पटना

मलमास मेला: राजगीर में एक महीने तक 33 कोटि देवताओं का होगा वास, मोक्ष के लिए गाय का पूंछ पकड़ने की है परंपरा

Rajgir Malmas Mela 2026: राजगीर में 17 मई से मलमास मेला आयोजित होने जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान 33 करोड़ देवी-देवता यहां निवास करते हैं और गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। प्रशासन ने इस आयोजन के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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May 11, 2026
राजगीर मलमास मेला 2026 (फोटो- Bihar Tourism )

Rajgir Malmas Mela 2026:बिहार की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक नगरी राजगीर में एक बार फिर विश्वप्रसिद्ध राजकीय मलमास मेला 2026 का आयोजन होने जा रहा है। 17 मई से 15 जून 2026 तक चलने वाला यह मेला आस्था, परंपरा और संस्कृति का एक अनूठा संगम होगा। ऐसी मान्यता है कि इस एक महीने के दौरान हिंदू धर्म के सभी 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं, जिससे यह पूरा शहर अत्यंत पवित्र हो जाता है। मेला के आयोजन की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन जोर-शोर से जुटा हुआ है।

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मलमास का महत्व

भारतीय पंचांग के अनुसार, हर तीन साल में सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाता है। इस अंतर को पाटने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिक मास', 'पुरुषोत्तम मास' या 'मलमास' कहा जाता है। वायु पुराण के अनुसार, इस अवधि के दौरान राजगीर की सरस्वती नदी में एक दिन भी पवित्र स्नान करना, पूरे एक वर्ष तक गंगा नदी में स्नान करने से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर है।

मोक्ष के लिए गाय का पुंछ पकड़ नदी पार करने की परंपरा

राजगीर मलमास मेले की सबसे विशिष्ट परंपरा वैतरणी नदी से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मेले के दौरान गाय का पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने से श्रद्धालुओं को मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से तथा हजारों विभिन्न योनियों से गुजरने से जुड़ी कष्टों से मुक्त हो जाता है। इसी आस्था से प्रेरित होकर देश के कोने-कोने से भक्त मलमास के दौरान यहां आते हैं और पुजारियों के मार्गदर्शन में एक बछड़े का पूंछ पकड़कर प्रतीकात्मक रूप से नदी पार करते हैं।

शाही स्नान की प्रमुख तिथियां

मलमास मेले के दौरान भक्त राजगीर में स्थित 22 पवित्र कुंडों और 52 धाराओं में पवित्र स्नान करके मोक्ष की कामना करते हैं। कुछ प्रमुख कुंडों में ब्रह्मकुंड, सप्तऋषि कुंड, सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, गंगा-यमुना कुंड और सीता कुंड शामिल हैं। मेले के दौरान साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए तीन विशेष शाही स्नान की तिथियां निर्धारित की गई हैं।

  • प्रथम शाही स्नान: 27 मई 2026
  • द्वितीय शाही स्नान: 31 मई 2026
  • तृतीय शाही स्नान: 11 जून 2026

श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी और दीदी की रसोई

पर्यटन विभाग ने लाखों श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए रेलवे स्टेशन और ब्रह्मकुंड के पास आधुनिक टेंट सिटी और जर्मन हैंगर की व्यवस्था की है। वीआईपी मेहमानों के लिए अलग टेंट सिटी बनाई गई है। श्रद्धालुओं को सस्ता और सुलभ भोजन उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्थानों पर दीदी की रसोई संचालित होगी। इसके अलावा शुद्ध पेयजल के लिए गंगाजल प्याऊ और नए चापाकल लगाए गए हैं।

सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था

राजगीर के ऐतिहासिक स्मारकों और आधुनिक पर्यटन स्थलों जू-सफारी, नेचर सफारी, शांति स्तूप की सुरक्षा के लिए विशेष खाका तैयार किया गया है। सुरक्षा के लिए पुलिस के 48 पुलिस आउट पोस्ट बनाए गए हैं और 16 सेक्टरों में मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। ड्रोन सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जाएगी। गर्मी के कारण जू-सफारी और वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं को रोकने के लिए फायर सेफ्टी विभाग को हाई-अलर्ट पर रखा गया है।

मलमास मेला में स्वच्छता पर फोकस

इस बार प्रशासन ने स्वच्छता और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दी है। मेला क्षेत्र में 1200 से अधिक स्थायी और अस्थायी शौचालयों का निर्माण किया गया है। साथ ही कचरा निस्तारण के लिए विशेष टीमें सक्रिय रहेंगी। भीषण गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर दिया है। मेला क्षेत्र में 5 अस्थायी अस्पताल और 14 स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां 70 से अधिक डॉक्टर तैनात रहेंगे।

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Updated on:
11 May 2026 09:25 am
Published on:
11 May 2026 09:20 am
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