Patrika Special News

क्या यूरोप की भीषण गर्मी है भारत के कल की तस्वीर! आंकड़े दे रहे बड़ा संकेत

Climate Change in India: 1901 से 2026 तक के साल यानी कुल 125 साल के मौसम विभाग के रिकॉर्ड, कई वैज्ञानिक शोध और हाल में जलवायु परिवर्तन पर किए गए अध्ययन बताते हैं कि भारत में पड़ने वाले सीजन पेटर्न बदल रहे हैं। खासतौर पर सर्दी का स्वरूप बदल रहा है। विंटर सीजन की अवधि कम हुई है और गर्मी अपने दिन बढ़ाती जा रही है। अहम सवाल है कि क्या भारत उस ओर बढ़ रहा है जहां आज यूरोप खड़ा है?
6 min read
Jul 01, 2026
Climate Change in India Europe give warning
Climate Change in India Europe give warning: यूरोप की भीषण गर्मी भारत के लिए भी चेतावनी। (Photo Source: AI Generated)

Climate Change in India: यूरोप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की मार झेल रहा है। कई देशों में तापमान सामान्य से ऊपर पहुंच चुका है। सड़कें पिघल रही हैं, स्कूल बंद कर दिए गए हैं और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार चेतावनी जारी कर रही हैं। भीषण गर्मी में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में ज्यादातर बुजुर्ग बताए जा रहे हैं। वर्तमान यूरोपीय देशों पर कहर ढा रहा है, मौसम वैज्ञानिक इसे सामान्य मौसम नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन का परिणाम मान रहे हैं। अगर बदलती जलवायु का असर यूरोप पर नजर आ सकता है तो इसे दुनिया भर के लिए बड़ा अलर्ट कहा जा सकता है। अब सवाल यूरोप का नहीं बल्कि, हमारे देश भारत को लेकर भी उठते हैं। क्या भारत भी इसी दिशा में बढ़ रहा है? क्या सच में भारत में सर्दी का सीजन छोटा हो चला है? क्या गर्मियों के बढ़ते दिनों के साथ ही तापमान में भी बदलाव देखा जा रहा है? भारतीय मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र के पिछले 100 से ज्यादा वर्षों के मौसमी रिकॉर्ड, वैज्ञानिक शोध और हालिया अध्ययनों पर जब नजर घुमाई गई, तो तस्वीर चौंकाने वाली बन गई। पढ़ें संजना कुमारी की खास रिपोर्ट…

क्या कहता है मौसम विभाग का करीब 124 साल का रिकॉर्ड?

भारतीय मौसम विज्ञान अनुसंधान के इन दीर्घकालिक रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में देशभर के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊंचा ही दर्ज किया जा रहा है। इन 124 सालों में 2024 को सबसे गर्म वर्षों में गिना गया। यह 124 साल में नंबर वन पर रहा। वहीं 2025 भी रिकॉर्ड 8वां सबसे गर्म साल के रूप में दर्ज किया गया। वहीं पिछले 10-15 वर्षों में ज्यादातर साल विशेष रूप से 2016-2025 के दौरान सबसे ज्यादा गर्म वर्ष रिकॉर्ड किए गए हैं। जबकि 1901-1980 के बीच साल ऐसे थे जब इतनी गर्मी कभी दर्ज नहीं की (Climate Change Impact) गई।

वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन (WMO) के मुताबिक हमारा देश हर साल गर्म होता जा रहा है। 1901 की तुलना में भारत का औसत तापमान अब करीब 0.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। तापमान का ये उछाल दिखने में भले ही बहुत छोटा या कम लग रहा है, लेकिन 100 साल में इसका असर अच्छा खासा नजर आता है। अकेली गर्मी ही नहीं बल्कि सर्दी के सीजन में भी अब पहले से ज्यादा गर्मी महसूस की जा रही है। 2025 में सर्दी के तापमान में रिकॉर्ड तोड़ उछाल देखा गया। यह सामान्य से +1.17 डिग्री सेंटीग्रेड ज्यादा था।

क्या भारत में सच में लगातार घट रहे हैं सर्दी के दिन?

