Fatty Liver in India : देश में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही हैं। लैंसेट में छपे रिसर्च के मुताबिक करीब 40 फीसदी ऐसे भारतीय जो शराब का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें भी फैटी लिवर की समस्या हो रही है। डॉक्टर ने पत्रिका को बताया कि यह खतरे की घंटी है और यदि नहीं संभले तो यह लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा।
Fatty Liver : हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च में यह बताया गया है कि लगभग 40 प्रतिशत भारतीय जो शराब का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें फैटी लिवर होने की संभावना है। ऐसे लोगों में से कम से कम 2.4 प्रतिशत आबादी में फाइब्रोसिस या लिवर का सख्त होना पाया गया है।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि फाइब्रोसिस अक्सर लिवर को और अधिक नुकसान, सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर की ओर पहला कदम होता है। इस बारे में लखनऊ की डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि भारत में फैटी लीवर की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ रही है। ऐसा क्यों हो रहा है, इसके जवाब में वह कहती हैं,'इसकी कई वजहें हैं। एक तो यह है कि भारत में मोटे अनाजों को छोड़कर पिछले 200-250 वर्षों में गेहूं खाने का चलन बढ़ा है। उसमें भी एक बात यह हुई है कि चक्की में गेहूं पिसवाकर खाने का चलन भी कम हुआ। पहले आप देखते होंगे कि आटे में कीड़े लग जाते थे और उसको छानकर फिर रोटी बनाई जाती है। अब पैकेज्ड आटे इस्तेमाल में आने लगे हैं। उसमें बहुत लंबे समय तक कीड़े नहीं लगते हैं। मतलब जिसको कीड़े नहीं खा सकते हैं, उसको हम खा रहे हैं। दूसरा पैकेज्ड आटे में चोकर की मात्रा कम होती है, जिसके चलते मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। हमें फिर से मिलेट की तरफ शिफ्ट होना पड़ेगा, ताकि हमारे खाने में फाइबर की मात्रा भरपूर हो।
उन्होंने बताया कि स्विगी, जोमैटो और बाहर खाना खाने की संस्कृति भी बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते वयस्कों के साथ बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। बच्चे खेलने, कूदने की बजाय टीवी और मोबाइल पर घंटों बिता रहे हैं, जिसके चलते उनमें मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। यह सब चलता रहा तो अगले 10 वर्षों में फैटी लीवर की समस्या बढ़ेगी और इससे संबंधित दूसरे रोगों में बहुत ज्यादा इजाफा होगा। यह आम लोगों की इकॉनमी को बहुत बुरे तरीके से प्रभावित करने वाली है। लोग इलाज कराने में बर्बाद हो जाएंगे।
| देश | प्रति व्यक्ति व्यय (PPP $) | % कुल व्यय का |
|---|---|---|
| यूएसए | 544.8 | 11 |
| कनाडा | 529.5 | 11 |
| स्पेन | 526.4 | 9 |
| ऑस्ट्रेलिया | 507.3 | 9 |
| फ्रांस | 418.5 | 5 |
| ब्राजील | 410.9 | 7 |
| चीन | 57.4 | 8 |
| भारत | 51.4 | 6 |
लैंसेट साउथईस्ट एशिया पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित 27 भारतीय शहरों के 7,000 से अधिक प्रतिभागियों के आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन के आधार पर यह पाया गया कि फैटी लिवर वाले लोगों में फाइब्रोसिस की व्यापकता 1.7 प्रतिशत की तुलना में 6.3 प्रतिशत थी।
