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76 की उम्र में MSC की परीक्षा दे रहे पूर्व BSP मैनेजर कांतीलाल विश्वकर्मा, कहा- सीखने की कोई उम्र नहीं होती

Inspirational Story: भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से सेवानिवृत्त 76 वर्षीय कांतीलाल विश्वकर्मा इन दिनों एमएससी इंडस्ट्रियल सेफ्टी की परीक्षा देकर उम्र को चुनौती दे रहे हैं। एमटेक के बाद अब वे इग्नू से उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। उनकी लगन और सीखने की जिज्ञासा युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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Jun 06, 2026
Inspirational Story
Inspirational Story(photo-patrika)

Inspirational Story: जिस उम्र में अधिकांश लोग जिम्मेदारियों से मुक्त होकर आरामदायक जीवन बिताना पसंद करते हैं, उस उम्र में 76 वर्षीय कांतीलाल विश्वकर्मा नई मिसाल पेश कर रहे हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हो चुके कांतीलाल इन दिनों दुर्ग के साइंस कॉलेज स्थित इग्नू परीक्षा केंद्र में एमएससी इंडस्ट्रियल सेफ्टी की टर्म एंड परीक्षा दे रहे हैं। सैकड़ों युवा विद्यार्थियों के बीच परीक्षा देने पहुंचे कांतीलाल विश्वकर्मा यह संदेश दे रहे हैं कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उनकी लगन और जिज्ञासा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

Inspirational Story: एमटेक के बाद अब एमएससी की नई चुनौती

कांतीलाल विश्वकर्मा इससे पहले बीआईटी दुर्ग से एमटेक की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उच्च शिक्षा के प्रति उनकी जिज्ञासा यहीं नहीं रुकी और उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से एमएससी इंडस्ट्रियल सेफ्टी में दाखिला लिया। अब वे नियमित रूप से परीक्षा देकर अपनी पढ़ाई पूरी करने में जुटे हैं। उनका मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री पाने का साधन नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली प्रक्रिया है। उनके अनुसार, जब तक व्यक्ति सीखता रहता है, वह मानसिक रूप से सक्रिय और ऊर्जावान बना रहता है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

परीक्षा केंद्र में मौजूद युवा विद्यार्थियों के लिए कांतीलाल विश्वकर्मा किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। 76 वर्ष की उम्र में भी उनकी पढ़ाई के प्रति लगन, अनुशासन और सीखने की इच्छा यह साबित करती है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती। उनका मानना है कि व्यक्ति को जीवनभर कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए। उनकी यह सोच युवाओं को भी लगातार मेहनत करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित कर रही है।

‘उम्र नहीं, ललक तय करती है मंजिल’

साइंस कॉलेज स्थित इग्नू अध्ययन केंद्र के समन्वयक डॉ. अभिनेष सुराना के अनुसार, कांतीलाल अकेले नहीं हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु के कई विद्यार्थी इग्नू के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं- कोई अधूरे सपने पूरे करने के लिए तो कोई नई दिशा तलाशने के लिए। यह कहानी केवल एक छात्र की नहीं, बल्कि उस सोच की है जो बताती है- सीखना कभी बंद नहीं होता, और जिज्ञासा ही जीवन को आगे बढ़ाती है।

Updated on:
06 Jun 2026 04:35 pm
Published on:
06 Jun 2026 04:27 pm