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CG News: छत्तीसगढ़ में बदलता खेती का पैटर्न, गर्मी में धान की जगह सरसों, मक्का और दलहन की बुवाई

CG News: ग्रीष्मकालीन धान की जल आवश्यकता दलहन, तिलहन, मक्का की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक होती है। इसी उपलब्ध सिंचाई जल से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का की फसल दो से तीन गुना अधिक क्षेत्र में ली जा सकती है।

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Feb 05, 2026

CG News: गर्मी के मौसम में पानी की बढ़ती किल्लत और लागत में इजाफे को देखते हुए किसान अब धान की खेती से दूरी बना रहे हैं। इसकी जगह सरसों, मक्का और विभिन्न दलहनी फसलों की ओर रुख किया जा रहा है, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन और मुनाफा देने वाली मानी जाती हैं। लगातार घटती वर्षा, भू-जल स्तर में गिरावट तथा बढ़ती हुई सिंचाई लागत जैसी चुनौतियों के बीच कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने शासन द्वारा पहल की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन धान फसल को हतोत्साहित करते हुए कृषकों को दलहन, तिलहन एवं अन्य फसल लेने प्रेरित किया जा रहा है।

कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन के सतत् प्रयासों से दुर्ग संभाग में 33,010 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को प्रतिस्थापित करते हुए धान के स्थान पर वैकल्पिक फसल के रूप में 12,491 हेक्टेयर में दलहन, 3,532 हेक्टेयर में तिलहन, 3,106 हेक्टेयर में मक्का, 410 हेक्टेयर में लघु धान्य तथा 13,472 हेक्टेयर में अन्य फसल लिए जाने की जानकारी संयुक्त संचालक कृषि गोपिका गवेल द्वारा संभागीय आयुक्त दुर्ग को समीक्षा बैठक में दी गई। इस रकबे में और वृद्धि की संभावना है।

संभागीय आयुक्त दुर्ग द्वारा प्रतिस्थापित रकबे को गिरदावरी में अनिवार्य रूप से शामिल करने के निर्देश दिए गए। केन्द्रीय भू-जल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार दुर्ग संभाग के राजनांदगांव एवं बेमेतरा जिले को क्रिटिकल जोन में रखा गया है। कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन ने विशेष अभियान चलाकर इस वर्ष जिला बेमेतरा में 20,231 है. राजनांदगांव में 6,335 है. में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसल ली गई है।

धान के लिए जल बहुत जरूरी

ग्रीष्मकालीन धान की जल आवश्यकता दलहन, तिलहन, मक्का की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक होती है। इसी उपलब्ध सिंचाई जल से धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का की फसल दो से तीन गुना अधिक क्षेत्र में ली जा सकती है। औसतन 1 कि.ग्रा. धान उत्पादन के लिए 2 से 3 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति मुख्य रूप से भूमिगत जल स्त्रोतों से की जाती है।

गर्मी में हैंडपंप और ट्यूबवेल सूखते हैं

वृहद क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान लगाने से हैण्डपंप एवं ट्यूबवेल सूख जाते है. पीने के पानी की किल्लत होती है। पर्यावरणीय असंतुलन के साथ भूमि की उपजाऊ शक्त्ति में कमी आती है। वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार ग्रीष्मकालीन धान के पक्षात खरीफमें पुनः धान की खेती से कीट व्याधि की
संभावना बढ़ जाती है। अतः कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन ने कृषकों को गर्मी में अन्य फसल लेने प्रेरित किया।

किसान ने कहा

गर्मी में धान लगाने से पानी और खर्च दोनों ज्यादा लगते हैं। अब हालात को देखते हुए हम सरसों, मक्का और दलहन की खेती करेंगे, जिसमें पानी कम लगता है और आमदनी भी ठीक हो जाती है।

कृषि वैज्ञानिक ने कहा

गर्मी के मौसम के लिए सरसों, मक्का और दलहन वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त फसलें हैं। इनसे पानी की बचत होती है और किसानों की आमदनी भी स्थिर रहती है।

Published on:
05 Feb 2026 10:06 pm
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