
बांकीपुर उपचुनाव के बीच CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) की एंट्री को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े सवाल पर जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि CJP बिहार के मुद्दों और सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ आंदोलन या धरना-प्रदर्शन करती है, तो वह उसका समर्थन करेंगे। पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा, "सोनम वांगचुक मेरे व्यक्तिगत मित्र हैं। मैं उन्हें काफी समय से जानता हूं। उन्होंने भी CJP के मंच पर अपना योगदान दिया है।"
उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी एक व्यक्ति की जीत नहीं, बल्कि देश के युवाओं की जीत है। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जब जनता एकजुट होकर खड़ी होती है तो सत्ता में बैठे बड़े से बड़े लोगों को भी झुकना पड़ता है। प्रशांत किशोर ने कहा, "अगर CJP के लोग बिहार आते हैं, छात्रों के साथ जुड़कर उनके मुद्दों पर काम करते हैं, तो हम उनका स्वागत करेंगे और जहां तक संभव होगा, उनका सहयोग भी करेंगे।" प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ सरकार में जवाबदेही की एक नई परंपरा की शुरुआत हुई है। इससे सरकार पर अपने काम के प्रति नैतिक दबाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि विपक्षी राजनीतिक दल कमजोर हो सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र में विपक्ष कभी कमजोर नहीं होता।
उन्होंने दिल्ली में हुए हालिया प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या केवल CJP का नहीं था। उसमें शामिल अधिकांश युवा रोज-रोज हो रहे पेपर लीक, बेरोजगारी और भ्रष्ट व्यवस्था से परेशान थे। छात्र किसी नेता के समर्थन में नहीं, बल्कि अपने बेहतर भविष्य की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरे थे। इसी जनदबाव का परिणाम है कि धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा, "यह तो सिर्फ शुरुआत है। जवाबदेही की जो परंपरा शुरू हुई है, वह अब रुकने वाली नहीं है। अब देखना है कि अगली बारी किसकी होती है।"
शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि देश में सुधार तब तक संभव नहीं है, जब तक शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं बनती। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार की प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय उसमें संघ की विचारधारा से जुड़े लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित रही है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में पेपर लीक जैसी घटनाएं हुईं, छात्रों की मांग पर उन्हें पद छोड़ना पड़ा। अब नए शिक्षा मंत्री से उम्मीद है कि वे कदाचार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाते हुए शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएंगे।