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भिलाई में बेटियों की घटती संख्या डराने लगी, हर साल 600-1200 कम जन्म, 6 साल के आंकड़े चौंकाने वाले

Declining Girl Child Birth Rate in Bhilai: भिलाई समेत दुर्ग जिले में बेटियों की घटती जन्म दर ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। 2020 से 2025 के बीच हर साल लड़कों के मुकाबले 600 से 1200 तक कम बेटियां पैदा हुई हैं।

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Apr 25, 2026
भिलाई में घटती कन्या जन्म दर ने बढ़ाई चिंता (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Declining Girl Child Birth Rate in Bhilai: महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के बावजूद दुर्ग जिले, खासकर भिलाई जैसे शहरी क्षेत्र में बेटियों के प्रति समाज का नजरिया अपेक्षित रूप से नहीं बदल पाया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह वर्षों से जिले में कन्या जन्म दर लगातार घट रही है, जो सामाजिक संतुलन के लिए गंभीर संकेत है।

सांख्यिकी विभाग के पंजीकृत आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष बालकों की तुलना में कन्याओं का जन्म कम हो रहा है। वर्ष 2020 मे 766, 2021 में 661, 2022 में 753, 2023 में 1200, 2024 में 1120 और 2025 में 603 कन्याएं कम जन्मी हैं। यह स्थिति इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि दुर्ग एक शिक्षित जिला है और यहां प्रशासनिक व राजनीतिक क्षेत्रों मे महिलाओं की मजबूत भागीदारी भी देखी जाती है।

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प्रदेश में भी असंतुलन

छत्तीसगढ़ मे भी तस्वीर संतोषजनक नहीं है। वर्ष 2024 मे प्रदेश में कुल 5,93,197 जन्म दर्ज हुए, जिनमें 3,01,939 बालक और 2,91,216 कन्याएं हैं। केवल बालोद, बेमेतरा और जशपुर जैसे कुछ जिलों में ही कन्या जन्म संख्या अधिक है, जबकि ज्यादातर शहरी क्षेत्रों में स्थिति विपरीत है।

दुर्ग जिले के आधिकारिक जीवनांक आंकड़े

  • वर्ष - कुल जन्म - बालक - कन्या - अंतर
  • 2020 - 27,354 - 14,060 - 13,294 -766
  • 2021 - 27,083 - 13,872 - 13,211 -661
  • 2022 - 33,419 - 17,086 - 16,333 -753
  • 2023 - 33,262 - 17,231 - 16,031 -1,200
  • 2024 - 30,514 - 15,817 - 14,697 -1,120
  • 2025 - 32,791 - 16,697 - 16,094 -603

समस्या की जड़ पुरानी सोच और आर्थिक गणित

समाजशास्त्री डॉ. एस.के. श्रीवास्तव के अनुसार, यह समस्या गरीबी या अशिक्षा से नहीं, बल्कि सम्पन्नता, तकनीक और पारंपरिक सोच के खतरनाक मिश्रण से पैदा हो रही है। मध्यम वर्ग में आज भी बेटा ‘बुढ़ापे का सहारा’ और बेटी ‘आर्थिक बोझ’ के रूप में देखी जाती है। पढ़ाई, शादी और दहेज के खर्च का डर भ्रूण हत्या जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देता है। जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दंडात्मक कार्रवाई के उदाहरण सामने नहीं आते, जिससे कानून का डर कम हो गया है।

निगरानी तंत्र सिर्फ कागजों तक सीमित

भिलाई-दुर्ग में निजी सोनोग्राफी सेंटर, क्लिनिक और बड़े अस्पतालों की संख्या अधिक है। संपन्न और शिक्षित वर्ग के पास संसाधन होने के कारण गुपचुप लिंग जांच की आशंका बनी रहती है। हालांकि निगरानी के लिए जिला स्तरीय सलाहकार समिति मौजूद है, लेकिन उसका कार्य सीमित होकर रह गया है।

नियमों का हो रहा पालन

डॉ. श्रवण दोनेरिया, नोडल अधिकारी, पीसीपीएनडीटी एक्ट, दुर्ग के मुताबिक< जिले में 101 सोनोग्राफी सेंटर संचालित हैं और उनकी नियमित जांच की जाती है। अब तक लिंग परीक्षण या नियमों के उल्लंघन का कोई मामला सामने नहीं आया है। गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग जांच कराना और इसकी जानकारी देना कानूनन दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

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Published on:
25 Apr 2026 06:06 pm
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