
फोटो सोर्स: सोशल मीडिया, साइबर ठगी
Bank Account Rental Scam साइबर ठगी मामले की जांच में बिहार पुलिस को एक अहम इनपुट मिला है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक साइबर ठग ठगी की रकम रखने के लिए बिहार के गरीब मजदूरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बदले उन्हें हर महीने 10 से 20 हजार रुपये दिए जाते हैं।
मोतिहारी से कुछ दिन पहले गिरफ्तार अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में इसका खुलासा किया है। पूछताछ में सामने आया कि ठगी की रकम बाद में नेपाल के बैंकों में जमा कर दी जाती थी, ताकि पुलिस आसानी से उन तक न पहुंच सके।
मोतिहारी पुलिस ने हाल ही में इन साइबर ठगों के पास से 69 लाख रुपये नकद और नोट गिनने वाली मशीन बरामद की थी। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में करीब 50 करोड़ रुपये के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है।
मोतिहारी पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य भारत में साइबर ठगी से जुटाई गई रकम को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए नेपाल के बैंक खातों में जमा करते थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपियों के पास से कई बैंक खातों की जानकारी भी मिली है। इनमें अधिकांश खाते बिहार-नेपाल सीमा पर रहने वाले गरीब मजदूरों के हैं।
जांच में सामने आया है कि साइबर ठग सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से उनकी बैंक पासबुक अपने पास रख लेते थे। ठगी की रकम खाते में आने के बाद आरोपी खाताधारकों को 10 से 20 हजार रुपये देकर बाकी पैसा निकाल लेते थे। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाकर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मोतिहारी पुलिस ने गुरुवार देर रात घोड़ासहन इलाके में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस की संयुक्त टीम जब घोड़ासहन मेन रोड और बाजार क्षेत्र की दुकानों में पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा गिरोह के ‘नेपाल कनेक्शन’ का हुआ। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच आगे बढ़ने पर करीब 50 करोड़ रुपये के लेनदेन के संकेत मिले हैं।
पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि गिरोह अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन कर चुका है। आरोपी गरीब और भोले-भाले लोगों के बैंक खातों को किराए पर लेते थे और बदले में उन्हें मोटा कमीशन देते थे। इसके बाद उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम मंगाने और ट्रांसफर करने में किया जाता था।
Updated on:
10 May 2026 12:27 pm
Published on:
10 May 2026 11:36 am
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