-IMD की वैज्ञानिक मैगजीन मौसम में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक जनवरी से मार्च के बीच अधिकतम से लेकर न्यूनतम तापमान तक में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अध्ययन बताता है खास तौर पर फरवरी के महीने में उत्तर भारत में सर्दी का रुख कुछ कमजोर पड़ा है। यह संकेत है कि सर्दी के दिन घट रहे हैं।

-जनवरी में अब पहले जैसी सर्द हवाएं नहीं रहीं, 2025 की जनवरी देशभर के मौसम रिकॉर्ड में अब तक की तीसरी सबसे गर्म जनवरी रही है। 1901 के बाद 2025 की फरवरी को सबसे गर्म महीने के रूप में दर्ज किया गया। वहीं मार्च के महीने में गर्मी जल्दी शुरू हो जाती है। सीजन का यह पेटर्न बताता है कि भारत में सर्दियां अब छोटी हो गई हैं।

-कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि 1901-1970 के बीच की अवधि में सर्दियों में तापमान बढ़ने की रफ्तार धीमी थी। तापमान बढ़ने की यह गति 1980 के बाद तेजी से बढ़ी है। 2000 के बाद लगातार कई साल से सामान्य से ज्यादा गर्म रहने वाले दिन सर्दियों में बढ़े हैं। वहीं पिछले 10-15 साल में भारत में सबसे ज्यादा गर्मी के दिनों वाले वर्ष रिकॉर्ड किए गए हैं। मौसम का यही पेटर्न दीर्घकालीन वॉर्मिंग ट्रेंड को मजबूत बनाते हैं।

फैक्ट

जनवरी फरवरी हो रहे गर्म:जनवरी-फरवरी 2025 का औसत तापमान सामान्य से 17 डिग्री सेंटीग्रेड अधिक रहा। फरवरी 2025 ने सबसे गर्म फरवरी का रिकॉर्ड बनाया। जनवरी 2025 सबसे ज्यादा गर्म जनवरी दर्ज की गई।

सबसे गर्म दशक: 2016 से 2025 तक का समय ऐसा है, जिसे भारत का अब तक का सबसे गर्म दशक माना जाता है। IMD के मुताबिक इस दशक में औसत तापमान सामान्य से 0.32 डिग्री C अधिक दर्ज किया गया।

भारत में दर्ज किया गया अब तक सबसे ज्यादा तापमान:राजस्थान का फलौदी- 19 मई 2016- तापमान 51.0 डिग्री C

यदि 1901 के बाद के 5 सबसे गर्म वर्षों पर नजर डाली जाए, तो एक बड़ा ही दिलचस्प पेटर्न सामने आता है, इनमें से चार साल 2009 के बाद दर्ज किए गए हैं। यानी भारत के सबसे गर्म साल ऐतिहासिक नहीं वर्तमान की कहानी सुना रहे हैं। यही वो कारण है कि भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक इसे भविष्य का नहीं बल्कि वर्तमान का संकट मान रहे हैं।

यूरोप की गर्मी भारत के लिए चेतावनी क्यों? (Climate Change Effect Europe)

वैज्ञानिकों के मुताबिक यूरोप इन दिनों दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। हाल की भीषण हीटवेव को मानवीय हस्तक्षेप के कारण सामने आया ऐसा जलवायु परिवर्तन है, जो अब मौसमी गतिविधियों का अनिवार्य हिस्सा हो चला है। वहीं रात का तापमान भी लगातार ऊंचा हो चला है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही। यदि यही ट्रेंड अन्य क्षेत्रों में बढ़ता है, तो भारत जैसे देशों के लिए यह गंभीर चुनौती बनकर उभर सकता है।

बढ़ती गर्मी में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती (Climate Change big Warning)

इंटरगवर्नमेंटल पेनल ऑन क्लाइमेट चेंज के मुताबिक मानवीय गतिविधियों से लगातार बढ़ती ग्रीनहाउस गैंसें पृथ्वी को लगातार गर्म कर रही हैं। भारत ऐसे ही देशों में शामिल है, जहां हीटवेव, सूखा और अत्यधिक बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं और ज्यादा तीव्र हो सकती हैं।

पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे के मुताबिक भारत में गर्मी का सीजन लंबा होता जा रहा है, यदि भविष्य में भी यह पेटर्न जारी रहा, तो इसका भारत पर व्यापक स्तर पर असर नजर आने वाला है…

घट सकता है गेहूं का उत्पादन

भारत में गर्मी का असर रबी की फसलों पर दिखेगा। खासकर गेहूं, सरसों और चना ऐसी फसले हैं जो ठंडे मौसम पर निर्भर करती हैं। यदि फरवरी-मार्च ज्यादा गर्म रहे, तो दाने भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और इनकी पैदावार भी घटेगी।
फैक्ट- हर एक डिग्री तक बढ़ती गर्मी से लाखों टन गेहूं का उत्पादन प्रभावित कर सकती है।

पानी का बढ़ता संकट भी चिंता

पर्यावरणविद् कहते हैं कि बढ़ती गर्मी के कारण हिमालय में बर्फबारी कम हो जाएगी। वहीं बर्फ तेजी से पिघलेगी। इसका नतीजा होगा कि गर्मियों में नदियों में पानी कम हो जाएगा। इससे सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पागन प्रभावित होंगे।

