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हिंदी सिनेमा का वो दशक जब कॉमेडी सिर्फ मजाक नहीं, एक स्ट्रॉन्ग मैसेज भी देती थी

Bollywood Comedy Films with Social Message: बॉलीवुड के लिए 2000 से 2010 का दौर वो सुनहरा समय था, जब फिल्मों ने दर्शकों का सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि समाज को आईना भी दिखाया। और अगर बात की जाए इस दशक की कॉमेडी फिल्मों की तो इस दशक की कुछ चुनिंदा फिल्मों ने हंसी के साथ स्ट्रॉन्ग मैसेज और तीखा सटायर दिया।

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Feb 10, 2026
जब कॉमेडी ने सोचने पर मजबूर किया। (फोटो डिजाइन: पत्रिका)

Bollywood Comedy Films with Social Message: बॉलीवुड फिल्मों के लिए 2000 से 2010 तक का दौर एक ऐसा यादगार दौर था, जब जिंदगी की रफ्तार आज की जिंदगी की गति के मुकाबले काफी धीमी थी। Y2K (Year 2000) की चर्चाएं हो रहीं थीं, हाथों में फ्लिप और बेसिक फोन हुआ करते थे और सोशल मीडिया रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। OTT किस चिड़िया का नाम है, लोगों को पता भी नहीं था। ये वही दौर था जब हॉलीवुड अपने सुपरस्टार्स के दम पर आगे बढ़ रहा था, और इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का अभिन्न अंग बॉलीवुड कुछ चुनिंदा बड़े सितारों के स्टारडम पर टिका हुआ था। इस सितारों में सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सनी देओल, अमिताभ बच्चन, और ऋतिक रोशन जैसे एक्टर्स हर वीकेंड दर्शकों को थिएटर तक लाने का दम रखते थे। उस दौर में नई फिल्म रिलीज होना लोगों के लिए एक ट्रीट जैसा होता था।

इस दशक ने ही सिनेमा लवर्स को शाहरुख खान के रूप में उनका 'किंग खान' मिला जिसको उन्होंने सार्थक कर दिखाया। आमिर खान ने 'मिस्टर पर्फेक्सनिष्ट' बनकर सिनेमा को सोच-समझकर गढ़ने वाले कलाकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। वहीं, ऋतिक रोशन ने यंगस्टर्स को प्यार की परिभाषा समझाई। 2000 से 2010 तक के दशक में फिल्मों में कॉमेडी, थ्रिलर से लेकर एक्शन और रोमांटिक फिल्में देखने को मिली, जिनमें क्लासिक बॉलीवुड मसाला जैसे रोमांस, एक्शन, ड्रामा और यादगार म्यूजिक सब एक साथ मिल रहा था। आज भी जब इन फिल्मों को देखा जाए तो ये फिल्में सिर्फ सिनेमा नहीं, बल्कि उस दौर की यादें बनकर सामने आती हैं, एक ऐसा समय, जिसे दोबारा जिया नहीं जा सकता, लेकिन बड़े पर्दे पर बार-बार महसूस ज़रूर किया जा सकता है। इसी दशक में लोगों को हंसी और ठहाकों का डबल धमाका भी मिला। जब लोगों को हंसी के साथ-साथ एक सशक्त संदेश भी दिया गया था।

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2000 से 2010 का दशक हिंदी सिनेमा के लिए सिर्फ़ बड़े सितारों और मल्टीप्लेक्स कल्चर का दौर नहीं था, बल्कि यह वह समय भी था जब कॉमेडी फिल्मों ने दर्शकों को सोचने के साथ-साथ खुलकर हंसने का मौका दिया। ये ऐसी फिल्में हैं जिन्होंने अपने व्यंग के माध्यम से समाज को एक सार्थक संदेश दिया और कटाक्ष भी किया। इन फिल्मों ने दर्शकों हल्की-फुल्की हंसी के साथ तीखा सटायर परोसा और बॉक्स ऑफिस पर भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।

फिल्म का नामरिलीज ईयरबजट (लगभग)वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिसस्टेटस
Bheja Fry20071–1.5 करोड़ रुपये12–13 करोड़ रुपयेसुपरहिट
Khosla Ka Ghosla!20063–4 करोड़ रुपये6–7 करोड़ रुपयेहिट/कल्ट क्लासिक
Dhamaal200717–19 करोड़ रुपये50+ करोड़ रुपयेसेमिहिट
Munna Bhai MBBS200310–12 करोड़ रुपये35–36 करोड़ रुपयेहिट
Welcome To Sajjanpur20088–9 करोड़ रुपये14–15 करोड़ रुपयेऐवरेज/कंटेंट हिट

आइये अब एक नजर डालते हैं 2000-2010 के बीच की उन फिल्मों पर जिन्होंने दिया दर्शकों को कॉमेडी का डबल डोज।

भेजा फ्राई (2007)

भेजा फ्राई, छोटे बजट की बड़ी फिल्म। ((फोटो सोर्स: notebooklm)

13 अप्रैल 2007 को रिलीज हुई सागर बल्लारी द्वारा निर्देशित 'भेजा फ्राई' एक कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है। फिल्म में विनय पाठक, रजत कपूर, सारिका, रणवीर शौरी, और मिलिंद सोमन मुख्य भूमिकाओं में हैं। बता दें कि ये फिल्म फ्रेंच फिल्म Le Diner de Cons (1998) से प्रेरित है। हंसाते-हंसाते भेजा फ्राई ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि असल में समझदार कौन होता है,जो मज़ाक उड़ाता है या जो बिना किसी छल-कपट के सादा जीवन जीता है। फिल्म में विनय पाठक ने अपने जबरदस्त अभिनय से 'भारत भूषण' के किरदार को हमेशा के लिये यादगार बना दिया है। एक कमरे में घूमती इस फिल्म की कहानी ने संवाद और अभिनय के दम पर बॉक्स ऑफिस पर बड़ा कमाल किया। छोटे बजट में बनी Bheja Fry ने अपनी सफलता से साबित कर दिया था कि कॉमेडी के लिए बड़े सेट और स्टारकास्ट जरूरी नहीं होती। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म का बजट लगभग 1.5 करोड़ रुपये के आस-पास था और इसने बॉक्स ऑफिस पर तकरीबन 12.58 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

