
Rohini Acharya vs Deepa Manjhi: 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर पटना स्थित राजद कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तेजस्वी यादव की जुबान फिसलने से शुरू हुआ विवाद अब तीखी बयानबाजी में बदल गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा तेजस्वी पर तंज कसे जाने के बाद, लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और जीतन राम मांझी की विधायक बहू दीपा मांझी के बीच सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य को लालू परिवार के अंदरूनी मतभेदों की याद दिलाते हुए कई सवाल दागे।
रोहिणी आचार्य पर पलटवार करते हुए दीपा मांझी ने सीधे पारिवारिक रिश्ते और सियासी हिस्सेदारी पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया एक्स पर किए पोस्ट में दीपा मांझी ने लिखा, "अरे बहन रोहिणी, अब बोलना जरूरी हो गया है। सोचा था तुम पर नहीं बोलेंगे, लेकिन सिंगापुर से ज्ञान कुछ ज्यादा ही आ रहा है। यह वही तेजस्वी हैं न, जिनके पिता लालू जी को जब किडनी की जरूरत पड़ी तो आपने अपनी किडनी देकर बेटी होने का फर्ज निभाया और पूरा देश आपकी तारीफ कर रहा था। लेकिन बाद में आपने खुद आरोप लगाए कि उसी परिवार में आपको अपमानित किया गया, अलग होने पर मजबूर किया गया और आपकी कुर्बानी तक पर सवाल उठाए गए?"
दीपा मांझी ने रोहिणी आचार्य से सवाल करते हुए लिखा, "यही तेजस्वी हैं ना, जिनके बारे में आपने खुद कहा था कि संजय यादव, रमीज और तेजस्वी ने आपको परिवार से बाहर निकाल दिया था? यह आरोप मेरा नहीं, आपका है। तो आज आप इन्हीं लोगों का राजनीतिक बचाव क्यों कर रही हैं? यही तेजस्वी हैं ना, जिनकी टीम और करीबी सहयोगियों की भूमिका पर आपने चुनाव के बाद सवाल उठाए थे? आपने यह भी पूछा था कि हार की ज़िम्मेदारी कौन लेगा, जबकि चुनाव की रणनीति और कंट्रोल पूरी तरह से उन्हीं के हाथों में था।"
दीपा मांझी ने आगे लिखा कि तेज प्रताप यादव को पार्टी से छह साल के लिए बाहर कर दिया गया और पूरी पार्टी का नियंत्रण कुछ चुनिंदा हाथों में सीमित कर दिया गया। उन्होंने रोहिणी से पूछा कि क्या तेजस्वी कभी आपको पार्टी की कमान सौंपेंगे या संगठन में बराबरी की हिस्सेदारी देंगे? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस घर में सत्ता की कीमत रिश्तों से ज्यादा हो जाती है, वहां अंत में कुर्सी तो एक के पास रहती है लेकिन परिवार और संगठन दोनों बिखर जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने चुनौती दी कि क्या उनके भाई तेजस्वी यादव सार्वजनिक मेडिकल जांच कराने को तैयार हैं।
इससे पहले रोहिणी आचार्य ने केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर हमला बोला था। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर किए गए पोस्ट में लिखा, "कहीं नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी नेता श्रेयसी सिंह वाला नशा तो नहीं किया था। बीजेपी की श्रेयसी सिंह पर बोलने की औकात नहीं है सामंतियों के इस गुलाम जीतन राम मांझी की?" रोहिणी ने आगे कहा कि सम्मान उम्र देखकर नहीं बल्कि आचरण देखकर दिया जाता है और पिता की उम्र का होकर भी घटिया आचरण करने वाला व्यक्ति आदर के योग्य नहीं होता।
यह राजनीतिक विवाद 17 अगस्त को तब शुरू हुआ, जब RJD दफ्तर में 'माउंटेन मैन' दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। उस कार्यक्रम में भाषण देते समय तेजस्वी यादव की जुबान दो बार फिसली और उन्होंने दशरथ मांझी की जगह जीतन राम मांझी का नाम ले लिया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी गलती सुधारी और दशरथ मांझी को श्रद्धांजलि दी।
तेजस्वी यादव की जुबान फिसलने के बाद केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने लिखा कि नशा शराब में होती तो नाचती बोतल, लगता है बाबू साहब का रात वाला नशा उतरा नहीं था इसलिए मुझे श्रद्धांजलि दे रहे हैं। मांझी ने यहां तक कह दिया कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे जीते जी अपने माता-पिता लालू जी और राबड़ी जी को भी श्रद्धांजलि दे देंगे।