CG Naxal IED Update: बस्तर नक्सलमुक्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आईईडी बम अब भी सबसे बड़ा अदृश्य खतरा बना हुआ है। सुरक्षा बलों और निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाला यह खतरा शांति की राह में बड़ी चुनौती बना है।
CG Naxal IED Update: बस्तर आज इतिहास के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। दशकों तक नक्सल हिंसा की आग में झुलसने वाला यह इलाका अब नक्सलमुक्ति की दहलीज तक पहुंच चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे की तय डेडलाइन नज़दीक है और सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियानों से नक्सल नेटवर्क लगभग ध्वस्त हो चुका है। लेकिन बंदूकें खामोश होने के बावजूद ज़मीन के नीचे छिपा एक अदृश्य दुश्मन-आईईडी-आज भी बस्तर के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। पुलिस अफसरों आकलन के मुताबिक, करीब 90 फीसदी नक्सली या तो मार जा चुके है या आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
बावजूद इसके, नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सलियों द्वारा वर्षों पहले बिछाई गई आईहिंडी (इंप्रोवाइज एक्सप्लोसिव डिवाइस) आज भी बस्तर के लिए सबसे बड़ा खतरा बनी हुई है। वर्ष 2025 में ही बस्तर संभाग में 67 आईईडी ब्लास्ट हुए है जिसमे एक एएस्पी सहित 12 जवान शहीद हुए है तथा 46 घायल हुए है। इसके अलावा फोर्स ने इस वर्ष 875 जिंदा आईईडी बरामद किया है।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005 से 2025 तक पिछले दो दशकों में बस्तर में आईईडी विस्फोटों से 509 से अधिक लोगों की मौत हुई है। इनमें 350 से ज्यादा जवान तथा 159 से अधिक निर्दोष ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि मुठभेड़ों से ज्यादा जानलेवा साबित हुए है छिपे हुए विस्फोटक जिनका असर लंबे समय तक बना रहता है।
स्थानीय ग्रामीण का बयान
“बस्तर ने नक्सल हिंसा के लंबे दौर को झेला है। आईईडी धमाके, डर और अनिश्चितता हमारे रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा रहे हैं। लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विकास कार्यों की वजह से शांति की उम्मीद जगी है। हम मानते हैं कि बस्तर नक्सलमुक्ति की दहलीज पर खड़ा है, लेकिन अभी पूरी सतर्कता जरूरी है। हमारी मांग है कि नक्सलवाद का पूरी तरह खात्मा हो, ताकि हमारे बच्चे बिना डर के पढ़ सकें, सड़कें सुरक्षित हों और बस्तर विकास की मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल हो सके।”
आईईडी से बचने सुरक्षा बलों ने माइन प्रोटेक्टेड वाहन बम डिस्पोजल स्क्वॉड झोन सर्विलांस डॉग स्क्वॉड तैनात कर रखें हैं इसके साथ साथ और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जब तक इन इलाकों में व्यापक तरीके डिमाइनिंग अभियान नहीं चलाया जाता, तब तक बस्तर को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करना संभव नहीं होगा।
ग्रामीण का बयान
“आईईडी बम की वजह से बस्तर में आज भी डर बना रहता है। सड़क पर चलना, जंगल जाना सब जोखिम भरा हो गया है। हम चाहते हैं कि यह खतरा पूरी तरह खत्म हो, ताकि आम लोग बिना डर के अपना जीवन जी सकें।”
सुरक्षाबलों तक सीमित नहीं रहा। जंगलों में लकड़ी तेंदूपता और महुआ बीनने जाने वाल आदिवासी ग्रामीण खेतों में काम करने वाले किसान और पशुपालक भी इन विस्फोटों का शिकार बन रहे हैं। मवेशियों की मौत के बाद गांवों में दहशत फैल जाती है और लोग जंगल और खेतों पर जाने से डरने लगते हैं।
नक्सली संगठन अब रणनीतिक रूप से कमओर हो चुके हैं। उनके शीर्ष नेतृत्व का सफाया हो गया है। निषला कैडर पेस भी ध्वस्त हो गया है। इसके बावजूद आईईडी का खतरा कम नहीं हुआ है। पुलिस का महन्त है कि नक्सली बस्तर के जंगलों सहाकों और अनेक भवनों में बड़ी संख्या बारूदी सुरयों के जाल बिछा रखे हैं, जो कहें बाद आज भी जानलेवा साबित हो रहे हैं।
ग्रामीण का कहना है कि “नक्सलियों की वजह से हमारे गाँव में सालों तक डर का माहौल रहा। अब प्रशासन की कार्रवाई से शांति लौट रही है। हम चाहते हैं कि नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो, ताकि हमारे बच्चे पढ़ सकें और गाँव आगे बढ़े।”सबसे ज्यादा असर सुकमा बीजापुर बलेवाड़ा और नारायणपुर के इलाके में आईईडी का खतरा खत्म हुआ।
2021— 160
2022— 128
2023— 242
2024— 305
2025— 875