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Diabetes Shoulder Pain: डायबिटीज के साथ बढ़ रहीं शोल्डर बीमारियां, 60 के बाद बढ़ा खतरा, स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Diabetes Shoulder Pain: हाल ही में हुई एक स्टडी में सामने आया है कि अनियंत्रित डायबिटीज के कारण बड़ी संख्या में लोग फ्रोजन शोल्डर जैसी दर्दनाक समस्या का शिकार हो रहे हैं, खासकर 60 साल के बाद इसका खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

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Apr 30, 2026
डायबिटीज के साथ बढ़ रहीं शोल्डर बीमारियां (फोटो सोर्स- पत्रिका)
डायबिटीज के साथ बढ़ रहीं शोल्डर बीमारियां (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Diabetes Shoulder Pain: अनियंत्रित डायबिटीज न केवल हृदय, किडनी, आंख और लिवर को प्रभावित कर रही है, बल्कि फ्रोजन शोल्डर की समस्या भी तेजी से बढ़ा रही है। एक चौथाई से अधिक मरीज कंधे के असहनीय दर्द से पीड़ित हैं। यही नहीं, 60 वर्ष की उम्र के लोगों में इस समस्या के मरीजों की संख्या 32 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है, जबकि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 42 प्रतिशत बुजुर्गों में फ्रोजन शोल्डर की बीमारी देखी गई है।

हड्डी रोग विशेषज्ञों की स्टडी में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। स्टडी के अनुसार, फ्रोजन शोल्डर से पीड़ित व्यक्ति अपना हाथ ठीक से नहीं उठा पाते। यदि यह समस्या एक साल तक बनी रहती है या समय पर इलाज नहीं कराया जाता, तो दूसरे कंधे में भी दिक्कत शुरू हो सकती है।

युवा भी डायबिटीज के शिकार हो रहे

जीवनशैली और खानपान में आए बदलाव के कारण अब कम उम्र, खासकर युवा भी डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। इसके चलते 30 से 40 वर्ष के लोग भी फ्रोजन शोल्डर की समस्या से प्रभावित हो रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें अधिकांश लोग पांच वर्ष या उससे अधिक समय से डायबिटीज के मरीज हैं। डॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए और खानपान व जीवनशैली में बदलाव कर इसे नियंत्रित रखना चाहिए।

रोटेटर कफ इंजरी के साथ बर्साइटिस की समस्या भी बढ़ी

डायबिटीज के मरीजों में अब फ्रोजन शोल्डर के अलावा रोटेटर कफ इंजरी, बर्साइटिस, टेंडिनाइटिस, डिसलोकेशन और शोल्डर इम्पिंजमेंट सिंड्रोम जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि रोटेटर कफ टियर जैसी गंभीर समस्याओं के इलाज में बायो-कंपोजिट इम्प्लांट नई क्रांति ला रहे हैं। ये इम्प्लांट बायोटेक्नोलॉजी से बने होते हैं, जिन्हें सर्जरी के दौरान मात्र पांच मिनट में लगाया जा सकता है। इन्हें आर्थोस्कोपी (दूरबीन तकनीक) की मदद से कंधे की मांसपेशियों से जोड़ा जाता है। छह महीने में यह इम्प्लांट घुलकर मांसपेशी जैसा रूप ले लेता है और उसे मजबूती प्रदान करता है।

सूर्य की रोशनी, दूध और दही से मिलेगा विटामिन डी, हड्डियां रहेंगी मजबूत

फ्लैट संस्कृति के कारण लोगों को पर्याप्त सूर्य प्रकाश नहीं मिल पा रहा है, जिससे विटामिन डी की कमी बढ़ रही है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। यदि शरीर में विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में न हो, तो कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है और हड्डियां कमजोर व भंगुर हो जाती हैं।

विटामिन डी का प्रमुख स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा दूध, दही, पनीर, मछली और मशरूम में भी यह पाया जाता है। बच्चों में इसकी कमी से रिकेट्स नामक बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां नरम और विकृत हो जाती हैं। वहीं वयस्कों में ऑस्टियोमैलेशिया की समस्या होती है, जिसमें हड्डियां नरम और दर्दनाक हो जाती हैं। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसमें हड्डियां पतली और कमजोर हो जाती हैं।

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. एस. फुलझेले, सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों को कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें फ्रोजन शोल्डर प्रमुख है। इस बीमारी में असहनीय दर्द होता है, जिससे हाथ उठाना भी कठिन हो जाता है। यदि आप डायबिटिक हैं, तो डॉक्टर की सलाह से नियमित दवा लें। साथ ही, जीवनशैली और खानपान में सुधार कर डायबिटीज को नियंत्रित रखें। बेहतर होगा कि नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

Published on:
30 Apr 2026 03:52 pm