Anemia in India 2026 : भारत की महिलाओं को सबसे अधिक खतरा कैंसर, एड्स जैसी बीमारियों से नहीं है। इसके अलावा एनीमिया है जो साइलेंट किलर है। इसके बावजूद भी महिलाएं इस बात को हल्क में लेती हैं। आइए, जानते हैं कि खून की कमी कैसे देश के लिए खतरनाक है।
Anemia in India 2026 : हम अक्सर कैंसर, एड्स, हार्ट अटैक का नाम सुनकर डर जाते हैं! हमें लगता है कि सिर्फ यही बीमारियां जानलेवा हैं। पर, एक और जानलेवा बीमारी है- "खून की कमी"। इसे हम भारतीय हल्के में लेते हैं। लेकिन, ये बेहद खतरनाक है। खासकर, महिलाओं के लिए साइलेंट किलर है। गर्भवती महिलाओं को मारने का सबसे पहला कारण भी यही है। फिर भी हम आयरन की कमी को नजरअंदाज करते हैं। जबकि, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि हर दूसरी महिला एनीमिया से जूझ रही है। करीब भारत सरकार 55 साल से इसे दूर करने के लिए कई अभियान लेकर आई। आज 2026 में भी हम इससे आजाद नहीं हो पाए।
आइए, आयरन की कमी के आंकड़ों के साथ इसे दूर करने के बारे में डॉ. प्रियंका रहरिया (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. हिमांशु गुप्ता (फिजिशियन), डॉ. मनीष अरोड़ा (होम्योपैथिक), डॉ. अर्जुन राज (आयुर्वेद) से जानते हैं-
साल 1970 में राष्ट्रीय पोषण एनीमिया रोगनिरोधी कार्यक्रम (NNAPP) भारत का पहला बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम था। इसका उद्देश्य था कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों (1-5 वर्ष) को आयरन और फोलिक एसिड (IFA) की गोलियां बांटना। ताकि खून की कमी को दूर किया जा सके। साल 1991 में इसका नाम बदलकर 'राष्ट्रीय पोषण एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रम' (NNACP) कर दिया गया और इसमें बच्चों के साथ-साथ प्रजनन आयु की महिलाओं को भी शामिल किया गया।
डॉ. अभय ए. भावे, हेमेटोलॉजिस्ट, मुंबई ने टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख में लिखा है कि आज भारत में अनुमानित 67.1% बच्चे और 59.1% किशोर लड़कियां एनीमिया से ग्रस्त हैं। इसका मुख्य कारण विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों में पोषक तत्वों की कमी है। चिंता की बात यह है कि हर चार में से तीन भारतीय महिलाएं अभी भी भोजन के माध्यम से अपनी दैनिक आयरन की जरूरत को पूरा नहीं कर पाती हैं। इसका प्रभाव हेल्थ के अलावा भारत की जीडीपी पर भी पड़ता है।
डॉ. प्रियंका का कहना है कि सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। ये केवल प्रेग्नेंसी की समस्या नहीं, हर माह पीरियड्स में महिलाओं का ब्लड निकलता है। इसलिए, खून की कमी महिलाओं में अधिक होती है। साथ ही खराब खानपान मतलब खाने में आयरन, बी12, विटामिन सी की कमी है। साथ ही आयरन की दवाओं के सेवन से बचना या नियमित रूप से ना लेना। इन कारणों से भी खून की कमी दूर नहीं हो पाती है। जब महिला प्रेग्नेंट होती है तो उस वक्त शरीर को अधिक खून की आवश्यकता होती है। इसको नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो जाता है।
वो कहती हैं कि अगर इस तरह की पीरियड्स की दिक्कत रहती है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अधिकतर लोग इस बात को अनदेखा करते हैं। आगे चलकर ये बड़ी समस्या बन जाती है।
आगे ये भी कहती हैं कि गर्भवती महिलाओं को शुरू से ही आयरन, हीमोग्लोबिन की जांच कराते रहनी चाहिए। इसके अलावा बच्चे को जन्म देने के करीब 1 साल तक खून की कमी की जांच आदि कराएं।
बीडी आर्या गर्ल्स कॉलेज, जालंधर कैंट, पंजाब की एक शोधकर्ता कवलजीत कौर ने पाया कि एनीमिया भारत की महिलाओं के लिए साइलेंट किलर है। भारत में 5 में से एक गर्भवती महिला की मौत खून की कमी के कारण होती है। ग्लोबल लेवल पर बात करें तो 1.62 बिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। खासकर, एशियाई देशों में ये समस्या बहुत बड़ी है।
डॉ. हिमांशु कहते हैं, हम सिर्फ सरकार को दोष नहीं दे सकते हैं। क्योंकि, देखिए कितने सारे अभियान चल रहे हैं। अगर सरकार आयरन की गोली दे रही है तो खाने का काम आपको खुद करना है। पर, हम एनीमिया से डरते नहीं है। इसे नजरअंदाज करते हैं। लापरवाही केवल यहीं पर नहीं होती। खाना बनाने से लेकर खाने तक में ध्यान नहीं रखते हैं। इसी कारण खून की कमी के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं और परिणाम भी भयावह हैं। ये गर्भवती महिलाओं को मारने में नंबर 1 भूमिका निभाता है।
डॉ. अर्जुन बताते हैं, खानपान के जरिए खून की कमी को दूर किया जा सकता है। साग-सब्जी, डेयरी उत्पाद से लेकर मांस-मछली तक सबमें आयरन होता है। बस आपको सेवन करने का सही तरीका पता होना चाहिए।
डॉ. मनीष कहते हैं, होम्योपैथी इलाज से भी एनीमिया को दूर किया जा सकता है। प्रेग्नेंसी में कई महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। हम उनको होम्यो दवाईयों के साथ-साथ खानपान का ध्यान रखने के लिए कहते हैं। साथ ही समय पर जांच आदि कराना जरूरी है ताकि उसी हिसाब से दवा आदि दिया जा सके।