AI uses in War: दुनिया में युद्ध सिर्फ तोप, बंदूक और मिसाइल से नहीं लड़े जा रहे हैं। अब दुनिया में जंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा और टेक्नोलॉजी से भी लड़े जा रहे हैं। इसे समझने के लिए अमेरिका-इजराइल और ईरान व रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध के आंकड़े देखे जा सकते हैं। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
AI in warfare: रूस-यूक्रेन और अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष ने दुनिया को यह दिखा दिया कि अब युद्ध पारंपरिक तरीकों यानी कॉन्टैक्ट वॉरफेयर से हटकर डेटा सेंटर्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और तकनीक महारथियों की पाले में जा खड़ा हुआ है। मिसाल के तौर पर AI सिस्टम के सहारे अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मात्र 12 घंटे में ईरान पर 900 हमले किए।
अमेरिका को AI सिस्टम की यह महारथ एंथ्रोपिक (Anthropic) कंपनी द्वारा विकसित क्लाउड एआई (Claude AI) को सैन्य खुफिया प्लेटफॉर्म में शामिल करने से हासिल हुई। यह सिस्टम उपग्रह चित्रों, ड्रोन फीड, इंटरसेप्टेड कम्युनिकेशन और सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण करके मिनटों में संभावित लक्ष्यों की सूची तैयार कर देते हैं। यह AI के उपयोग का एकमात्र उदाहरण नहीं है।
AI की मदद से सैन्य ताकत बढ़ाने में इजराइल भी बहुत आगे है। इजराइली डिफेंस फोर्स (IDF) की खुफिया इकाई 8200 ने दो प्रमुख AI सहायक सिस्टम विकसित किए हैं- द गोस्पेल (The Gospel) और लैवेंडर (Lavender)। द गोस्पेल का असली नाम हबसोरा (Habsora) है।
द गोस्पेल का प्रमुख काम शत्रु के क्षेत्र में सैन्य ठिकानों, इमारतों, हथियार डिपो, उपकरणों और महत्वपूर्ण ढांचों जैसे लक्ष्यों की पहचान बहुत तेज़ी से करता है। अमेरिका-इजराइल के ईरान पर करीब एक महीने से ज्यादा समय में हमलों के दौरान 1.25 लाख इमारतों को बुरी तरह से बर्बाद नुकसान एआई तकनीक से पहले मानव खुफिया अधिकारी एक साल में एड़ी-चोटी का जोर लगाकर 50 लक्ष्य ही तैयार कर पाते थे, अब यह सिस्टम सिर्फ दो हफ्तों में 100 से ज्यादा लक्ष्य तैयार कर सकता है। इजराइल ने गाजा संघर्ष में एयर स्ट्राइक प्लानिंग में इसका भरपूर लाभ उठाया।
इसके बाद AI इन सभी डेटा को तेजी से विश्लेषण करके संभावित टारगेट्स की सूची बनाता है।
वहीं लैवेंडर संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान उनके सोशल नेटवर्क, फोन कॉल रिकॉर्ड, मैसेज पैटर्न और लोकेशन और मूवमेंट आदि के आधार पर करता है और फिर उन्हें 'संभावित दुश्मन' के रूप में मार्क करता है। वह इन सबका डेटा इकट्ठा करके इस बात की समीक्षा करता है कि संदिग्ध व्यक्ति किससे संपर्क में है।
वर्ष 2023-2024 के दौरान गाजा में 'ऑपरेशन आयरन स्वॉर्ड्स' के पहले छह हफ्तों में लैवेंडर ने गाजा संघर्ष में लगभग 37,000 फिलिस्तीनी पुरुषों को संभावित लक्ष्य के रूप में चिह्नित किया। हालांकि कई संदिग्धों की पहचान करने में लैवेंडर ने 20 सैकेंड से भी कम समय लगाया। लैवेंडर एक अन्य एआई सिस्टम व्हेयर इज डैडी (Where’s Daddy?) नामक एक ट्रैकिंग सिस्टम के साथ मिलकर काम करता है। यह सिस्टम ट्रैक करता है कि व्यक्ति कब घर पहुंचा ताकि उसपर हमला किया जाए। हालांकि इसमें अक्सर निर्दोष लोग भी मारे जाते थे। यह बताया जा रहा है कि 90 फीसदी तक यह सही परिणाम देता है।
अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान की वायु रक्षा प्रणाली और नौसेना की क्षमता बेकार या बर्बाद कर दी है। एआई की मदद से ईरान की 80 फीसदी वायु रक्षा प्रणाली और 90 प्रतिशत नौसेना की क्षमता नष्ट कर दी है। एपी न्यूज एजेंसी के अनुसार अमेरिका और इजराइल ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट करने के लिए 1500 से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया। ईरान के 80 फीसदी परमाणु औद्योगिक ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ईरान के एक दर्जन शीर्ष लीडरों को मौत के घाट उतारा, जबकि 7,000 से ज्यादा नागरिक हताहत किए जा चुके हैं। एआई की मदद के बगैर इतने कम समय में ईरान को इतना ज्यादा नुकसान पहुंचाना संभव नहीं हो पाता।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मार्च 2026 में UAE और बहरीन के प्रमुख डेटा सेंटर्स पर हमला किया। यह संभवतः पहली बार था जब किसी देश ने सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए वाणिज्यिक डेटा सेंटर्स को निशाना बनाया। ये डेटा सेंटर्स बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं को समर्थन देते हैं, लेकिन आकार में बड़े और असुरक्षित होते हैं। इस वजह से इन्हें पहचानना और निशाना बनाना आसान होता है। इनकी बिजली और कूलिंग सिस्टम पर निर्भरता भी इन्हें कमजोर बनाती है। एक जोरदार हमला पूरे क्षेत्र की AI सेवाओं को महीनों तक ठप कर सकता है। इसी कारण ईरान ने माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, आईबीएम और ओरेकल जैसी कंपनियों के डेटा सेंटर्स को 'टेक टारगेट' घोषित किया। उनका तर्क है कि ये नागरिक संरचनाएं होने के बावजूद सैन्य शक्ति का विस्तार हैं।
हां, रूस-यूक्रेन युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक और तेजी से बढ़ता हुआ उपयोग हो रहा है। यह युद्ध आधुनिक इतिहास का पहला ऐसा बड़ा संघर्ष माना जा रहा है, जहां AI, ड्रोन और ऑटोमेशन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं। नीचे 500 शब्दों में आंकड़ों सहित विवरण दिया गया है:
रूस और यूक्रेन के बीच वर्ष 2022 से युद्ध जारी है। दोनों ही देश AI की मदद से युद्ध युद्ध जारी रख रहे हैं। दोनों ने AI का उपयोग मुख्य रूप से ड्रोन, निगरानी , लक्ष्य निर्धारण, साइबर युद्ध और रोबोटिक सिस्टम में किया है। वॉर रूम यूस आर्मी वॉर कॉलेज की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध में 70-80% तक हताहत ड्रोन हमलों के चलते हो रहे हैं। एआई की मदद से ड्रोन की सटीकता 30-50% से बढ़कर लगभग 80% तक पहुंच गई है। वहीं सीएसआईएस (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने 2025 तक 50,000 से अधिक Shahed ड्रोन लॉन्च किए। एआई इन ड्रोन को लक्ष्य पहचानने, दुश्मन की गतिविधियों को समझने और सिग्नल कट जाने पर भी स्वतः हमला जारी रखने में सक्षम बनाता है। दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध में स्वार्म ड्रोन (AI drone swarms) का इस्तेमाल कई बार देखा जा रहा है। इसमें सैकड़ों ड्रोन एकसाथ पक्षियों की झुंड की तरह साथ चलते हुए हमले को अंजाम देते हैं।
(स्रोत: पॉलीटेक्निक इन्साइट्स)