
भरत भूषण तिवारी। (फोटो सोर्स - भरत भूषण तिवारी/फेसबुक)
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के DGP विनय कुमार ने भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर प्रतिक्रिया दी है। DGP ने बताया कि इस मामले की न्यायिक जांच अभी चल रही है और पुलिस ने भी अनुसंधान किया है। उन्होंने कहा कि जिस पुलिस अधिकारी ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया था, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जबकि इसमें शामिल अन्य अधिकारियों की जांच अभी भी जारी है।
DGP विनय कुमार ने आगे कहा कि पुलिस को आत्मरक्षा का कानूनी अधिकार है। उन्होंने बताया कि यह अधिकार कानून में शामिल है। अगर मुश्किल हालात में पुलिसकर्मियों की जान को गंभीर खतरा होता है, तो पुलिस नियमों, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और सभी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) में गोली चलाने का विकल्प दिया गया है।
डीजीपी ने कहा कि अगर पुलिस को गोली चलाने का अधिकार देने वाला कोई प्रावधान नहीं होता, तो फोर्स को आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देने या उन्हें ऐसे उपकरणों से लैस करने की कोई जरूरत नहीं होती। यह ट्रेनिंग और हथियार इसलिए ही दिए जाते हैं ताकि मुश्किल हालात में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में बताते हुए DGP ने कहा कि CrPC में किसी भी गैर-कानूनी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया बताई गई है। उन्होंने बताया कि CrPC के तहत ऐसी भीड़ से निपटने का पहला कदम चेतावनी देना है। इसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं, फिर लाठीचार्ज होता है और अंत में गोली चलाने का प्रावधान है। जब भीड़ आगजनी और पत्थरबाजी करती है, तो पुलिस सख्त कार्रवाई करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होती है।
DGP ने कहा कि उकसावे के बावजूद पुलिस अक्सर संयम बरतती है क्योंकि पुलिस और जनता अलग-अलग नहीं हैं। वर्दी पहनने से उनकी नागरिकता खत्म नहीं हो जाती। उनके भी परिवार हैं और समाज में उनकी भी जगह है। 100 में से 99 मामलों में वे खुद घायल होने के बावजूद आम नागरिकों की जान बचाते हैं।
Updated on:
14 Aug 2026 03:55 pm
Published on:
14 Aug 2026 03:45 pm
