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आसमानी आफत से देशभर में 2000 मौतें! अकेले छत्तीसगढ़ में 300 लोगों ने गंवाई जान, आप ना करें ये गलती

Sky Lightning death case: जब आकाशीय बिजली (गाज) गिरती तो 10 से 30 करोड़ वोल्ट की घातक ऊर्जा समाहित होती है। ऐसे में चपेट में आने वाला कोई शख्स अगर बच जाता है तो यह चमत्कारिक से कम नहीं। आइए देखते हैं ये स्पेशल रिपोर्ट...

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Jun 15, 2026
Chhattisgarh Sky Lightning death case, Chhattisgarh News
छत्तीसगढ़ में आसमानी आफत ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh Sky Lightning death case: मानसून के सक्रिय होते ही प्रदेश में आकाशीय बिजली (गाज) का खतरा विकराल हो गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस तबाही के पीछे क्यूमलो निंबस नामक बादल जिम्मेदार हैं। ये बादल जमीन से 6 से 16 किमी की ऊंचाई पर बनते हैं और इनमें 10 से 30 करोड़ वोल्ट की घातक ऊर्जा समाहित होती है। तुलनात्मक रूप से देखें तो घरों में आने वाली 220 वोल्ट की बिजली इसके सामने नगण्य है।

Chhattisgarh News: अप्रैल में ही 50 से अधिक लोगों की मौत

इस बिजली की मारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल से अब तक प्रदेश में गाज गिरने से 50 से अधिक लोगों और 200 से ज्यादा मवेशियों की असमय मौत हो चुकी है। (Moonsoon Update) हाल ही में 12 जून को अंतागढ़ में हुई तीन लोगों की मृत्यु ने इस खतरे की भयावहता को फिर स्पष्ट कर दिया है। जब बादलों की गर्जना के साथ गाज गिरती है, तो आसपास की हवा का तापमान 27000 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला जाता है, जो सूर्य की सतह के तापमान से कई गुना अधिक है।

कोई चमत्कारिक रूप से बच भी जाए

यही कारण है कि इसकी चपेट में आने वाले मनुष्य या पशु मौके पर ही दम तोड़ देते हैं। यदि कोई व्यक्ति चमत्कारिक रूप से बच भी जाए, तो वह गंभीर रूप से अपाहिज हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली गिरने से याददाश्त का जाना (मेमोरी लॉस), अंगों का सुन्न पड़ना, लकवा मारना, ऑर्गन फेलियर और भविष्य में हार्ट अटैक जैसी जटिल समस्याएं हो सकती हैं।

सावधानी ही एकमात्र सुरक्षा

आकाशीय बिजली बादलों और जमीन के बीच विपरीत आवेशों (पॉजीटिव व नेगेटिव चार्जेस) के घर्षण का परिणाम है। मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान यह खतरा सबसे अधिक होता है। बारिश और बादलों की जोरदार गर्जना के दौरान खुले मैदानों, तालाबों या ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें, क्योंकि बिजली अक्सर ऊंची वस्तुओं को अपना निशाना बनाती है। यदि आप बाहर हैं, तो तुरंत किसी पक्के और मजबूत मकान के भीतर चले जाएं। बिजली कड़कते समय पेड़ के नीचे शरण लेना जानलेवा हो सकता है।

देशभर में लगभग 2,000 लोगों की मौत

भारत में आकाशीय बिजली (वज्रपात) के कारण हर साल औसतन लगभग 2,000 लोगों की मौत हो जाती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अनुसार, यह भारत में प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली कुल मौतों का सबसे बड़ा (करीब 35% से 40%) कारण है।

राज्यवार स्थिति (नवीनतम रुझानों के अनुसार): अध्ययनों और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में वज्रपात का सबसे अधिक घातक प्रभाव देखा जाता है:

मध्य प्रदेश: सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक, जहाँ प्रति वर्ष सैकड़ों मौतें दर्ज की जाती हैं।

बिहार: आकाशीय बिजली से अत्यधिक संवेदनशील राज्य, जहाँ हर साल सैकड़ों लोग जान गंवाते हैं।

ओडिशा: इस क्षेत्र में मौतों का आंकड़ा काफी ऊंचा रहता है।

उत्तर प्रदेश और झारखंड: इन राज्यों में भी आकाशीय बिजली गिरने से व्यापक स्तर पर जनहानि होती है।

क्या करें

अधेरे आसमान के बदलते रंग और बढ़ती हवा के वेग पर नजर रखें, यदि आप गड़गड़ाहट सुनते हैं तो सावधान रहें आकाशीय बिजली (गाज) के संर्पक में आने से बचें। ( Chhattisgarh Sky Lightning death case ) अद्यतन निर्देशो के लिए स्थानीय मीडिया पर निगरानी रखे। घर के अंदर रहे और यदि संभव हो तो यात्रा से बचे। खिड़कियां और दरवाजे बंद करें, और अपने घर के बाहर की वस्तुओं को सुरक्षित करें (जैसे फर्नीचर, डिब्बे, आदि)सुनिश्चित करें कि बच्चे और पालतू जानवर अंदर हैं। अनावश्यक बिजली के उपकरणों को अनप्लग करें। पेड की लकड़ी या किसी भी अन्य मलबे को हटा दें जो दुर्घटना का कारण बनः सकता है।

