
Bastar Tourism: बस्तर के चित्रकोट जलप्रपात की गूंज, कांगेर घाटी के घने जंगल, तीरथगढ़ की जलधाराएं और आदिवासी संस्कृति वर्षों से दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती रही हैं। लेकिन इस साल तस्वीर बदली हुई है। हजारों किलोमीटर दूर खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका ने बस्तर के पर्यटन उद्योग की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में आई भारी गिरावट ने होटल संचालकों, होमस्टे मालिकों, गाइडों और स्थानीय कारोबारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पर्यटन कारोबारियों के मुताबिक पिछले वर्षों की तुलना में इस बार विदेशी पर्यटकों की बुकिंग में लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। यूरोप, अमेरिका और अन्य देशों से आने वाले पर्यटक आमतौर पर कई महीने पहले अपनी यात्रा की योजना बनाते थे, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी यात्राएं रद्द या स्थगित कर दी हैं। नतीजा यह है कि बस्तर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी बेहद कम हो गई है। जहां पहले विदेशी पर्यटकों के समूह आसानी से दिखाई देते थे, वहां अब सन्नाटा नजर आने लगा है।
बस्तर का पर्यटन केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। यहां की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली, लोककला, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन विदेशी पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर गुफाएं, आदिवासी गांव और स्थानीय बाजार विदेशी मेहमानों की पसंदीदा जगहों में शामिल रहे हैं। लेकिन इस बार इन स्थलों पर अपेक्षित भीड़ देखने को नहीं मिल रही है।
पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद थी कि विदेशी पर्यटकों की कमी को देश के अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक पूरा कर देंगे। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे, कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों से बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की संभावना थी। हालांकि यह उम्मीद भी पूरी नहीं हो सकी। घरेलू पर्यटकों की संख्या में भी अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। इसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। होटल, रिसॉर्ट, वाहन संचालन, स्थानीय बाजार और पर्यटन आधारित छोटे व्यवसायों की आय प्रभावित हुई है।
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में बढ़ोतरी, वैश्विक अनिश्चितता और यात्रा लागत बढ़ने से पर्यटक अब अधिक सतर्क हो गए हैं। बस्तर तक पहुंचने के लिए विदेशी पर्यटकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई मामलों में कनेक्टिंग फ्लाइट और अतिरिक्त यात्रा खर्च भी जुड़ जाता है। इसके अलावा होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं की बढ़ी हुई कीमतों ने भी पर्यटकों का बजट प्रभावित किया है। ऐसे में कई पर्यटक कम खर्च वाले और आसान पहुंच वाले पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित उद्योग नहीं है। इससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। बस्तर में गाइड, ड्राइवर, होटल कर्मचारी, होमस्टे संचालक, हस्तशिल्प विक्रेता और स्थानीय कलाकार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन पर निर्भर हैं। विदेशी पर्यटकों की संख्या घटने से इन लोगों की आय पर भी असर पड़ा है। कई होमस्टे संचालकों का कहना है कि पहले जहां सीजन शुरू होने से पहले ही बुकिंग फुल हो जाती थी, अब कई कमरे खाली पड़े हैं।
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र की छवि से बाहर निकलकर खुद को एक उभरते पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित किया था। बेहतर सड़कें, पर्यटन सुविधाओं का विकास और बढ़ती राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान ने यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ाई थी। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने दिखा दिया है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में पैदा होने वाला संकट स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर सकता है। बस्तर का पर्यटन उद्योग भी इसी चुनौती का सामना कर रहा है।
छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहा, लेकिन पिछले एक दशक में यहां की तस्वीर तेजी से बदली है। प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म की संभावनाओं ने बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई। चित्रकोट जलप्रपात को भारत का नियाग्रा कहा जाता है। तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर और कैलाश गुफाएं, चित्रधारा, तामड़ा घूमर, दंतेश्वरी मंदिर और आदिवासी जीवनशैली विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
खासकर यूरोप और अमेरिका से आने वाले पर्यटक बस्तर के जंगलों, जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति को करीब से देखने के लिए यहां पहुंचते रहे हैं। वर्ष 2022 के बाद पर्यटन गतिविधियों में तेजी आई थी। होमस्टे, रिसॉर्ट, जंगल सफारी और स्थानीय गाइड सेवाओं का विस्तार हुआ। कई गांवों में पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने इस बढ़ती रफ्तार पर अचानक ब्रेक लगा दिया है।