पटना

परिवारवाद के खिलाफ थे नीतीश कुमार, फिर कैसे मंत्री बने निशांत? विजय चौधरी ने खोला राज

Nishant Kumar In Bihar Politics: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि जदयू नेताओं को नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में आने के लिए मनाने में छह महीने लग गए, क्योंकि नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ अपने सिद्धांतों पर अडिग थे।
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May 10, 2026
nishant kumar with his father ex cm of bihar nitish kumar
पिता नीतीश कुमार के साथ जदयू नेता निशांत कुमार (फ़ोटो- X@jdu)

Nishant Kumar In Bihar Politics: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने जब से स्वास्थ्य मंत्री का पद संभाला है, तब से विपक्षी पार्टियां परिवारवाद को लेकर नीतीश कुमार और निशांत कुमार पर हमलावर है। राजनीतिक गलियारों में भी यही चर्चा है कि परिवारवाद के विरोधी माने जाने वाले नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने और उन्हें मंत्री बनाने का फैसला कैसे लिया? इस राज से अब बिहार के उपमुख्यमंत्री और JDU के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने पर्दा उठाया है। विजय चौधरी ने बताया कि यह फैसला रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे 6 महीने की लंबी जद्दोजहद और मंथन छिपा था।

निशांत की राजनीति के पक्ष में नहीं थे नीतीश

विजय कुमार चौधरी ने खुलासा किया कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत को सक्रिय राजनीति में लाने के पक्ष में नहीं थे। नीतीश कुमार का तर्क था कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक करियर में लालू यादव और अन्य दलों पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा है। ऐसे में अपने बेटे को पद देना उनके सिद्धांतों और नैतिकता के खिलाफ होगा।

हालांकि, जदयू के भीतर एक गुट यह मानता था कि निशांत कुमार की बेदाग छवि और सादगी पार्टी के लिए एक नई ऊर्जा साबित हो सकती है। पार्टी नेताओं ने नीतीश कुमार को तर्क दिया कि यदि जनता और कार्यकर्ता किसी को नेता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो वह परिवारवाद नहीं बल्कि लोकतांत्रिक इच्छा है।

निशांत कुमार को मनाने में लगे 6 महीने

सिर्फ नीतीश कुमार ही नहीं बल्कि निशांत कुमार खुद भी सक्रिय राजनीति से दूर रहना चाहते थे। विजय चौधरी ने बताया कि निशांत एक शांत और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं। उन्हें सक्रिय राजनीति की गहमागहमी और पदों की लालसा नहीं थी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों को नीतीश कुमार और निशांत कुमार, दोनों को मनाने में करीब 6 महीने का समय लगा।

विजय चौधरी के अनुसार, 'निशांत को यह समझाया गया कि पार्टी और बिहार के युवाओं को उनकी जरूरत है। कार्यकर्ताओं के भारी दबाव और लगातार बैठकों के बाद आखिरकार निशांत सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हुए।'

नीतीश कुमार ने सीएम के लिए खुद तय किया था सम्राट चौधरी का नाम

उपमुख्यमंत्री ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनाना नीतीश कुमार की अपनी सोच थी। नीतीश कुमार ने महसूस किया कि 20 साल तक बिहार की सेवा करने के बाद अब नेतृत्व नई पीढ़ी और सहयोगी दल को सौंप देना चाहिए।

विजय चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने ही मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम प्रस्तावित किया था। वे चाहते थे कि भाजपा का कोई ऐसा युवा चेहरा कमान संभाले जो लंबे समय से उनके साथ काम कर रहा हो। इसी सोच के तहत उन्होंने खुद सम्राट चौधरी का नाम तय किया।

Published on:
10 May 2026 02:31 pm