बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी आज पटना के AN कॉलेज में क्लास लेने पहुंचे। जहां उन्होंने पॉलिटिकल साइंस के छात्रों को पढ़ाया। संयोग ऐसा रहा कि प्रोफेसर चौधरी उसी बिल्डिंग में क्लास लेने पहुंचे, जिसका मंत्री के तौर पर उन्होंने उद्घाटन किया था।
बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने बुधवार को अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू किया। आमतौर पर सफेद कुर्ता पहने, रैलियों और विधानसभा में गरजने वाले चौधरी आज पटना के श्रीकृष्ण श्रीकृष्ण पुरी इलाके में स्थित AN कॉलेज पहुंचे, जहां उनके हाथों में किताब और चॉक थी। अशोक चौधरी यहां एक सहायक प्रोफेसर के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए पहुंचे थे। 58 वर्ष की आयु में कैबिनेट मंत्री का पद संभालते हुए वे कॉलेज में छात्रों को अपनी पहली कक्षा पढ़ाने के लिए पहुंचे थे।
अशोक चौधरी ने बताया कि उन्होंने 1991 में राजनीति शास्त्र (Political Science) में अपना स्नातकोत्तर (M.A.) पूरा किया था। इसके बाद, वे मुख्यधारा की राजनीति में शामिल हो गए। लगभग 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, जब वे एक बार फिर कक्षा में छात्रों के सामने खड़े हुए, तो उन्होंने अपनी भावनाओं को छिपाने का कोई प्रयास नहीं किया।
अशोक चौधरी ने मुस्कुराते हुए कहा, 'रैलियों और विधानसभा में भाषण देना एक बात है, लेकिन कक्षा में छात्रों को पढ़ाना कहीं अधिक बड़ी जिम्मेदारी है। सच कहूं तो, मैं थोड़ा घबराया हुआ महसूस कर रहा था।'
मंत्री से प्रोफेसर की भूमिका में आए अशोक चौधरी ने राजनीति शास्त्र के छात्रों को सेंट्रल-स्टेट रिलेशनशिप पर लेक्चर दिया। उन्होंने भारत की संघीय संरचना की बारीकियों को केवल किताबों में दी गई परिभाषाओं के माध्यम से ही नहीं, बल्कि अपने दशकों के प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के आधार पर समझाया। छात्रों के लिए यह वास्तव में एक जादुई अनुभव था, क्योंकि वे राजनीति शास्त्र की शिक्षा उस व्यक्ति से ग्रहण कर रहे थे, जो स्वयं बिहार की सत्ता में शीर्ष के नेताओं में से एक है।
इस अवसर पर एक अद्भुत संयोग भी सामने आया। अशोक चौधरी अपनी कक्षा लेने के लिए ठीक उसी भवन में पहुंचे, जिसके निर्माण कार्य की देखरेख उन्होंने मंत्री रहते हुए स्वयं की थी। उन्होंने कहा कि यह महादेव का आशीर्वाद और नियति का एक सुखद मोड़ ही था कि उन्हें उसी भवन की चारदीवारी के भीतर एक शिक्षक के रूप में पढ़ाने का मौका मिल, जिसका उद्घाटन उन्होंने कभी एक मंत्री के रूप में किया था। चौधरी ने कहा कि उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी की कभी ऐसा होगा।
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने 2020 में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। चार साल तक चले कड़े इंटरव्यू और सख्त चयन प्रक्रिया के बाद, 2026 में अंतिम नतीजे घोषित किए गए, जिसमें अशोक चौधरी ने SC श्रेणी की मेरिट सूची में अपनी जगह बनाई।
कक्षा के समापन पर, प्रोफेसर चौधरी ने छात्रों को एक अहम सलाह भी दी। उन्होंने शिक्षित युवाओं से राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा, जब शिक्षित लोग इस व्यवस्था का एक अभिन्न अंग बनेंगे।