India AI Impact Summit : भारत में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन हो रहा है। समिट में एआई के जरिए मेडिकल क्षेत्र में हो रही तरक्की के खूब जोरशोर से चर्चाएं हो रही हैं। भारत और दुनिया के अन्य देशों को इसका कैसे फायदा मिल रहा है, आइए इस बारे में समझते हैं। एआई से किनको नुकसान हो रहा या होगा, एक्सपर्ट से जानते हैं।
India AI Impact Summit 2026 : भारत में मेडिकल क्षेत्र में एआई के जरिए क्या तरक्की हो रही है, इसे एक छोटे से उदाहरण से समझा जा सकता है। कर्नाटक स्थित एक स्टार्टअप द्वारा विकसित और AIIMS द्वारा सत्यापित एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित मोबाइल एप्लिकेशन भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौजूद एक महत्वपूर्ण जांच संबंधी कमी को दूर करने में मदद कर सकता है।
ऐप श्वांस (Shwaas-A Chikitsa Saathi) एल्गोरिद्म-आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग करके मरीजों की जांच करता है ताकि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) की पहचान की जा सके, जो भारत में बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक है। एम्स, दिल्ली (AIIMS Delhi) ने पिछले वर्ष अपने बल्लभगढ़ इकाई में 460 लोगों पर इसका वैलिडेशन अध्ययन किया। जब इसकी तुलना स्पाइरोमेट्री (जो फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने का मानक) से की गई, तो इस टूल ने समग्र रूप से मध्यम स्तर का मेल और गंभीर मामलों में मजबूत समानता दिखाई।
मरीज स्मार्टफोन में खांसता है तब फोन का माइक्रोफोन आवाज रिकॉर्ड कर लेता है और उसमें मौजूद AI सॉफ्टवेयर तुरंत उसका विश्लेषण करता है। कुछ ही मिनटों में ऐप यह संकेत दे देता है कि फेफड़े सामान्य हैं या उनमें COPD या अस्थमा के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यह टूल सामान्य और असामान्य मामलों में अंतर करने में लगभग 90% तक सटीक है। COPD और अस्थमा जैसी विशेष स्थितियों की पहचान में इसकी सटीकता 82% से 87% के बीच है। अध्ययन के निष्कर्ष प्रकाशित होने की प्रक्रिया में हैं।
यह ऐप मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से सांस लेने के पैटर्न का विश्लेषण करता है और आठ मिनट के भीतर जांच परिणाम प्रदान करता है। स्पाइरोमेट्री से इस जांच को करने वालों को प्रशिक्षण की दरकार होती है, लेकिन इस एआई ऐप्स से जांच के लिए विशेष प्रशिक्षण या जटिल उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती।
AIIMS के डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि जहां स्पाइरोमेट्री उपलब्ध नहीं है, वहां प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य केंद्रों, जैसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर में इस टूल को लागू किया जाए। हालांकि यह ऐप AIIMS जैसे तृतीयक (टर्शियरी) केंद्रों में स्पाइरोमेट्री का स्थान नहीं लेगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह समुदाय स्तर पर एक प्रभावी स्क्रीनिंग टूल के रूप में काम कर सकता है। यह टूल पहले से ही कर्नाटक सहित कुछ राज्यों में उपयोग में है।
AI Healthcare : दुनिया में मेडिकल क्षेत्र में एआई की मदद से कैंसर से लेकर आंखों की बीमारियों तक दुरुस्त करने में सहायता ली जा रही है। आइए जानते हैं कि दुनिया में कौन सा एआई स्वास्थ्य विषय को लेकर क्या कर रहा है?
