
Prashant Kishor Statement: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार में शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन और दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। शिक्षकों के प्रदर्शन पर उन्होंने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठाए। वहीं, दिल्ली में CJP के प्रदर्शन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 8 से 10 वर्षों में समाज के एक बड़े वर्ग का चुनाव आयोग के कामकाज के तरीके से भरोसा कम हुआ है। उनके मुताबिक, जब तक चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक एवं पारदर्शी सुधार नहीं होंगे, तब तक ऐसे आंदोलन बढ़ते रहेंगे।
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन पर बिहार सरकार के रवैये की आलोचना की। उन्होंने मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब राज्य के शिक्षित समाज ने ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया है, तो इस तरह की समस्याएं सामने आती रहेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री को शिक्षकों की भूमिका और उनसे जुड़े मुद्दों की समझ कैसे होगी।
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन पर प्रशांत किशोर ने कहा कि आंदोलन का समर्थन हो या विरोध, मूल मुद्दा यह है कि पिछले 8 से 10 वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों का चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों पर विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है।
उन्होंने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और फॉर्म-7 में किए गए बदलावों के साथ-साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन प्रक्रियाओं के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा हुआ है, जिससे चुनाव आयोग और पूरी चुनावी प्रक्रिया के प्रति भरोसा प्रभावित हुआ है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया में व्यापक व पारदर्शी सुधार किए बिना ऐसे आंदोलनों को रोकना मुश्किल होगा। उनके अनुसार, यह आंदोलन अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले समय में इसका विस्तार हो सकता है। उन्होंने दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह सरकार की आंदोलन को लेकर चिंता को दर्शाता है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि एक महीने पहले जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उसका सिलसिला थमने वाला नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और परीक्षाओं के पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं में नाराजगी का जिक्र किया। उनके मुताबिक, जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा, युवाओं का गुस्सा शांत होने की संभावना नहीं है।