
बीकानेर का चल पुस्तकालय (Photo: Rajasthan Patrika)
Tanga Library Bikaner: आज जब किताब तक पहुंचने के लिए मोबाइल की स्क्रीन पर कुछ शब्द टाइप करना काफी है, तब बीकानेर की गलियों में किताबें खुद लोगों तक पहुंचती थीं। दोपहर का वक्त होता। तांगे पर किताबें, पत्रिकाएं, खिलौने और दरी सजती और उसकी ‘टक-टक… टक-टक…’ की आवाज सुनते ही मोहल्ले के लोग घरों से बाहर निकलने लगते। बच्चों से लेकर बड़े तक जानते थे…‘तांगा पुस्तकालय आ गया।’
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