पटना

‘तुम बिहारी नहीं दिखती’ कहने वालों को सुमति ने दिया जवाब, खड़ी की अनोखी कंपनी जो बदल रही बिहार की तस्वीर

Sumati Jalan Bihar: पटना की सुमति जालान को दूसरे राज्य में पढ़ाई के दौरान अक्सर तुम बिहारी जैसी नहीं दिखतीं ताना मिलता था, जिसे लोग तारीफ समझते थे। इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ने और बिहार की समृद्ध विरासत को पहचान दिलाने के लिए सुमति साल 2018 में वापस बिहार लौट आईं और 'Bihart' नाम की क्लोदिंग ब्रांड शुरू की। आज उनकी कंपनी के आउटलेट्स देश के कई बड़े शहरों में है।

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May 22, 2026
BIHART की फाउंडर सुमती जलान

Sumati Jalan Bihar:बिहार के युवा जब उच्च शिक्षा या रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो उन्हें 'बिहारी' शब्द को लेकर अजीबोगरीब रूढ़िवादिता और तानों का सामना करना पड़ता है। पटना की रहने वाली सुमति जालान के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। जब वे बिहार से बाहर पढ़ाई करने गईं, तो लोग उनसे अक्सर कहते थे, 'तुम तो बिहारी जैसी दिखती ही नहीं हो।' सामने वाले इसे तारीफ की तरह कहते थे, लेकिन सुमति को यह बात चुभती थी।

सुमति ने महसूस किया कि कई लोग तो खुद को बिहारी बताने में भी असहज महसूस करते हैं। इसी रूढ़िवादिता को तोड़ने और बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने शान से रखने के लिए सुमति ने साल 2018 में वापस अपने गृहराज्य लौटने का फैसला किया।

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बिहार की खोई कलाओं को दिया नया जीवन

वापस पटना लौटकर सुमति ने एक अनोखे क्लोदिंग ब्रांड 'Bihart' की नींव रखी। सुमति का मानना था कि देश और दुनिया के लोग बिहार की कला का मतलब सिर्फ मधुबनी पेंटिंग या भागलपुरी सिल्क तक ही सीमित समझते हैं, जबकि यहां की सांस्कृतिक विरासत इससे कहीं ज्यादा समृद्ध है। उन्होंने बिहार की उन पारंपरिक कलाओं को चुना जो या तो दम तोड़ रही थीं या विलुप्त होने की कगार पर थीं।

'Bihart' के जरिए सुमति ने सुजनी, मंजूषा, सिक्की और पारंपरिक बुनाई शैलियों (जैसे एक्स्ट्रा वेफ्ट, चिंगारी, फिशनेट और झरना) को आधुनिक और फैशनेबल रूप देकर पुनर्जीवित करना शुरू किया। आज उनके मलबेरी सिल्क की साड़ियां, कुर्तियां, टोट बैग्स और सुजनी डॉल्स बड़े-बड़े महानगरों के लोगों को दीवाना बना रही हैं।

जब कारीगर चिढ़कर बुलाने लगे 'ऊटपटांग मैडम'

सुमति आज कई स्थानीय दस्तकारों और बुनकरों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती इन पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार की पसंद के अनुसार ढालना और नए डिजाइनों को सिखाना था। सुमति कहती हैं बिहार के स्थानीय कारीगर सदियों से बैल, कलश, गाय और कमल के फूल जैसी आकृतियां बनाने के आदी थे।

जब सुमती ने उन्हें नए ज्यामितीय पैटर्न (Geometric Patterns) सिखाना शुरू किया, तो शुरुआत में वे काफी परेशान हो जाते थे। कई बार तो वे चिढ़कर सुमती को 'ऊटपटांग मैडम' भी कहने लगते थे। लेकिन जब वे इसे सीख गए, तो उन्होंने इतना शानदार काम किया कि देखने वाले दंग रह गए।

जीरो वेस्ट फॉर्मूला पर काम करती है Bihart

सुमति का यह प्रयास सिर्फ फैशन ब्रांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। उनके साथ काम करने वाले कारीगर कहते हैं कि पहले उनके पास नियमित काम नहीं रहता था और मेहनत के बदले नाममात्र के पैसे मिलते थे। लेकिन जब से वो 'Bihart' से जुड़े हैं, उन्हें नियमित काम मिल रहा है। अब एक मीटर सुजनी कला के काम के लिए 1,200 रुपये तक की निश्चित आय समय पर हो जाती है। इसके अलावा, सुमति का यह ब्रांड पर्यावरण के प्रति भी पूरी तरह जिम्मेदार है। यह एक जीरो वेस्ट कंपनी है, जो सिल्क और खादी के बचे हुए कतरनों व टुकड़ों को अपसाइकल कर खूबसूरत क्रॉप टॉप और कुशन कवर्स तैयार करती है।

गोवा से दिल्ली तक खुला आउटलेट

साल 2020 में लॉन्च होने के बाद से 'Bihart' ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज सुमति की इस अनोखी कंपनी के आउटलेट्स गोवा, दिल्ली, बेंगलुरु, उदयपुर और ऋषिकेश जैसे देश के बड़े पर्यटन केंद्रों पर खुल चुके हैं। वहीं बेंगलुरु, मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगरों से इस ब्रांड को हर महीने बंपर ऑर्डर्स मिल रहे हैं। सुमति कहती हैं कि आज लोगों के लिए लग्जरी का मतलब सिर्फ महंगा होना या बड़ा लोगो रह गया है, जबकि असली लग्जरी कपड़ों की शुद्धता और उसकी टिकाऊ क्वालिटी में है।

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Published on:
22 May 2026 08:10 pm
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