IBM Watson Health कैंसर उपचार के क्षेत्र में विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ। यह मरीज के मेडिकल इतिहास और नवीनतम शोध के आधार पर संभावित उपचार विकल्प सुझाता था। इसके अलावा यह अस्पताल प्रबंधन, मरीज डेटा विश्लेषण और रोग की भविष्यवाणी (predictive analytics) में भी उपयोग किया जाता था। हालांकि समय के साथ इसके प्रदर्शन और व्यावसायिक मॉडल को लेकर चुनौतियां सामने आईं, फिर भी इसने हेल्थकेयर में AI के उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के विकास को गति दी।
Google की AI कंपनी DeepMind स्वास्थ्य क्षेत्र में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक विकसित करता है। यह मेडिकल इमेज (जैसे रेटिना स्कैन और MRI) का विश्लेषण करके आंखों की बीमारियों और अन्य गंभीर स्थितियों की शुरुआती पहचान में मदद करता है। इसका प्रसिद्ध प्रोजेक्ट AlphaFold प्रोटीन संरचना की भविष्यवाणी करता है, जिससे नई दवाओं की खोज और जैविक अनुसंधान तेज हुआ है। DeepMind ने किडनी इंजरी की समय से पहले पहचान पर भी काम किया है।
PathAI एक अमेरिकी कंपनी है जो पैथोलॉजी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करती है। यह माइक्रोस्कोप से तैयार की गई टिश्यू स्लाइड्स और बायोप्सी इमेज का डिजिटल विश्लेषण करके कैंसर जैसी बीमारियों की अधिक सटीक पहचान करने में मदद करती है। इसका AI सिस्टम कोशिकाओं के पैटर्न को पहचानकर डॉक्टरों को सही और तेज डायग्नोसिस देने में सहयोग करता है। PathAI दवा कंपनियों के साथ भी काम करता है ताकि नई दवाओं के परीक्षण (clinical trials) अधिक विश्वसनीय और प्रभावी बन सकें।
Insilico Medicine एक बायोटेक कंपनी है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके नई दवाओं की खोज करती है। यह मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग तकनीकों से जैविक डेटा का विश्लेषण कर संभावित दवा अणुओं (molecules) की पहचान करती है। कंपनी बीमारी के लक्ष्य (drug targets) खोजने, नई दवाओं को डिजाइन करने और क्लिनिकल ट्रायल प्रक्रिया को तेज बनाने में AI का उपयोग करती है। इससे दवा विकास की लागत और समय दोनों कम हो सकते हैं।
Siemens Healthineers एक जर्मन मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी है जो डायग्नोस्टिक और इमेजिंग उपकरण बनाती है। यह MRI, CT स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों में उन्नत AI तकनीक का उपयोग करती है। कंपनी लैब डायग्नोस्टिक्स, कैंसर केयर और डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशंस भी प्रदान करती है। इसके AI-आधारित सिस्टम रेडियोलॉजी रिपोर्ट को बेहतर बनाते हैं और डॉक्टरों को क्लिनिकल निर्णय लेने में सहायता करते हैं।
Qure.ai एक भारतीय हेल्थकेयर AI कंपनी है जो मेडिकल इमेजिंग के विश्लेषण में विशेषज्ञ है। यह एक्स-रे, सीटी स्कैन और चेस्ट इमेज का AI के माध्यम से विश्लेषण करके टीबी, निमोनिया, फेफड़ों की बीमारियां और ब्रेन ब्लीड जैसी स्थितियों की पहचान करने में मदद करती है। Qure.ai के टूल्स सरकारी अस्पतालों और वैश्विक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उपयोग किए जाते हैं, जिससे शुरुआती स्क्रीनिंग और समय पर उपचार संभव हो पाता है। भारत में इसके अलावे Niramai, SigTuple और Dozee भी मेडिकल क्षेत्र में शानदार काम कर रहे हैं।
Niramai बिना दर्द वाली थर्मल स्कैनिंग से ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान करता है।SigTuple खून जांच और पैथोलॉजी रिपोर्ट का विश्लेषण करता है। वहीं Dozee मरीज के बेड के नीचे सेंसर से हार्ट रेट, सांस, BP मॉनिटर करता है। इसे ICU में रियल-टाइम मॉनिटरिंग में इस्तेमाल में लाया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एआई में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार लगभग 38% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 110 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। 2025 में एआई का स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कुल निवेश का लगभग 46% हिस्सा था, जिसमें एआई स्टार्टअप्स में 18 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया गया था। निवेश को बढ़ावा देने वाले प्रमुख क्षेत्रों में जनरेटिव एआई, प्रशासनिक स्वचालन, दवा खोज और मेडिकल इमेजिंग शामिल हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लागत में काफी बचत होने की उम्मीद है, अनुमानों के अनुसार 2030 तक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 646 अरब डॉलर तक की बचत हो सकती है।
लखनऊ की सीनियर सर्जन डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने पत्रिका से बातचीत में कहा, 'एआई के चलते उन डॉक्टरों की जॉब जाएगी जो सिर्फ कंसल्टेशन बेस्ड हैं या डायग्नोस्टिक और इमेजिंग में हैं। कई लोगों की जॉब चली भी गई। स्किल्ड सर्जन्स, ऑब्सटेट्रिशियंस, इंटरवेंशनल एक्सपर्ट्स सर्वाइव करेंगे। हम लोग ज़्यादा से ज़्यादा चाइनीज़ मशीन ख़रीद रहे हैं क्योंकि AI में वो टॉप पर है, AI की डायग्नोसिस सुपीरियर होगी क्योंकि वो दुनिया भर से डेटा उठा रहा है। मेडिकल रिसर्च में क्रान्ति आएगी।'