पीड़ितों से मिले प्रशांत किशोर, बोले- 7 मौतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, 4 लाख देकर पल्ला झाड़ रही सरकार

Prashant Kishor News: लखीसराय के अशोकधाम मंदिर भगदड़ में घायलों और पीड़ित परिवारों से मिले प्रशांत किशोर ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सात लोगों की मौत के बाद सिर्फ मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हादसे की जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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Aug 18, 2026
Ashokdham stampede, Prashant Kishor, Lakhisarai
अशोकधाम हादसे के पीड़ितों से मिले प्रशांत किशोर (फोटो- X@MaithilAnup)

Prashant Kishor on Ashokdham stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित अशोकधाम मंदिर में सावन के तीसरे सोमवार को मची भगदड़ में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, जिसके बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने मंगलवार को लखीसराय का दौरा किया और अस्पताल में घायलों तथा मृतकों के परिवारों से मुलाकात की। पीड़ितों से बात करने के बाद प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन पर प्रशासनिक लापरवाही और असंवेदनशीलता का आरोप लगाया।

अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई

अशोकधाम हादसे के पीड़ितों से मिलने के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह बात पहले से ही पता थी कि सावन के महीने में खासकर सोमवार को यहां भारी भीड़ जमा होगी। इसके बावजूद प्रशासन भीड़ को संभालने और सुरक्षा के मामले में जरूरी गंभीरता नहीं दिखा पाया। उन्होंने कहा कि इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए, लेकिन DM, SP, SDM या थानाध्यक्ष किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक की अभी तक किसी सिपाही तक को निलंबित नहीं किया गया है।

मुआवजा देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रायस

मुआवज़े के बारे में प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार ने आपदा कोष से मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये और घायलों को मामूली मदद देकर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि इस हादसे के लिए जवाबदेही तय कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

पीड़ितों ने प्रशांत किशोर को क्या बताया?

प्रशांत किशोर से बातचीत के दौरान घायलों और उनके परिवारों ने बताया कि भगदड़ के समय घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासन के इंतजाम बिल्कुल नाकाफी थे। श्रद्धालुओं के अनुसार, जब भीड़ का दबाव बढ़ा और संकरे रास्ते पर अफरातफरी मची, तो हालात को संभालने के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों और युवाओं ने हिम्मत दिखाते हुए गाड़ियों से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पीड़ितों ने सदर अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल सुविधाओं की भारी कमी और ड्यूटी पर डॉक्टरों की अपर्याप्त संख्या का भी आरोप लगाया। सही इलाज न मिल पाने और बदतर हालात के कारण, परिवारों को अपने घायल रिश्तेदारों को प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा।

Updated on:
18 Aug 2026 04:32 pm
Published on:
18 Aug 2026 04:13 pm
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