क्या ना करें (Don'ts)

स्नान या शॉवर लेने से बचें और बहते पानी से दूर रहें। ऐसा इसलिए है क्योंकि धातु के पाइप के साथ आकाशीय विजली (गाज) प्रवाहित हो सकती है।दरवाजे, खिडकियां, फायरप्लेस, स्टोव या किसी अन्य विद्युत कंडक्टर से दूर रखे। कॉर्डेड फोन और अन्य बिजली के उपकरणों के उपयोग से बचे जो बिजली का संचालन कर सकते हैं।

यदि आप घर के बाहर (खुले मैदान)में हैं

तुरंत सुरक्षित आश्रय पर जाएं धातु संरचना/धातु की चादर के साथ निर्माण जैसे आश्रय से बचें। आदर्श रूप से,एक निचले क्षेत्र में आश्रय खोजे और सुनिश्चित करें कि चुना गया स्थान बाढ़ की संभावना से परे हो। अपने आप को एक छोटा बनाने के लिए पैरों को एक साथ रखें और सिर नीचे रखें। आपकी गर्दन को पीछे खड़े बाल संकेत कर सकते हैं कि आकाशीय बिजली (गाज) निकटस्थ है। जमीन पर सपाट खड़े न रहें। यह एक बड़ा लक्ष्य बना देगा। सभी उपयोगिता लाइनों (फोन,पावर, आदि), धातु की बाडी, पेड़ और पहाड़ी से दूर रहें। इन आचरण विद्युत के रूप में पेड़ो के नीचे शरण न लें। रबर सोल वाले जूते और कार के टायर बिजली से सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं।

यदि आप यात्रा/सफर/रास्ते पर हैं

साइकिल, मोटरसाइकिल या वाहनों से दूर रहें जो आकाशीय बिजली (गाज) को आकर्षित कर सकते हैं। सुरक्षित आश्रय प्राप्त करें। यदि नौका विहार या तैराकी कर रहे हो, तो जितनी जल्दी हो सके उतरें और सुरक्षित शरण ले। तूफान के दौरान, अपने वाहन में तब तक रहे जब तक कि मदद नहीं आती है या तूफान गुजर नहीं जाता है (धातु की छत सुरक्षा प्रदान करती है यदि आप अंदर की धातु को नहीं छू रहे हैं)। वाहन की खिड़कियां बंद होनी चाहिए और पेडों/बिजली लाइनों से वाहन दूर पार्क करे।

इलाज

ऐसे व्यक्ति को अस्पताल ले जाएं जो आकाशीय बिजली (गाज गिरने से चोटिल हुआ हो,हो सके तो प्राथमिक उपचार दें। आकाशीय बिजली (गाज) की चपेट में आने वाले लोगों को कोई विद्युत आवेश नहीं होता है और उन्हें सुरक्षित रूप से संभाला जा सकता है। टूटी हुई हड्डियों, सुनने और आंखों की रोशनी कम होने की जाँच करें। आकाशीय बिजली (गाज) का शिकार व्यक्ति अलग-अलग डिग्री तक जल सकता है, प्रभावित शारीरीक स्थान चोट की जाँच करें।

टॉपिक एक्सपर्ट

एचओडी चेस्ट, नेहरू मेडिकल कॉलेज डॉ. आरके पंडा, बताया कि आकाशीय बिजली सीधे फेफड़ों को चोट पहुंचा सकती है, जिससे फेफड़ों में तरल पदार्थ भर सकता है। बिजली के झटके के कारण फेफड़ों का श्वसन तंत्र ठप भी हो सकता है। मानसूनी सीजन में ऐसे कुछ केस आते रहे हैं। ज्यादातर मामलों में गाज की चपेट में आने से लोगों की मौत हो जाती है। जो बच जाते हैं, उन्हें तत्काल अस्पताल लाना चाहिए।

मौसम विभाग के रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर जनरल एमएल साहू ने बताया कि आकाशीय बिजली गिरने के लिए सीबी क्लाउड जिम्मेदार है। जब बादलों की जोरदार गर्जना होती है तो गाज गिरती है। इसके प्रभाव से आसपास की हवा का तापमान 27 हजार डिग्री से ज्यादा हो जाता है, जो सूर्य के तापमान से कई गुना ज्यादा है। यही कारण है कि इसकी चपेट में आने वाले ज्यादातर लोगों व मवेशियों की मौत हो जाती है।

Updated on:
15 Jun 2026 04:55 pm
Published on:
15 Jun 2026 04:18 pm