
Akshat Gupta Raipur Visit: छत्तीसगढ़ के रायपुर के लाभांडी रोड स्थित एक मॉल में आयोजित ‘किताबें और बातें’ टॉक शो में प्रसिद्ध लेखक अक्षत गुप्ता ने अपनी सादगी, हास्य और विचारों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। मंच पर आते ही उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "मेरा कुर्ता प्रेस नहीं था, इसलिए मैं थोड़ा नर्वस था। फिर मुझे समझ आया कि मैं एक्टर नहीं, राइटर हूं और यहां नरेशन देने आया हूं।" उनकी इस बात पर पूरा हॉल तालियों और हंसी से गूंज उठा।
हालांकि यह महज एक मजाकिया टिप्पणी थी, लेकिन इसके पीछे एक लेखक की सहजता और विनम्रता भी झलक रही थी। अक्षत गुप्ता ने अपने संबोधन में बताया कि एक बेहतरीन कहानी केवल कल्पना का परिणाम नहीं होती, बल्कि उसके पीछे वर्षों की रिसर्च, धैर्य और सीखने की निरंतर इच्छा छिपी होती है।
अक्षत गुप्ता ने भारतीय संस्कृति, महाभारत और रामायण के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत की पौराणिक कथाएं सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वे जीवन जीने, सही निर्णय लेने और परिस्थितियों को समझने का मार्ग दिखाती हैं।
उन्होंने राम और कृष्ण के चरित्र का उदाहरण देते हुए कहा कि राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे, जबकि कृष्ण के समय परिस्थितियां अलग थीं। "जब सामने अमर्यादित लोग हों, तो समय के अनुसार नियम भी बदलते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि शिव और विष्णु एक-दूसरे के पूरक हैं और भारतीय परंपराओं को समझने के लिए उन्हें प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि सहयोगी रूप में देखना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान अक्षत गुप्ता ने एक दिलचस्प विचार साझा करते हुए कहा कि हमारी परंपराएं और मान्यताएं मिथ्या नहीं, बल्कि सत्य हैं। इसलिए उन्हें "माइथोलॉजी" कहने के बजाय "सत्यालॉजी" कहना अधिक उपयुक्त होगा। उनके इस दृष्टिकोण ने उपस्थित लोगों को भारतीय इतिहास और संस्कृति को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित किया।
अक्षत ने युवाओं को अधिक पढ़ने, सवाल पूछने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चों को "D for Dharma" और "S for Sheshnag" जैसे संदर्भों से भी जोड़ना चाहिए, ताकि वे अपनी पहचान और विरासत को समझ सकें।
मर्यादा और समय की मांग पर उन्होंने बताया कि राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे, लेकिन कृष्ण के समय अमर्यादित लोगों से युद्ध था, इसलिए वहां नियम बदले। उन्होंने कहा कि शिव और विष्णु एक-दूसरे के पूरक हैं और हमेशा एक-दूसरे की पूजा करते हैं। हमारी परंपराएं मिथ्या नहीं बल्कि सत्य हैं, इसलिए इन्हें माइथोलॉजी की जगह सत्यालॉजी कहना सही होगा। संस्कृति और जीवन मूल्य पर उन्होंने युवाओं को बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं (जैसे डी फॉर धर्म, एस फॉर शेषनाग) से जोडऩे की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर एक कहानी होती है। जरूरत सिर्फ उसे पहचानने और ईमानदारी से शब्दों में ढालने की है। अक्षत गुप्ता की यह बात न केवल उभरते लेखकों, बल्कि जीवन में अपनी पहचान तलाश रहे हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा बन गई।