फेनोम इंडिया कोहोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. शांतनु सेनगुप्ता ने बताया है कि हमने अध्ययन से उन सभी लोगों को बाहर कर दिया जिन्होंने शराब का सेवन करने की जानकारी दी थी, जिसका अर्थ है कि यहां पाए गए फैटी लिवर और फाइब्रोसिस के मरीज किसी अन्य कारणों वाले हैं, उनका शराब सेवन से संबंध नहीं है।
उन्होंने बताया कि हमने विश्लेषण के लिए सबसे पहले फैटी लिवर की समस्या को चुना क्योंकि डेटा और नमूने एकत्र करते समय भी हमने देखा कि यह समस्या बहुत अधिक तेजी से पांव पसार रही है। ये निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये लिवर रोग के महत्व को दर्शाते हैं।
रिसर्च में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 38.9 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर की समस्या थी, जिसमें पुरुषों में इसकी व्यापकता 45.9 प्रतिशत थी, जबकि महिलाओं में यह 33 प्रतिशत थी। अध्ययन से जुड़े लोगों में यह पाया गया कि फैटी लीवर की सबसे कम व्यापकता तिरुवनंतपुरम में 27 प्रतिशत और सबसे अधिक रुड़की और भोपाल में 50 प्रतिशत थी। दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों में व्यापकता 37 प्रतिशत से 42 प्रतिशत के बीच थी।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि फैटी लिवर से पीड़ित 93.7 प्रतिशत लोग मोटे या अधिक वजन वाले थे, जबकि अध्ययन के दौरान यह आंकड़ा 71.1 प्रतिशत था। इसके साथ ही फैटी लिवर से पीड़ित लोगों में फाइब्रोसिस की व्यापकता भी काफी अधिक 6.3 प्रतिशत, जबकि अध्ययन के दौरान यह आंकड़ा 1.7 प्रतिशत था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि फैटी लिवर वाले लोगों में HbA1c का मान भी अधिक था। अध्ययन में शामिल अन्य लोगों के 5.7 की तुलना में 6.2 था। HbA1c एक जांच है, जो शरीर में तीन महीनों में रक्त शर्करा के स्तर को दर्शाता है। इससे यह पता चलता है कि फैटी लिवर वाले यानी जिनके पेट पर ज्यादा चर्बी चढ़ी होती है, उनमें डायबिटीज का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है।
फाइब्रोसिस की बात करें तो, फैटी लिवर वाले लोगों में इसकी व्यापकता 6.3 प्रतिशत, मधुमेह रोगियों में 9.1 प्रतिशत और मोटापे से ग्रस्त लोगों में 8.1 प्रतिशत पाई गई। इसकी तुलना में अध्ययन में शामिल सभी लोगों में यह दर 1.7 प्रतिशत थी। फाइब्रोसिस की व्यापकता जोरहाट में सबसे अधिक 8.3 प्रतिशत पाई गई, इसके बाद दिल्ली में 4.8 प्रतिशत और जम्मू में 4.3 प्रतिशत रही। इसमें आहार, आनुवंशिक या पर्यावरणीय प्रभावों जैसे विशिष्ट क्षेत्रीय कारकों का योगदान हो सकता है। देश के दक्षिणी और पूर्वी राज्यों में फाइब्रोसिस के मामले कम पाए जाने की वजह जीवनशैली, स्वास्थ्य की आदि है।
डॉ. सेनगुप्ता ने आगे कहा, “फेनोम इंडिया समूह जिसके आंकड़ों का उपयोग इस अध्ययन के लिए किया गया है, में पूरे भारत में सीएसआईआर के कर्मचारी और उनके परिवार शामिल हैं। ऐसा इसलिए किया गया ताकि वर्षों तक आसानी से डेटा एकत्र किया जा सके। हालांकि, यह मुख्य रूप से शहरी और अर्ध-शहरी मध्यम वर्ग आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। हमारे पास ग्रामीण भारत से डेटा उपलब्ध नहीं है।”
डॉ. शांतनु का कहना है कि फाइब्रोसिस और फैटी लिवर रोग की उच्च व्यापकता, जो अपने आप में चिंता का विषय नहीं हो सकता है लेकिन फाइब्रोसिस को बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि इसका मतलब है कि इस बीमारी की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए कार्यक्रमों की आवश्यकता है और साथ ही यह भी कहते हैं कि हर किसी के लिए फाइब्रोस्कैन परीक्षण करवाना मुश्किल है।