खोसला का घोसला! (2006)

अनुपम खेर, बोमन ईरानी, परवीन डबास, विनय पाठक, रणवीर शौरी और तारा शर्मा जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी 'खोसला का घोसला!' 2006 को रिलीज हुई थी। ये एक हिंदी कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, और इसका निर्देशन दिबाकर बनर्जी ने किया था। गंभीर मुद्दे पर कटाक्ष करती ये फिल्म मात्र 3.75 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, जबकि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 6.67 करोड़ रुपये की कमाई की थी। फिल्म की कहानी दिल्ली की एक मिडिल-क्लास परिवार की के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म एक परिवार जो जमीन घोटाले में फंस जाता है। फिल्म में जमीन घोटाले जैसे गंभीर मुद्दे को व्यंग और सटायर के जरिये दिखाया गया है। खोसला का घोसला! मिडिल-क्लास की उस सच्चाई को सामने लाती है, जहां आम आदमी ईमानदारी और पारिवारिक एकजुटता के सहारे भ्रष्ट सिस्टम से लड़ता है। कॉमेडी के साथ फिल्म यह सोचने पर भी मजबूर कर देगी कि सादगी और सच्चाई ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

धमाल (2007)

धमाल, हंसी और रोमांच का मजेदार सफर। (फोटो सोर्स: notebooklm)

'धमाल' बॉलीवुड की एक कॉमेडी-एडवेंचर फिल्म है, जिसका निर्देशन इंद्र कुमार ने किया था और इसमें संजय दत्त, रितेश देशमुख, अरशद वारसी, आशीष चौधरी, तथा जावेद जाफ़री जैसी बड़े कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। कहानी चार आलसी दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गोवा में छिपे खजाने की तलाश में निकलते हैं. खजाने की खोज का उनका सफर हंसी-मजाक से भरपूर और रोमांचक रहता है जिसे देखकर दर्शक हंसी से लोट-पॉट हो जाते हैं। धमाल का बजट लगभग 17-19 करोड़ रुपये था, जो उस दौर की मिड-बजट कॉमेडी फिल्मों में आता था। फिल्म ने करीब 50 करोड़ रुपये ज्यादा था।

सीधे-सीधे कहा जाए तो 'धमाल' हंसी-ठहाकों के साथ एक जरुरी मैसेज देती है कि जीवन में आनंद, साथ और मस्ती को प्राथमिकता देना भी बहुत जरूरी, क्योंकि यही चीजें लोगों को विषम परिस्थितियों में भी साथ रखती हैं।

मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस (2003)

मुन्ना भाई एमबीबीएस, सफलता और मानवता का संगम। (फोटो सोर्स: notebooklm)

'मुन्ना भाई एमबीबीएस' एक कल्ट कॉमेडी-ड्रामा फिल्म है, जिसका निर्देशन राजकुमार हिरानी ने किया और यह उनकी पहली डायरेक्टोरियल फिल्म थी। संजय दत्त, अरशद वारसी और बोमन ईरानी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी 2003 की 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' 2003 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म का बजट लगभग 10-12 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में कुल मिलाकर लगभग 36.29 करोड़ रुपये की कमाई की थी और फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी।

'मुन्ना भाई एमबीबीएस' एक सशक्त मैसेज देती है कि दया, इंसानियत और अच्छा व्यवहार किसी भी पेशे से बड़ा होता है। साथ ही डॉक्टर होना सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि मरीज के प्रति सहानुभूति और करुणा रखना है, क्योंकि औधे से ज्यादा बड़ी इंसान की जान होती है।

वेलकम टू सज्जनपुर (2008)

श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित 'वेलकम टू सज्जनपुर' एक भारतीय सैटिरिकल कॉमेडी-ड्रामा है. फिल्म में श्रेयस तलपड़े, अमृता राव, कुनाल कपूर और रवि किशन जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म का बजट लगभग 9 करोड़ रुपये था, जो उस समय की मिड-बजट सैटायर-ड्रामा फिल्मों में आता है। वेलकम तो सज्जनपुर ने बॉक्स ऑफिस पर कुल 13 करोड़ रुपये की कमाई की थी, जिस वजह से अच्छी फिल्म होते हुए भी इसे एक एवरेज फिल्म का टैग मिला था. फिल्म में गांव की सादगी, राजनीति, जातिवाद और सामाजिक सोच को हास्य और सटायर के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके साथ ही फिल्म की कहानी का उद्देश्य ये है कि बिना ज्ञान और संवाद के समाज में कितनी गलतफहमियां और रोड़े बन जाती हैं।

2000 से 2010 के बीच बनी इन कल्ट कॉमेडी फिल्मों ने बता दिया कि हिंदी सिनेमा में हंसी सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम को समझाने का एक मजबूत जरिया भी बन सकती है। इन फिल्मों ने दर्शकों को हंसाया भी, सोचने पर मजबूर भी किया और बॉक्स ऑफिस पर अपनी मौजूदगी भी दर्ज कराई।

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Published on:
10 Feb 2026 06:11 pm
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