World Consumer Rights Day: छत्तीसगढ़ में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रायपुर सहित प्रदेश के उपभोक्ताओं ने बैंक, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों की लापरवाही या धोखाधड़ी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
World Consumer Rights Day: 15 मार्च को मनाया जाने वाला विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस केवल जागरूकता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उन लोगों की मिसालों को याद करने का भी दिन है जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः न्याय हासिल किया। छत्तीसगढ़ में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां रायपुर सहित प्रदेश के उपभोक्ताओं ने बैंक, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों की लापरवाही या धोखाधड़ी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने कई मामलों में कंपनियों और संस्थाओं को कड़ी फटकार लगाते हुए उपभोक्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया। इन मामलों में उपभोक्ताओं को लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक का मुआवजा दिलाया गया। ये फैसले यह साबित करते हैं कि अगर उपभोक्ता जागरूक हों, सही सबूत पेश करें और धैर्य के साथ कानूनी प्रक्रिया अपनाएं तो आम नागरिक भी बड़ी संस्थाओं के सामने अपने अधिकार की लड़ाई जीत सकता है।
राजधानी रायपुर के रिटायर्ड दंपती डॉ. अनिल कुमार पांडे और डॉ. रमा पांडे ने विश्वविद्यालय सब-पोस्ट ऑफिस में एजेंटों के माध्यम से 18 टीडीआर खाते खुलवाए थे। समय पूरा होने के बाद जब उन्होंने मैच्योरिटी की राशि लेने की कोशिश की तो उन्हें पता चला कि उनके खातों से लगभग 1.91 करोड़ रुपए की फर्जी निकासी हो चुकी है।
जांच में सामने आया कि पोस्टमास्टर और एजेंट की मिलीभगत से यह गड़बड़ी हुई थी। मामले को लेकर दंपती ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के बाद छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी माना और डाक विभाग को 1.91 करोड़ रुपए की राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने, साथ ही 1 लाख रुपए मानसिक पीड़ा और 15 हजार रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया।
महासमुंद जिले के एक शिक्षक जयराम पटेल के साथ हुई एक छोटी सी घटना ने बैंङ्क्षकग व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। उन्होंने एटीएम से 2000 रुपए निकालने की कोशिश की, लेकिन मशीन से केवल 1000 रुपए ही निकले, जबकि खाते से पूरी राशि कट गई।
जब वे शिकायत लेकर बैंक पहुंचे तो शाखा प्रबंधक ने न केवल उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया, बल्कि उनसे बदसलूकी भी की। इसके बाद जयराम पटेल ने उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया। करीब 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और बैंक को 4 लाख 36 हजार 787 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया।
जगदलपुर निवासी अर्जुन बिसाई को कैंसर हो गया था। उनके इलाज में भारी खर्च हुआ। इलाज के बाद जब बीमा कंपनी के सामने दावा किया गया तो कंपनी ने आवश्यक दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया। इसी बीच अर्जुन बिसाई की मृत्यु हो गई।
इसके बाद उनकी पत्नी रुक्मणी बिसाई ने हिम्मत नहीं हारी और जिला उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया। सुनवाई के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 1 लाख रुपए चिकित्सा व्यय (ब्याज सहित) लौटाने, साथ ही 10 हजार रुपए मानसिक पीड़ा और अन्य खर्च देने का आदेश दिया।
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हर साल 15 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1962 में हुई थी, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने उपभोक्ताओं के चार बुनियादी अधिकारों- सुरक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, चुनाव का अधिकार और सुनवाई का अधिकार- की घोषणा की थी।
बाद में 1983 से संयुक्त राष्ट्र ने इसे वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरुआत की, ताकि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके और वे किसी भी प्रकार के शोषण या धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठा सकें।
इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता अगर अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और गलत के खिलाफ आवाज उठाएं तो उन्हें न्याय जरूर मिल सकता है। उपभोक्ता आयोग ऐसे मामलों में आम लोगों के लिए एक सशक्त मंच साबित हो रहा है, जहां वे बड़ी कंपनियों और संस्थानों के खिलाफ भी अपनी बात मजबूती से रख सकते हैं।