
Bastar Tiranga Yatra: बस्तर में लंबे समय तक हिंसा और नक्सलवाद के कारण जिन इलाकों में आम लोगों का पहुंचना भी मुश्किल था, वहां अब बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। जहां कभी डर का बोलबाला था, कभी सुरक्षा कारणों से जिन रास्तों पर जाने से पहले कई स्तर की सावधानियां बरती जाती थीं, उन्हीं रास्तों पर अब बाइक से यात्राएं हो रही हैं। गलगम, कसूर और आवापल्ली जैसे इलाकों तक पहुंचकर तिरंगा फहराया गया, शहीदों की स्मृतियों को सहेजने और स्थानीय लोगों से संवाद करने का अभियान इस बदलाव का प्रतीक बन रहा है। इसी का परिणाम है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गांव-गांव तिरंगा फहराया गया।
वैसे भी बस्तर इस बार दोहरी आजादी का जश्न मना रहा है। पहली बार ऐसा हो रहा है जब नक्सली हिंसा से आजाद होकर वहां देश की आजादी का उत्सव मनाया जा रहा है। उन स्थानों की मिट्टी एकत्र की जा रही है, जहां सुरक्षा बलों के जवानों ने शहादत दी। शहीद परिवारों से मुलाकात कर उनके बलिदान को सम्मान देने की पहल भी की जा रही है। इन्हीं सभी पहलुओं को लेकर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने ‘पत्रिका’ से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस खास बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए इस बदलाव को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब: यह केवल बस्तर के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। यह पहला स्वतंत्रता दिवस है, जब हिंसा से मुक्त वातावरण में पूरा छत्तीसगढ़, पूरा बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्र आजादी के पर्व का उत्सव मना रहा है। यह बदलाव सीधे विकास से जुड़ा हुआ है। करीब आठ दशक बाद ऐसा अवसर आया है, जब इन क्षेत्रों के साथ पूरा प्रदेश खड़ा होकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ सकता है। यह एक बहुत बड़ा अवसर है और इसके साथ बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
सवाल: इस बार बस्तर में हर घर तिरंगा अभियान को लेकर क्या तैयारी है?
जवाब: इस बार बस्तर के शत-प्रतिशत गांवों में तिरंगा फहराया गया। करीब 93 ऐसे नए गांव हैं, जहां इस बार पहली बार परिवारों ने तिरंगा फहराया। सरकार बनने के बाद राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर दर्जनों नए स्थानों पर तिरंगा फहराने का काम किया गया है। इस बार समूचे बस्तर में भारत की एकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने के प्रतीक के रूप में हर घर तिरंगा फहराया गया।
सवाल: आप जिन इलाकों में यात्रा कर रहे हैं, वहां पहले जाना कितना मुश्किल था?
जवाब: पहले इन इलाकों में आना-जाना भी संभव नहीं हो पाता था। अब हम उन्हीं रास्तों पर बाइक से जा रहे हैं और इस यात्रा की पहले से घोषणा भी कर रहे हैं। पहले सुरक्षा व्यवस्था ऐसी थी कि यात्रा के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी जाती थी। जिस रास्ते से जाते थे, उसी रास्ते से वापस नहीं आने का प्रोटोकॉल था। लेकिन अब परिस्थितियां बदली हैं। हमने पहले ही यात्रा की घोषणा की और अब बाइक से इन रास्तों को पूरा कर रहे हैं। इससे बड़ा परिवर्तन का संकेत और क्या हो सकता है।
सवाल: क्या पर्यटन बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने की पहली सीढ़ी बन सकता है?
जवाब: बिल्कुल। पर्यटन बस्तर को जोड़ने की पहली सीढ़ी है। बस्तर की जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों को देश-दुनिया के सामने लाने की जरूरत है। आज अलग-अलग माध्यमों से बस्तर की खूबसूरती और यहां हो रहे बदलाव को दिखाने की कोशिश की जा रही है। इससे लोगों की बस्तर को लेकर बनी पुरानी धारणा बदलेगी और देश के दूसरे हिस्सों के लोग भी यहां आने के लिए प्रेरित होंगे।
सवाल: दूर बैठे लोगों के मन में अभी भी यह आशंका हो सकती है कि कहीं नक्सलियों या विस्फोटक का खतरा तो नहीं है। इस आशंका को कैसे दूर किया जा सकता है?
जवाब: यह कहना अभी संभव नहीं है कि विस्फोटक या किसी अन्य खतरे की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। इसलिए लोगों से कहा जा रहा है कि वे निर्धारित मार्ग पर ही चलें और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें। सुरक्षा बल लगातार क्षेत्र में काम कर रहे हैं। कुछ लोग सादे कपड़ों में भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। इसलिए आम लोगों को सावधानी बरतने और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
सवाल: इस पूरे बदलाव में जिन जवानों ने शहादत दी, उनके सम्मान को लेकर क्या किया जा रहा है?
जवाब: इस अभियान में शहीद जवानों को सम्मान देना हमारी प्राथमिकता है। शहीद स्मारक बनाया गया है, जहां शहीदों की स्मृतियों को सुरक्षित रखा जा रहा है। इसे और व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा ऐसे अनेक जवान और परिवार हैं, जिन्हें उचित सम्मान मिलना बाकी है। उन तक पहुंचने और उनकी कहानियों को सामने लाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
सवाल: बस्तर के गांवों में शहादत और संघर्ष की अनेक कहानियां बिखरी हुई हैं। क्या इन कहानियों को सामने लाने की जरूरत है?
जवाब: बिल्कुल। बस्तर के गांव-गांव में अनेक कहानियां बिखरी पड़ी हैं। इन कहानियों को सामने लाने की जरूरत है, क्योंकि ये केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की कहानी नहीं हैं, बल्कि बस्तर के संघर्ष और बदलाव की पूरी यात्रा का हिस्सा हैं।
बस्तर में बदलाव को केवल सुरक्षा के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। असली बदलाव तब दिखाई देता है, जब कभी भय और प्रतिबंध के प्रतीक रहे रास्तों पर आम लोगों की आवाजाही शुरू होती है, गांवों में तिरंगा शान से फहरता है और शहीदों की कहानियां लोगों तक पहुंचती हैं। पर्यटन, संपर्क, विकास और स्थानीय लोगों की भागीदारी इस बदलाव को स्थायी बनाने की अगली कड़ी हो सकती है।