
Tejashwi Yadav on Tender scam: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव रविवार को बिना किसी पुलिस स्कॉर्ट गाड़ी के अकेले ही RJD कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर हमला बोला। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि टेंडर घोटाले के तार सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एनडीए सरकार की खोखली और अदूरदर्शी नीतियों के कारण बिहार का सरकारी खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है और राज्य भयंकर कंगाली की ओर बढ़ रहा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के प्रशासनिक नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा, "सम्राट चौधरी जी को बिहार के विकास, जनता के टैक्स के पैसों की लूट या खाली होते खजाने से कोई सरोकार नहीं है। वे तो केवल एक स्टैम्प प्रूवर और अनूठे अंगूठा छाप मुख्यमंत्री की तरह काम कर रहे हैं। दिल्ली और केंद्र से जो भी निर्देश या आदेश आता है, वे बिना सोचे-समझे उस पर बस ठप्पा लगाने का काम करते हैं। उन्हें सिर्फ बड़े बंगले, भारी-भरकम सुरक्षा तामझाम और स्कॉर्ट गाड़ियों का काफिला लेकर चलने से मतलब है, वे उसी में अपनी राजनीति चमका रहे हैं।"
तेजस्वी यादव ने इस दौरान टेंडर घोटाले को लेकर सवाल उठाया कि आखिर वर्षों से सरकारी विभागों के करोड़ों-अरबों के टेंडर कथित तौर पर एक ही नेटवर्क और सिंडिकेट के जरिए कैसे संचालित होते रहे और राज्य का निगरानी तंत्र क्या कर रहा था? जांच एजेंसियों द्वारा दाखिल की गई 4,000 पन्नों की चार्जशीट का हवाला देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, "इस घोटाले में कोई छोटी मछलियां नहीं, बल्कि बड़ी मछलियां, बड़े-बड़े रसूखदार अधिकारी, सीनियर आईएएस (IAS) अफसर, बड़े मंत्री और खुद सीएमओ (CMO) तक के लोग संलिप्त हैं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि कितना भी बड़ा घोटाला हो लेकिन एनडीए सरकार का एक ही पुराना ढर्रा रहा है कि जब भी कोई बड़ा घोटाला उजागर होता है, तो केवल छोटे किरानी, जूनियर इंजीनियर और निचले स्तर के कर्मचारियों की ही बलि चढ़ाई जाती है। जो इसके असली मास्टरमाइंड, मुख्य संरचनाकार और प्रभावशाली लाभार्थी हैं, उन तक जांच एजेंसियां कभी नहीं पहुंच पातीं। चाहे पूर्व का सृजन घोटाला हो, एस्टीमेट घोटाला हो, सीएजी घोटाला हो या वर्तमान का यह टेंडर घोटाला। सरकार केवल बड़े लोगों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण देने में जुटी है।"
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने हफ्ते भर पहले ही राज्य के कंटीजेंसी फंड से ₹3,660 करोड़ की राशि निकाली है। उन्होंने कहा, "अगर आप रूटीन या नॉर्मल डेवलपमेंट स्कीमों को चलाने के लिए राज्य के इमरजेंसी फंड का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो रहे हैं, तो यह साफ तौर पर प्रमाणित करता है कि बिहार में भयंकर वित्तीय अराजकता का माहौल है। एनडीए की दिवालिया राजनीति और खोखले नेतृत्व के कारण घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा और भारी ब्याज अदायगी ने बिहार को पूरी तरह दिवालिया बना दिया है।"
तेजस्वी यादव ने कहा, "आज कर्मचारियों को समय पर देने के लिए वेतन नहीं है, छात्रों की छात्रवृत्ति रुकी हुई है, पेंशनरों और किसानों को पैसा देने के लिए सरकारी खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है, जबकि दूसरी तरफ भ्रष्टाचारियों और घोटालेबाजों की जेबें लगातार भरी जा रही हैं।" उन्होंने यह भी तंज कसा कि केंद्र की डबल इंजन सरकार में सम्राट चौधरी के बार-बार दिल्ली जाकर गुहार लगाने के बावजूद केंद्र सरकार ने बिहार को कोई विशेष वित्तीय सहयोग न देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है।