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Bhalukona Mining: क्या छत्तीसगढ़ बनेगा क्रिटिकल मिनरल्स हब? भालुकोना में ड्रिलिंग से खुलेंगे बड़े राज

Bhalukona Mining: भालुकोना में निकल, कॉपर और प्लेटिनम जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की खोज के लिए ड्रिलिंग शुरू हो गई है।

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Mar 25, 2026
Bhalukona Mining (photo source- Patrika)

देवेंद्र गोस्वामी/दुनियाभर में बढ़ते ऊर्जा संकट और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते कदमों के बीच Chhattisgarh एक बड़ी उम्मीद बनकर उभर रहा है। महासमुंद जिले के Bhalukona-जमनीडीह क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद अब यहां ड्रिलिंग का काम शुरू हो चुका है। आने वाले दो हफ्तों में रिपोर्ट सामने आएगी, जिससे इन खनिजों की गुणवत्ता और मात्रा का स्पष्ट आकलन हो सकेगा। यदि नतीजे सकारात्मक रहे, तो यह परियोजना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ सेक्टर में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

30 वर्ग किलोमीटर में छिपा संभावित खजाना

प्रारंभिक सर्वे और सैंपलिंग के आधार पर करीब 30 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निकल, कॉपर और प्लेटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (PGE) की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने इस ब्लॉक में ड्रिलिंग और माइनिंग के लिए Deccan Gold Mines Limited को जिम्मेदारी सौंपी है। यह कंपनी देश की एकमात्र सूचीबद्ध गोल्ड एक्सप्लोरेशन कंपनी है, जो अब क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और खनन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

ग्लोबल स्तर पर सक्रिय कंपनी

कंपनी के प्रबंध निदेशक Hanuma Prasad Modali के अनुसार, उनकी कंपनी छत्तीसगढ़ के साथ-साथ स्पेन में भी क्रिटिकल मिनरल्स पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा संरक्षण और वैश्विक संसाधन सुरक्षा के दौर में यह परियोजना भारत की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में ड्रिलिंग के शुरुआती नतीजे सामने आएंगे, जिनके आधार पर आगे की योजना बनाई जाएगी।

ड्रिलिंग से खुलेगा भूमिगत रहस्य

भालुकोना क्षेत्र में अब जो ड्रिलिंग शुरू हुई है, उसका उद्देश्य जमीन के भीतर मौजूद खनिजों की सटीक स्थिति और मात्रा का पता लगाना है। पहले भू-भौतिकीय सर्वे और चट्टानों के नमूनों में संकेत मिले, अब ड्रिलिंग से वास्तविक भंडार का आकलन होगा, रिपोर्ट के बाद तय होगा कि व्यावसायिक खनन संभव है या नहीं। यह प्रक्रिया किसी भी खनन परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण होती है, क्योंकि इसी से परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता तय होती है।

क्यों जरूरी हैं ये ‘क्रिटिकल मिनरल्स’?

आज के दौर में निकल, कॉपर और प्लेटिनम जैसी धातुएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरियों में निकल की बड़ी भूमिका, कॉपर बिजली और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अनिवार्य, PGE (प्लेटिनम ग्रुप) स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा तकनीक में उपयोगी। दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ रही है, ऐसे में इन खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर खनन शुरू होता है, तो इसका सीधा लाभ स्थानीय और राज्य स्तर पर देखने को मिलेगा: हजारों लोगों को रोजगार के अवसर, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास में तेजी, राज्य के राजस्व में वृद्धि, स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा। प्रारंभिक आकलन के अनुसार भविष्य में यहां से हर साल करीब 10,000 टन कॉपर और 10,000 टन निकल उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

सरकार की पहल और तेज प्रक्रिया

राज्य सरकार ने 1 अप्रैल 2025 को इस ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस जारी किया था, जिसमें प्रोस्पेक्टिंग से लेकर माइनिंग तक की अनुमति शामिल है। इससे परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। यह कदम यह भी दिखाता है कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश और विकास को प्राथमिकता दे रही है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इस परियोजना के साथ कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं: पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता का संतुलन, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और पुनर्वास, सतत (sustainable) खनन तकनीकों का उपयोग। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही परियोजना को आगे बढ़ाना होगा।

Updated on:
25 Mar 2026 03:13 pm
Published on:
25 Mar 2026 03:12 pm
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