
Divorce : इसी साल फरवरी में दो दिल एक हुए थे, लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही सोशल मीडिया पर एक-दूसरे की पोस्ट और तस्वीरें देखने को लेकर उपजा विवाद इतना बढ़ा कि महज दो महीने के भीतर दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। वहीं, एक अन्य मामले में पत्नी द्वारा दिनभर 'रील्स' बनाने की आदत से परेशान पति ने हाल ही में कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की है।
यह तो महज कुछ बानगी हैं। कभी अपनों को जोड़ने का जरिया बना सोशल मीडिया अब वैवाहिक रिश्तों में कड़वाहट और परिवारों में बिखराव की सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। पारिवारिक अदालतों (फैमिली कोर्ट) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, करीब 40 फीसदी मामलों के तार सीधे तौर पर सोशल मीडिया के अति-प्रयोग से जुड़े हैं। अब व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सोशल साइट्स पर अत्यधिक समय बिताना, देर रात तक ऑनलाइन रहना और जीवनसाथी की उपेक्षा करना वैवाहिक जीवन को तबाह कर रहा है।
पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डी.एस. शेखावत के अनुसार, सोशल मीडिया की वजह से उपजे इन विवादों को सुलझाना बेहद पेचीदा और जटिल होता जा रहा है। अब अदालतों में हर चौथे मामले की फाइल में व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट और कॉल लॉग्स बतौर डिजिटल साक्ष्य पेश किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रिश्तों को बचाने के लिए केवल कानूनी उपाय काफी नहीं हैं, बल्कि कपल्स को 'डिजिटल डिटॉक्स' (सोशल मीडिया से दूरी) करने और आपस में सीधा संवाद स्थापित करने की सख्त जरूरत है।
एडवोकेट सिद्धार्थ जैन मूथा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राजस्थान की पारिवारिक अदालतों में तलाक के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। जहां साल 2023 में जयपुर की अदालतों में करीब 4400 वैवाहिक विवाद लंबित थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 8500 पहुंच चुकी है। कई मामलों में पति या पत्नी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति से गुप्त अकाउंट चलाकर लगातार चैटिंग करना या पुराने लिंक को दोबारा एक्टिवेट करना विवाद की मुख्य वजह बन रहा है।
'परफेक्ट लाइफ' की रील : सोशल मीडिया पर दूसरों की नकली 'परफेक्ट लाइफ', घूमने-फिरने की तस्वीरें और महंगे उपहारों से सजी रील्स देखकर कपल्स अपने रीयल पार्टनर की तुलना उनसे करने लगते हैं।
निजता और संवाद की कमी : घर लौटने के बाद भी पति-पत्नी का एक-दूसरे से बात करने के बजाय अपनी-अपनी मोबाइल स्क्रीन पर व्यस्त रहना 'इमोशनल डिस्कनेक्ट' (भावनात्मक दूरी) पैदा कर रहा है।
संदेह का जाल : देर रात तक ऑनलाइन चैट करना, फोन पर प्राइवेसी पासवर्ड लगाकर रखना या किसी अनजान 'वर्चुअल फ्रेंड' की पोस्ट पर बार-बार प्रतिक्रिया देना जीवनसाथी के मन में संदेह का बीज बो देता है।