Ban on Social Media for Children : भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सिम कार्ड खरीदना, नाबालिग बच्चों के सोशल मीडिया जॉइन नहीं करने जैसे कई कानून बने हुए हैं लेकिन उन्हें अमल में नहीं लाया जा रहा है। इसका बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। आंध्र प्रदेश और केंद्र सरकार इन समस्याओं के मद्देनजर सरकार इस बारे में नियम-कानून बनाने जा रही है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।
Ban social media for children : आंध्र प्रदेश के सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेतृत्व वाली सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून लाने पर विचार कर रही है।
Digital pollution on children India : आंध्र प्रदेश ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध (Ban on Social Media in Andhra Pradesh) लगाने पर विचार करते हुए तकनीकी दिग्गजों को बातचीत के लिए बुलाया है। आंध्र प्रदेश के सूचना एवं शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने बैन को लेकर यह भी कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया में पिछले महीने पारित हुए कानून की तर्ज पर कानून बनाएंगे।
Digital code India government draft : वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ड्राफ्ट कोड (Digital Code) तैयार करने में जुटी हुई है। केंद्र सरकार के ड्राफ्ट कोड में हिंसा, अश्लीलता, नग्नता, यौन सामग्री, अभद्रता, ड्रग्स और डरावनी सामग्री सहित विषयों और संदेशों के आधार पर सभी डिजिटल सामग्री को लेबल के साथ वर्गीकृत करना अनिवार्य करने जा रही है। आंध्र प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों का ही मकसद महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों पर होने वाले ऑनलाइन को खत्म या कम किया जा सके।
Andhra Pradesh social media ban news : आंध्र प्रदेश सरकार बच्चों के सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही ताकि महिलाओं और विशेष तौर पर बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा प्रदान किया जा सके। सरकार ने इस मुद्दे पर एक बैठक के लिए प्रमुख वैश्विक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है। इस मीटिंग के लिए मेटा, एक्स, गूगल और शेयरचैट के प्रतिनिधियों से संपर्क किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक डेटा खपत 2025 में 399 गुना बढ़कर लगभग 24 गीगाबाइट हो गई, जो 2014 में 62 मेगाबाइट थी। भारत में दुनिया में प्रति व्यक्ति सबसे अधिक डाटा का इस्तेमाल हो रहा है। सितंबर 2025 तक भारत में इंटरनेट यूजर्स की कुल संख्या लगभग 1.02 अरब हो चुकी है, जबिक 2014 में लगभग 250 मिलियन तक इंटरनेट की पहुंच थी।
ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध को लागू कर दिया है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कदम है। इस कानून के तहत प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स, स्नैपचैट और यूट्यूब को 16 से कम उम्र के यूज़र्स को ब्लॉक किए जा रहे हैं। कोई सोशल मीडिया कंपनी नियम तोड़ती है तो टेक कंपनियों पर 400 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना लग सकता है।
भारत में इंडियन मेजोरिटी एक्ट और कॉन्ट्रैक्ट एक्ट कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चे सिम कार्ड नहीं हासिल कर सकते। सोशल मीडिया कंपनियां ग्राहकों का डाटा हासिल करके उनका कारोबार करती हैं लेकिन नाबालिग बच्चों की सहमति के आधार पर उनके डाटा का कोई भी कारोबार अवैध है। इसलिए भारत में कानून के अनुसार नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के साथ कोई भी अनुबंध नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर एक्सपर्ट विराग गुप्ता ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि वह बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को लेकर 2013 से सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में दिल्ली समेत दूसरे शहरों को प्रदूषण से बचाने के लिए अनेक तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन देश के भविष्य बच्चों को डिजिटल प्रदूषण से बचाने वाले मानकों पर अमल नहीं हो पा रहा है, जबकि भारत में दिल्ली हाई कोर्ट ने 2013 में ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्त 2013 में के. एन. गोविंदाचार्य मामले में आदेश पारित किया था कि नाबालिग बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते।
विराग गुप्ता से यह सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, स्कूल और कॉलेज जाने वाले बच्चे डिजिटल कंटेंट के उपभोग के लिए नए-नए तरीके इस्तेमाल में ला रहे हैं। वे स्नैप चैट, रेडिट, डिस्कार्ड आदि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल में ला रहे हैं। इतना ही नहीं, जेन-जी (GenZ) इन कामों में इतने स्मार्ट हैं कि वे डिजिटल फुटप्रिंट्स (Digital Footprints) भी नहीं छोड़ते। वे अपने फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तीन-तीन सिम और अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा वे परिवार, दोस्त और अंजान लोगों से सम्पर्क बनाए रखने के लिए कर रहे हैं। उनका कहना है कि वीपीएन और डार्क वेब की दुनिया की जाल में बच्चों को फंसने से रोकने के लिए सिर्फ कानून बनाने से ही काम नहीं चलेगा।
आखिर बच्चों को फिर कैसे सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है? इस सवाल पर वह कहते हैं कि जाहिर है कि बच्चों को स्कूल और घर पर पढ़ाई या होमवर्क पूरा करने के बाद के बचे समय में उनमें खेलने, लिटरेचर पढ़ने, संगीत सुनने, और परिवार के साथ समय बिताने की आदत डालनी होगी। वह बड़ों को भी हिदायत देते हुए कहते हैं कि जाहिर सी बात है कि बच्चों में ऐसी आदतें आसपास के माहौल के चलते विकसित होती हैं। सो, घर में मां-बाप, दादा, नाना, दादी, नानी या अन्य व्यस्क लोगों को भी मोबाइल और टीवी से थोड़ी दूरी बनाकर उन्हें भी लिटरेचर पढ़ने, संगीत सुनने की आदत डालनी होगी।