बढ़ेगी बिजली की मांग

गर्मियां शुरू होंगी और लंबे समय तक रहेंगी तो, एसी, कूलर और पंखों का यूज भी बढ़ेगा। ऐसे में बिजली की मांग बेतहाशा बढ़ेगी। वहीं बिजली कटौती में भी इजाफा होगा।

हीट स्ट्रोक और मौतें बड़ा खतरा

हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि गर्मियों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे हीट वेव का खतरा बढ़ेगा। हीटवेव का असर लोगों की सेहत पर भी नजर आएगा। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, मजदूरों और किसानों की सेहत प्रभावित होगी। गर्मी के कारण बढ़ने वाली हीट वेव ही हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और हृदय संबंधी शारीरिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ेंगी

गर्मियों की लंबी अवधि और सर्दी के घटते दिनों का असर बारिश और बर्फबारी पर दिखेगा। इससे जहां बारिश कम होगी, वहीं सर्दी कम पड़ने से बर्फबारी में भी कमी आएगी। इसका असर जंगलों पर दिखेगा। जंगल सूखने लगेंगे। खासतौर पर मध्य भारत, उत्तराखंड और हिमालय के जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

हिमालय पर दिखेगा कैसा असर?

जलवायु परिवर्तन को देखते हुए एमपी के पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडे का कहना है कि इसका असर पश्चिमी हिमालय पर नजर आ रहा है, वहां बर्फबारी पिछले कुछ सालों में लगातार कम हुई है। बर्फ जल्दी पिघलने को लेकर भी जलवायु विशेषज्ञ अलर्ट कर चुके हैं। इससे ग्लेशियरों पर दबाव बढ़ेगा और भविष्य में जल संकट के रूप में सामने आएगा।

Climate change in india: भारत में लगातार कम हो रही सर्दी के असर भी खतरनाक कम बारिश, कम बर्फबारी केजी से पिघलेंगे ग्लेशियर तो नदियां सूखती दिखेंगी, जल संकट बढ़ेगा। (फोटो सोर्स: AI Generated)

मच्छर और कीट जनित बीमारियों का खतरा बढ़ेगा (Climate Change and health)

मौसम में गर्मी बढ़ने से मच्छरों समेत अन्य कई कीटों का जीवनकाल भी प्रभावित होता है। खास तौर पर डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का जोखिम पहले से जहां है, वहां के अलावा नये स्थानों को भी अपनी चपेट में लेगा।

शहरों में गर्मी से बेहाल होंगे लोग

शहरी लोग इस गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित (Climate Change effects) होंगे। डेवलपमेंट के लिए पेड़ों की कटाई लगातार जारी है। कांक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं, उस पर बढ़ते ट्रैफिक के कारण शहरों में अर्बन हीट आयलेंड इफेक्ट तेज होगा। शहर के आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों से कई डिग्री ज्यादा तापमान और गर्मी शहरों के लोगों को परेशान करेगी।

मौसम में लगातार अनिश्चितता बढ़ेगी

भविष्य में सिर्फ गर्मी ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि मौसम का पेटर्न भी प्रभावित होगा। इसमें लगातार अनिश्चितता दिखेगी। कहीं अचानक भारी बारिश होगी, तो कहीं लंबे समय तक सूखा बना रहेगा। वहीं कहीं गर्मी के मौसम में हीटवेव रौद्र रूप में होंगी जो जान पर भारी पड़ती नजर आ सकती हैं।

फैक्ट

घटती सर्दी और गर्मियों की लंबी अवधि जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। इसका सबसे बड़ा असर तापमान बढ़ना मात्र नहीं है, बल्कि पूरी मौसम व्यवस्था का अस्थिर होना है। जिसका असर कृषि, जल, सेहत और अर्थव्यवस्था सभी बुरी तरह प्रभावित होंगे।

फैक्ट

100 साल के 5 सबसे गर्म साल

  1. 2024- +0.65 डिग्री सेंटीग्रेड
  2. 2016- +0.54 डिग्री सेंटीग्रेड
  3. 2009- +0.40 डिग्री सेंटीग्रेड
  4. 2010- +0.38 डिग्री सेंटीग्रेड

ध्यान देना होगा कि 1901 के बाद 15 सबसे गर्म वर्षों में 10 साल 2011-2025 के बीच ही आए हैं।

Updated on:
30 Jun 2026 04:40 pm
Published on:
01 Jul 2026 07:00 am
Also Read
View All